मालेगांव विस्फोट केस: साध्वी प्रज्ञा पर अत्याचार, RSS प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने की कांग्रेसी साजिश
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मालेगांव विस्फोट केस: साध्वी प्रज्ञा पर अत्याचार, RSS प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने की कांग्रेसी साजिश

मालेगांव ब्लास्ट 2008 के फैसले ने भगवा आतंकवाद की झूठी कहानी को उजागर किया। जानें कैसे RSS प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने की साजिश रची गई थी।

Written byअभय कुमारअभय कुमार
Aug 2, 2025, 09:20 am IST
inविश्लेषण
Malegaon blast case sadhvi Pragya

साध्वी प्रज्ञा को 17 साल बाद मिला इंसाफ

मालेगांव में 2008 में ब्लास्ट हुए विस्फोट का फैसला 2025  में आया है। इस फैसले ने भगवा आतंकवाद के नाम पर फैलाए गए झूठे विस्फोट की परतें खोल कर रख दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं वरन अब एक से बढ़कर एक षड्यंत्र सामने आते जा रहे हैं। उस समय सत्ता में बैठे लोगों ने गहरी साजिशें करने का प्रयास किया था। ये साजिशें सिर्फ भगवा आतंक की झूठी सिद्धांत तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि यह षड्यंत्र भगवा ध्वज के सबसे बड़े ध्वजवाहक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके नेता डॉ. मोहन भागवत को फंसाने के लिए भी था।

इतने बड़े रहस्य का पर्दाफाश उस अधिकारी ने किया है जो खुद मालेगांव विस्फोट काण्ड की जांच कर रहा था। उक्त अधिकारी महबूब मुजावर के अनुसार उस समय उच्च पदों पर बैठे कुछ लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार करवाना चाहते थे।

डॉ मोहन भागवत जी को आतंकी मामले में गिरफ्तार करने का था आदेश

मालेगांव विस्फोट कांड की जांच महाराष्ट्र की आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी एटीएस ने की थी। एटीएस के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था। महबूब मुजावर ने यह भी बताया है कि यह आदेश उस समय के वरिष्ठ अधिकारी परमवीर सिंह और उससे भी बड़े उच्च अधिकारियों ने दिया था। महबूब मुजावर का कहना है कि मोहन भागवत को गिरफ्तार करने के ऑपरेशन के लिए उन्हें 10 पुलिसकर्मी और एक रिवाल्वर उपलब्ध कराया गया था। इसके लिए उन्हें सर्विस सीक्रेट फंड से धन भी दिया गया था।

भगवा आतंकवाद के सिद्धांत को साबित करने के लिए रची गई साजिश        

स्पष्ट है कि साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भी मालेगांव विस्फोट में फंसाकर गिरफ्तार करने की साजिश रची गई थी। देशभक्त संगठन आरएसएस को बदनाम करने और भगवा आतंकवाद का झूठा आख्यान तैयार करने की पुष्टि पूर्व एटीएस अधिकारी महबूब मुजावर ने भी की है। महबूब मुजावर ने दावा किया है कि भगवा आतंकवाद के सिद्धांत को स्थापित करने के लिए ये सब किया गया था। महबूब मुजावर का कहना है कि उनके पास इस दावे को साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। महबूब मुजावर के अनुसार, कोई भगवा आतंकवाद नहीं था और यह सब कुछ फर्जी था।

RSS को आतंकी संगठन घोषित कर बैन करवाना था मकसद

मशहूर पत्रकार और मालेगांव ब्लास्ट पर लिखी पुस्तक ‘आतंक से समझौता’ के लेखक डॉ प्रवीण तिवारी के अनुसार, ये पूरा मामला एक राजनीतिक साजिश थी। इस साजिश के निशाने पर आरएसएस था और इसका मकसद आरएसएस पर प्रतिबंध लगाना था। डॉ प्रवीण तिवारी और महबूब मुजावर दोनों के अनुसार, मालेगांव ब्लास्ट के नाम पर आरएसएस और उसके प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने की साजिश थी।

आतंकी हमलों में इस्लामिक चरमपंथी संगठन शामिल, फिर भी दोष हिन्दुओं पर

केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मणि जिन्होंने 2006 से 2010 तक आंतरिक सुरक्षा विभाग में काम किया था। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘हिंदू टेरर इनसाइडर अकाउंट ऑफ मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स’ में लिखा है कि उस समय की यूपीए सरकार ने पूरी तरह से भगवा आतंकवाद के सिद्धांत को बढ़ावा दिया था। शुरुआती जांच में कई बड़े आतंकी हमलों में कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों और पाकिस्तान का हाथ होने का सबूत मिला था। लेकिन सत्ता में बैठे कुछ लोगों ने बाद में हिंदू आतंकवाद की झूठी कहानी गढ़कर इन मामलों में हिंदुओं पर दोष मढ़ने की कोशिश की थी। 2008 के मालेगांव विस्फोट में पुलिस को मिले शुरुआती सुरागों के मुताबिक, यह आतंकी हमला ‘अहल -ए- हदीस’ नाम के एक इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन ने किया था। लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव में जांच की दिशा मोड़ दी गई और हिंदू आतंकवाद की कहानी बनाई गई थी।

इसे भी पढ़ें: मालेगांव ब्लास्ट केस और हम पचमढ़ी के भुक्तभोगी, पहले एटीएस और फिर एनआईए ने तनाव से भर दिया…

सत्ता में बैठे लोगों ने रची थी भगवा आतंकवाद की साजिश

इन तथ्यों से यह साबित होता है कि उस समय सत्ता में बैठे कुछ ताकतवर लोगों ने यह तय कर लिया था कि किसी भी तरह से उन्हें भगवा आतंकवाद के झूठे सिद्धांत को दुनिया के सामने सच साबित करना है और इसके लिए यह ताकतवर लोग मालेगांव विस्फोट और दूसरी आतंकवादी घटनाओं के तार आरएसएस और उसके प्रमुख मोहन भागवत से जोड़ने में लगे हुए थे। वैसे अधिकारी जो उनकी बात नहीं मान रहे थे उन्हें भी साइड कर दिया जाता था। महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व अधिकारी महबूब मुजावर ने दावा किया है कि जब उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने से इंकार कर दिया तो उन पर कई झूठे मुकदमे लाद दिए गए और उन्हें गिरफ्तार तक कर लिया गया।

RSS प्रमुख को फंसाना आसान नहीं

उस समय सत्ता में बैठे लोग और महाराष्ट्र एटीएस के तत्कालीन अधिकारी जानते थे कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को झूठे आतंकवाद के केस में तब तक नहीं फंसाया जा सकता है जब तक कि उनके खिलाफ कोई पुख्ता गवाही ना हो। दूसरे शब्दों में अगर मालेगांव विस्फोट में गिरफ्तार कोई आरोपी अगर मोहन भागवत के खिलाफ गवाही दे देता तो केस पुख्ता बन जाता। इस कारण एटीएस ने आरोपियों पर गंभीर और अमानवीय अत्याचार किए और उन पर यह दबाव डाला कि वह आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का झूठा नाम अपनी गवाही में लें।

डॉ मोहन भागवत को फंसाने के लिए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर ATS मे ढाया कहर

एटीएस के इस अमानवीय अत्याचार की सबसे बड़ी शिकार बनी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर। साध्वी प्रज्ञा ने अपने एक साक्षात्कार में जो आप बीती बताई है उसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। साध्वी प्रज्ञा के मुताबिक मुझे इतना मारा गया कि मेरे फेफड़ों की झिल्ली फट गई और वो बेहोश हो गईं। फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया। होश में आने के बाद उन्होंने देखा कि उनके शरीर से सारा भगवा वस्त्र गायब है। वो थोड़ा ठीक हुईं तो पुलिसिया जुल्म फिर शुरू हो गया। पुलिस वाले उन्हें जोर-जोर से पटककर शारीरिक यातनाएं देते थे। इस दौरान उनके रीढ़ की हड्डी टूट गई। इसके अलावा भी उन्हें अनेक तरह की यातनाएं दी गईं।

साध्वी प्रज्ञा को जबरन सुनाए अश्लील ऑडियो

उनके एक शिष्य को भी गिरफ्तार करके लाया गया था जिसे उनके सामने लाकर बुरी तरह पीटा गया। ठाणे के पुलिस कमिश्नर ने भी उन्हें तब तक बेल्ट से पीटा जब तक कि वह थक नहीं गया। एक दिन कुछ पुरुष कैदियों के साथ उन्हें खड़ा करके अश्लील और गंदा ऑडियो सुनाया गया था। जब एक कैदी ने पुलिस वालों से कहा कि यह साध्वी है और इनको अश्लील ऑडियो मत सुनाइए तो पुलिस वालों ने बेरहमी से उस कैदी की पिटाई की। जेल में उन्हें कैंसर हो गया और यह सदमा उनके पिताजी सहन नहीं कर पाए और कुछ दिन के बाद वह इस दुनिया से चल बसे। एक बार स्वामी अग्निवेश उनसे जेल में मिले और सहयोग करने के एवज में अपने मित्र चिदंबरम और दिग्विजय से छुड़वा देने का प्रस्ताव भी दिया। आखिर जेल में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर इतने अत्याचार करने का मकसद आखिर क्या था?

पुलिस की कोशिश थी कि साध्वी लें संघ के लोगों का नाम

मशहूर पत्रकार और मालेगांव विस्फोट पर पुस्तक के लेखक डॉ. प्रवीण तिवारी के अनुसार, जेल में साध्वी प्रज्ञा को यातनाएं देकर उन पर यह दबाव बनाया जा रहा था कि वह संघ के बड़े लोगों का नाम ले लें ताकि भगवा आतंकवाद के सिद्धांत  को साबित किया जा सके। मालेगांव विस्फोट पर पुस्तक के लेखक डॉ. प्रवीण तिवारी के अनुसार साध्वी प्रज्ञा ने उस समय राष्ट्रपति को एक चिट्ठी लिखी थी और उसमें उन्होंने पूरा सिलसिलेवार तरीके से लिखा कैसे चमड़े के बेल्ट से मारा गया, नग्न अवस्था में रखा गया, गंदी टेप्स दिखाई गई,  उनको जबरदस्ती अंडा खिलाया गया जो नहीं खाती थीं।

सबसे पहले चिदंबरम ने लिया था भगवा आतंकवाद का नाम

यह बात किसी से छुपी नहीं है कि 2010 में यूपीए सरकार के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सबसे पहले सैफरॉन टेरर यानी भगवा आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल किया था। 25 अगस्त 2010  को पुलिस अफसरों के एक सम्मेलन में चिदंबरम ने यह बात कही थी। चिदंबरम के इस बयान के बाद तो कांग्रेस के कई नेताओं ने गांधी परिवार को खुश करने के लिए भगवा आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल अपनी-अपनी सहूलियत से अनेकों बार किया। भगवा आतंकवाद के सिद्धांत को आगे बढ़ाने वालों में कांग्रेस के एक और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे का भी हाथ था। उन्होंने  20 जनवरी 2013 को जयपुर में कांग्रेस के चिंतन शिविर में यह कहा था कि बीजेपी और आरएसएस के ट्रेनिंग कैंप में हिंदू आतंकवाद को बढ़ाया जा रहा है।

इतना ही नहीं शिंदे ने कई बम धमाकों में हिंदू आतंकवादियों के शामिल होने का भी दावा किया था। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि देश का एक गृहमंत्री बिना किसी आधार के इतनी बड़ी बात बोल रहा था। मगर, सत्ता जाने के बाद सुशील कुमार शिंदे को अपनी इस गलती का एहसास हुआ और उन्होंने पूरे 11 साल बाद 2024 में एक इंटरव्यू में कहा कि उस समय रिकॉर्ड पर जो आया था मैंने वही कहा था। यह मेरी पार्टी ने मुझे बताया था कि भगवा आतंकवाद हो रहा है। उस समय पूछा गया तो बोल दिया था भगवा आतंकवाद। मुझे अपने बयान में आतंकवाद शब्द नहीं लगाना चाहिए था और यह गलत था।

Topics: साध्वी प्रज्ञाSadhvi Pragyaभगवा आतंकवादSaffron TerrorismATS Investigationमालेगांव ब्लास्ट 2008RSS साजिशATS जांचMalegaon Blast 2008मोहन भागवतRSS ConspiracyMohan Bhagwat
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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