लव जिहाद के तमाम मामलों में हिन्दू ही नहीं हर गैर-मुस्लिम लड़की की पीड़ा को नकारता वाम विमर्श
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लव जिहाद के तमाम मामलों में हिन्दू ही नहीं हर गैर-मुस्लिम लड़की की पीड़ा को नकारता वाम विमर्श

भोपाल तालाब में मिली मुखर लड़की की संदिग्ध लाश से लेकर TCS जिहाद और अमरोहा-केरल तक — लव जिहाद के मामलों पर कथित सेक्युलर गैंग की चुप्पी क्यों? पढ़िए वामपंथी दोगलेपन की सच्चाई।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
May 31, 2026, 02:34 pm IST
inविश्लेषण
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प्रतीकात्मक तस्वीर

हाल ही में भोपाल में एक ऐसी लड़की की संदिग्ध स्थिति में तालाब में लाश मिली जो भोपाल में लव जिहाद के संगठित गिरोह के खिलाफ एक मुखर स्वर थी। परिवार वालों का आरोप है कि उस पर केस वापस लेने का दबाव लगातार बनाया जा रहा था। मगर ऐसा नहीं है कि एक ही ऐसा मामला हो। कई मामले रोज आते हैं, जिनमें अपनी मजहबी पहचान छिपाकर लड़कों ने शादी की और फिर लड़कियों को या तो धर्म बदलने के लिए मजबूर किया या फिर जान ही ले ली।

मगर इन घटनाओं पर कथित प्यार की आजादी वाले गैंग की तरफ से एक अजीब चुप्पी दिखाई देती है। यह चुप्पी बहुत खतरनाक है। वे इन लड़कियों के लिए बोलते ही नहीं हैं। ये मौन का आवरण धारण किये रहते हैं। यदि कोई हत्या ऐसी हो जो बहुत ही व्यापक हो जाए और मीडिया में हल्ला हो जाए, तो जरूर उस पर बात करती हैं, मगर यह कहते हुए कि यह तो पितृसत्ता है या फिर ब्राह्मणवादी मानसिकता के लोग हैं।

केरल स्टोरी जैसी फिल्मों को बताया जाता है प्रोपागेंडा

जब इस पूरे षड्यन्त्र पर केरल स्टोरी जैसी फिल्में बनती हैं तो यह कहा जाता है कि यह सब प्रोपागैंडा फिल्में हैं। सबसे दुखद यह है कि लड़कियों के साथ ऐसे मामलों में या तो वे लोग चुप रहते है या फिर लड़कियों के घरवालों को खलनायक बनाया जाता है क्योंकि उनके अनुसार लड़की के घरवालों ने लड़की को मुस्लिमों के खिलाफ ऐसा नकारात्मक बना रखा होता है कि लड़कियां सहज किसी भी मुस्लिम लड़के के साथ निकाह नहीं कर सकती हैं।

वामपंथियों का दोगलापन देखिए

और वह हिन्दू लड़कियों को ही कठघरे में खड़ा करता है कि आखिर लड़कियां दूसरे मजहब के यकीनों को लेकर उदारमना क्यों नहीं हैं? मगर यह दूसरे मजहबी यकीन क्या होते हैं, इस पर बात नहीं होती। हिन्दू लड़कियों को जबरन बुर्का पहनाया जाता है, और घूँघट को शोषण का प्रतीक बताने वाला यह वर्ग हिन्दू लड़कियों को मुस्लिम युवाओं के साथ निकाह के बाद बुर्के में कैद होने को सहज बताता है।

इसके साथ ही कई हिन्दू लड़कियों ने यह भी शिकायत की कि पहले उन्हें मुसलमान बनाया गया और फिर गौमान्स खिलाने का प्रयास किया गया। मगर छोटी-छोटी बातों में संवेदनशीलता खोजने वाले और vegan आंदोलन चलाने वाले लोग गायों की हत्या और उनके मांस खिलाने की घटना पर भी इस लिए मौन रहते हैं क्योंकि उनकी नजर में यह खाने-पीने की आजादी है, तो इसमें क्या बुरा है।

लव जिहाद को हिन्दुओं का षड्यंत्र कहते हैं वामपंथी

ये लोग लव जिहाद को ऐसा हिंदूवादी षड्यन्त्र मानते हैं, जो इस्लामोफोबिक है और यह केवल लड़कियों की प्यार की और अपने मन के अनुसार जीवनसाथी खोजे जाने की आजादी के अधिकार पर परिवार का अंकुश है। उनके अनुसर यह समाज में ध्रुवीकरण बढ़ाने का ही एक मार्ग है।

मगर ये लोग इस बात पर चुप रह जाते हैं कि आखिर इतनी लड़कियां आखिर मारी क्यों जा रही हैं और अगर यह प्यार करने की ही आजादी है तो लड़कियों का ही धर्म परिवर्तन क्यों होता है? यह वर्ग यह बताने में अक्षम होता है कि आखिर ऐसा क्या है जो बस्ती के प्रिंस उर्फ अजफरुल को मजबूर करता है कि वह नाम बदले और फिर नौकरी का लालच हिन्दू लड़कियों को दे और फिर उन्हें जबरन जिस्म फरोशी के जाल में धकेल दे। और इतना ही नहीं वह वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करे।

अजमेर में निर्दोष लड़कियों के शिकार पर चुप्पी

यह वह वर्ग है जो अजमेर में निर्दोष लड़कियों का जीवन बर्बाद करने वालों पर बात नहीं करता है, हाँ, जो लोग उन लड़कियों के लिए न्याय की बात करते हैं या वह लड़कियां खुद न्याय की बात करती हैं तो उन्हें कोसता है, उन्हें खलनायक बताता है। उन्हें इस्लामोफोबिक कहता है।

मगर वह काभी भी अमरोहा के चाँद मोहम्मद पर बात नहीं करता, जिसने एक नाबालिग हिन्दू लड़की का नाम शबनम रखकर निकाह कर लिया था। यह उन नाबालिग लड़कियों के साथ हुए यौन शोषण पर भी चुप रहता है, जो इन युवाओं का शिकार होती हैं। अमरावती में हाल ही में जो मामला सामने आया, ये लोग उस पर भी चुप रहे। मगर यह समझ नहीं आता है कि इन अपराधियों को मात्र मजहब के आधार पर क्लीन चिट देने की हड़बड़ी क्यों होती है?

टीसीएस जिहाद पर चुप्पी

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस में हो रहे मामले पर भी ये लोग चुप रहे। वहाँ पर निदा खान और अन्य आरोपियों के षड्यन्त्र पर तो इन्होनें कुछ नहीं कहा, हाँ मामला बढ़ने पर यह चिंता जताई कि “कॉर्पोरेट में मुस्लिमों को काम नहीं मिलेगा!”

इन घटनाओं से कोई भी कोना अछूता नहीं है और न ही कोई भी गैर इस्लामिक मुल्क। इंदौर में फैजान ने रिची बनकर हिन्दू महिला का शोषण किया था, मगर फिर भी ये मामले इन्हें स्पर्श ही नहीं करते हैं। लखनऊ का केजीएमयू का बहुचर्चित लव जिहाद का मामला तो याद ही होगा। जिसमें रेजिडेंट डॉक्टर रमीज़ुद्दीन ने हिन्दू महिला डॉक्टर को प्रेम जाल में फँसाया था। फरवरी में भोपाल में लव जिहाद और इस्लाम में मतांतरण का जो मामला सामने आया था, उसमें महिलाओं की भी भूमिका थी।

जब इतने सारे मामले रोज ही आते हैं, तो ऐसे में लगातार ही कथित सेक्युलर पोर्टल्स पर लव जिहाद को मुस्लिमों के खिलाफ षड्यन्त्र बताते हुए लेख क्यों प्रकाशित हो रहे हाँ? क्यों पीडिताओं को ही इस्लामोफोबिक कहा जा रहा है और क्यों मृतक लड़कियों को खलनायक बताने का असफल प्रयास किया जा रहा है?

ये प्रश्न विचलित करने के लिए पर्याप्त हैं और यह प्रश्न उठने चाहिए कि आखिर हिन्दू लड़कियों से कथित सेक्युलर पोर्टल्स को प्यार क्यों नहीं है? क्यों उनकी आजादी उन्हें प्रिय नहीं है!

Topics: लव जिहाद# केरल स्टोरीवामपंथी दोगलापनहिंदू लड़कियां लव जिहाद शिकारसेक्युलर चुप्पी
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