पिछले दो तीन दिन से सोशल मीडिया पर गाजा की सुरंग में कैद एक इस्राएली बंधक का वीडियो चल रहा है। उसे देख कर लाखों लोग आगबूबला हो रहे हैं। उस वीडियो में दिख रहा 24 साल का एव्यातार डेविड वही युवा है जिसे इस्लामी जिहादी हमास ने 7 अक्तूबर 2023 के दिन इस्राएल में चल रहे संगीत के नोवा उत्सव से अगवा किया था। हमास के दुष्प्रचार तंत्र ने जारी किए उस भयावह वीडियो में उसकी बदहाली दिखाई है जिससे इस्राएल की सेना पिघल जाए और हमले बंद करके जिहादियों को उनके बिलों में दुबके रहने दे। वीडियो में डेविड हड्डियों का ढांचा बना दिख रहा है और कथित तौर पर अपनी ही कब्र खोदने के लिए मजबूर किया गया दिखता है। बेशक, उसकी तस्वीरों से साफ दिखाई दे रहा है कि वह भूख और दुर्व्यवहार का बुरी तरह शिकार बना हुआ है। उसे गाजा की सुरंगों में जानबूझकर भूखा रखा जा रहा है और प्रताड़ित किया जा रहा है।
इस वीडियो को सोशल मीडिया पर इस्राएली यूजर्स में बड़े पैमाने पर साझा किया। इन्हें जिसने देखा उसी में गुस्सा उबलने लगा। विश्व के बड़े अखबारों की इस पर चुप्पी भी हैरानी पैदा करती है। बड़े मीडिया संस्थान चुप क्यों हैं? इस अकल्पनीय क्रूरता को उजागर करने के बजाय, क्या वे हमास के झूठ को बढ़ावा देते रहना चाहते हैं? इस्राएल से आक्रोश भरी मांग उठी है कि एव्यातार डेवडि और शेष सभी बंधकों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए और उन्हें उचित भोजन और चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए।

हमास और पैलेस्टीन इस्लामिक जिहाद के कब्जे में सूखकर कांटा बन चुके इजरायली बंधकों को शायद पीने को पूरा पानी तक नहीं मिल रहा है। बर्बरता ऐसी कि उनसे उनकी कब्रें खुदवाई जा रही हैं। इस हरकत से जिहादी हमास की बर्बर मानसिकता साफ उजागर होती है। गाजा की सुरंगों में कैद इस्राएली बंधकों की भयावह स्थिति पर सामने आए वीडियो और रिपोर्ट ने सभ्य जगत को झकझोर कर रख दिया है।

हमास और पीआईजे बंधकों को केवल सैन्य रणनीति के तहत नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं। वीडियो में बंधकों को भूखा-प्यासा दिखाना, कब्र खोदते दिखाना और मदद की गुहार लगवाना एक सोची-समझी रणनीति है ताकि अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके। गाजा में शासन करने वाले हमास के लिए बंधक इस्राएली जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई के लिए सौदेबाजी का जरिया हैं।
गाजा में बंधकों को छोटी कोठरियों में बंद करना, उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ना यह दर्शाता है कि हमास की रणनीति केवल युद्ध नहीं, बल्कि अमानवीयता पर आधारित है। इसी तरह तीन दिन पहले एक बंधक रोम ब्रास्लावस्की का वीडियो जारी हुआ था। उस वीडियो में ब्रास्लावस्की बेहद कमजोर हालत में दिख रहा है, हड्डियों का ढांचा बन चुका है। वीडियो में वह कह रहा है, “मेरे पास खाना-पानी नहीं है, मैं मरने के करीब हूं”। एक अन्य दृश्य में उसे अपनी ही कब्र खोदते दिखाया गया है, जो आतंक और मानसिक यातना की चरम सीमा है।
वीडियो में ब्रास्लावस्की ने युद्ध रोकने की अपील की और कहा, “बस हमें खाना दो, अगर गाजा के लिए नहीं तो बंधकों के लिए”। इसी प्रकार 80 वर्षीय बंधक मोज़ेज़ को 70 दिनों तक एक दो वर्ग मीटर की कोठरी में रखा गया। उन्होंने टाइलें गिनकर और गणित के सवाल हल कर समय बिताया। उनका वजन 15 किलो घट गया। उन्हें किसी से बात करने की अनुमति नहीं थी, चश्मा टूट गया था इसलिए देखने में दिक्कत पेश आ रही थी।
वीडियो देखकर ब्रास्लावस्की की मां ने कहा, “जब आपका बेटा कहे कि वह जिंदा नहीं बचेगा, तो उस दर्द को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता”। वह सवाल उठाती हैं कि क्या युद्ध में बंधकों को इस तरह अमानवीय यातना देना किसी भी उद्देश्य को न्यायोचित ठहरा सकता है? हमास और पीआईजे की मानसिकता केवल सैन्य प्रतिरोध नहीं, बल्कि एक क्रूर और अमानवीय रणनीति है जो बंधकों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ने पर आधारित है। वायरल वीडियो ने इस क्रूरता को उजागर किया है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह इन बंधकों की रिहाई के लिए ठोस कदम उठाए। यह सिर्फ एक युद्ध नहीं, बल्कि मानवता की परीक्षा है।

















