गैर-मुस्लिम लड़कियों के कन्वर्जन और फिर उन्हें आईएसआईएस के जाल में फँसाने वाली कहानी पर आधारित फिल्म ‘केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। इस फिल्म को मिले राष्ट्रीय पुरस्कार को लेकर अब राजनीति तेज हो गई है। हालांकि जब यह फिल्म रिलीज हुई थी, तभी इसे लेकर राजनीति हो रही थी। क्योंकि एक तरफ ऐसे लोग थे, जो यह मानकर बैठे हैं कि ऐसा कुछ होता ही नहीं है तो वहीं दूसरी तरफ आँकड़े थे और सच कहानियाँ थीं।
5 मई 2023 को रिलीज हुई इस फिल्म को रोकने के लिए भी अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था और फिर कुछ डिस्क्लेमर्स के साथ यह फिल्म रिलीज हुई थी। सुदीप्तो सेन के निर्देशन में बनी यह फिल्म अत्यंत सफल रही थी, हालांकि इसे लेकर एक बहुत बड़ा वर्ग इसी राय पर था कि यह संघ की प्रोपोगैंडा फिल्म है।
छवि के नाम पर कट्टरपंथ का समर्थन
केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने एक्स पर पोस्ट लिखा कि “एक फिल्म को सम्मानित करके जो स्पष्ट रूप से गलत जानकारी फैलाती है और केरल की छवि को धूमिल करने और सांप्रदायिक नफरत के बीज बोती है। नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की जूरी ने संघ परिवार की बांटने वाली विचारधारा पर आधारित एक कथा को वैधता दी है। केरल, जो हमेशा सामंजस्य और सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक रहा है, इस निर्णय से गंभीर रूप से अपमानित हुआ है।”
उन्होंने आगे लिखा कि केवल मलयाली नागरिकों को ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति को जो लोकतंत्र में विश्वास करता है, उसे सत्य की रक्षा के लिए आवाज उठानी चाहिए और संवैधानिक मूल्यों के लिए आवाज उठानी चाहिए, जो हमें प्रिय हैं।“ केरल के मुख्यमंत्री इस बात को तो नकारते हैं कि ऐसा कोई भी कार्य केरल में नहीं हो रहा है, मगर वे उन आंकड़ों को नहीं झुठला पाते हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि केरल में मजहबी कट्टरता बढ़ रही है और उसके शिकार केवल हिन्दू लड़कियां ही नहीं बल्कि ईसाई और कहीं न कहीं मुस्लिम लड़कियां भी हो रही हैं।
मुसलमान बाहुल्य राज्य बनाना चाहते हैं विजयन
इस फिल्म के रिलीज होने के बाद कई ऐसी लड़कियां सामने आई थीं, जिन्हें बहुत ही सुनियोजित तरीके से मतांतरण का शिकार बनाया गया था। और इसके साथ ही केरल के वर्तमान मुख्यमंत्री को केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानन्दन ने भी वर्ष 2022 में यह दावा किया था कि राज्य में मुस्लिम चरमपंथी समूह केरल को आगामी बीस वर्षों में मुस्लिम बाहुल्य राज्य के रूप में बदलना चाहते हैं।
ऐसा ही दावा अभी एक और नेता वेलापल्ली नातेसन ने भी किया है। वेलापल्ली राजनीतिक रूप से प्रभावशाली Ezhava समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं और उन्होंने यह बात श्री नारायण धर्म परिपालन योगम में की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के नेता केरल की सरकार पर अनावश्यक दबाव डालते हैं। इस बयान को लेकर उनकी चौतरफा आलोचना हुई और आल इंडिया मुस्लिम लीग और कॉंग्रेस ने इस बयान पर हंगामा किया था।
हालांकि इस चौतरफा आलोचना के बाद भी वेलापल्ली अपने बयान पर कायम हैं। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उन्होंने कहा कि “भले ही कंथापुरम (एपी अबूबकर मुसलियार, जिन्होंने कथित तौर पर यमनी सरकार को निमिषा प्रिया की मौत की सजा में देरी करवाई थी) मुझ पर हमले करते रहे”, मैं सामाजिक न्याय के लिए बोलना बंद नहीं करूंगा।“
फिल्म निर्माता सुदीप्तो सेन की मुख्यमंत्री को सलाह
वहीं इस फिल्म को लेकर मुख्यमंत्री विजयंन की आलोचना के बाद सुदीप्तो सेन ने उत्तर दिया है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वरिष्ठ राजनेता विजयन ने उनकी फिल्म देखी है क्योंकि यदि उन्होंने यह फिल्म देखी होती तो वे ऐसा नहीं करते।
उन्होंने यह भी कहा कि विजयन पहले भी ऐसे दावों का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि 15 वर्ष पहले केरल के एक प्रमुख राजनेता ने दिल्ली में एक प्रेस कान्फ्रेन्स में कहा था कि राज्य में पीएफआई और एसजीपीआई इस सीमा तक सक्रिय हैं कि वे एक दिन राज्य को आईएसआईएस राज्य में बदल सकती हैं और इस बयान का समर्थन करने वाले पहले व्यक्ति विजयन ही थे, जो उस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव थे।
फिल्म बनाने से पहले 500 पीड़ित लड़कियों से मिले
सुदीप्तो ने कहा कि वे राजनेता नहीं है और वे अपनी उस फिल्म के साथ खड़े हैं, जिसमें शोध के लिए उन्होंने बारह वर्ष दिए और वे केरल में लगभग 500 लड़कियों से मिले थे। मुख्यमंत्री विजयन इस फिल्म को नकार सकते हैं, मगर क्या वे बढ़ती कट्टरता को नकार सकते हैं, जो लगातार कई मामलों मे सामने आ रही है जैसे कि अभी जुम्बा डांस के मामले में सामने आई थी। सरकार का शिक्षा मंत्रालय बच्चों की फिटनेस के लिए विद्यालयों में यह डांस करवा रहा था, जिसके विरोध में मुस्लिम संगठन उतर आए हैं।
यदि इस फिल्म की ही बात की जाए तो सोनिया सेबेस्टियन उर्फ आयशा के मामले को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है, जो आईएसआईएस के साथ जुड़ चुकी थी और जिसके पिता ने सर्वोच्च न्यायालय में यह गुहार लगाई थी कि उसे पछतावा है।
















