नई दिशा, नई उमंग
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नई शिक्षा नीति : नई दिशा, नई उमंग

नई शिक्षा नीति 2020 और एनसीएफ 2023 के तहत कक्षा 1 से 8 तक की पुस्तकों में अनुभवात्मक, मूल्य-आधारित और कौशल-संपन्न शिक्षा को बढ़ावा दिया गया है। इनमें स्थानीय अनुभव, जीवन-कौशल, भारतीय ज्ञान परंपरा, डिजिटल साक्षरता और समावेशिता को समाहित कर बच्चों के संज्ञानात्मक, भावनात्मक और नैतिक विकास को केंद्र में रखा गया है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jul 31, 2025, 11:28 am IST
inभारत, विश्लेषण, शिक्षा

नई शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा- स्कूल शिक्षा 2023 के दिशानिर्देशों के आधार पर एनसीईआरटी ने बुनियादी स्तर (कक्षा 1 व 2), प्राथमिक स्तर (कक्षा 3-5) और मध्य स्तर (कक्षा 6-8) की पाठ्यपुस्तकों में व्यापक बदलाव किए हैं। इसका उद्देश्य शिक्षा को बच्चों के अनुभवों, परिवेश और समग्र विकास से जोड़ना है। सभी विषयों की पुस्तकें इस तरह तैयार की गई हैं कि वे बच्चों की जिज्ञासा, रुचि और परिवेश से जुड़ें। संज्ञानात्मक, सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक विकास को बढ़ावा देने वाले पाठ और अभ्यास के अलावा सहानुभूति, आत्म-अनुशासन, संवाद क्षमता और टीमवर्क जैसे जीवन-कौशलों को महत्व दिया गया है। स्थानीय उदाहरण, कहानियां, गतिविधियां, खेल और संवाद शामिल किए गए हैं।

इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा, अंतरविषयक समन्वय, बहुभाषिकता, मूल्यनिरपेक्ष अभ्यास, कला और रचनात्मकता का समावेश, तकनीकी और डिजिटल साक्षरता, खासकर विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी की पुस्तकों में डिजिटल उपकरणों, संचार के नए माध्यमों और तकनीकी परिवर्तनों को समझने की सामग्री दी गई है। बच्चों के घर, समुदाय, परिवेश और स्थानीय अनुभवों को पाठ्यवस्तु में शामिल किया गया है। इसके अलावा, संवैधानिक मूल्य और समावेशिता, चारों कौशलों (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) पर संतुलित ध्यान और गणित में अवधारणाओं को खेल, पहेलियों, कहानी और स्थानीय संदर्भों से जोड़कर समझाया गया है।

आनंद से अनुशासन तक

शारीरिक शिक्षा न केवल शारीरिक विकास, बल्कि मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास का भी सशक्त माध्यम है। यह बच्चों को स्वस्थ, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की ओर प्रेरित करती है। प्राथमिक चरण (कक्षा 3 से 5) में इसका उद्देश्य बच्चों में आनंद, अन्वेषण और बुनियादी मोटर कौशल (दौड़ना, कूदना, फेंकना आदि) का विकास है। खेल-आधारित गतिविधियां, पारंपरिक भारतीय खेल और सरल योगासन (ताड़ासन, वृक्षासन आदि) बच्चों में संतुलन, लय, सहयोग और आत्म-जागरूकता को बढ़ावा देते हैं।

सत्रों में ‘वार्म-अप’ और ‘कूल-डाउन’ शामिल किए गए हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक तैयारी सुनिश्चित होती है। स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से स्वच्छता, जलयोजन, टीकाकरण और शरीर की बुनियादी समझ (जैसे हृदय गति और मांसपेशियां) से परिचय कराया जाता है।
मध्य चरण (कक्षा 6 से 8) में शारीरिक शिक्षा अधिक संरचित और गहन होती है। छात्र विविध खेलों (फुटबॉल, कबड्डी, बैडमिंटन आदि) और योग (आसन, प्राणायाम, ध्यान) के माध्यम से शारीरिक दक्षता, आत्म-अनुशासन और भावनात्मक संतुलन विकसित करते हैं। शारीरिक क्रियाओं को विज्ञान (बल, गति, हड्डियां, मांसपेशियां आदि) से जोड़ा गया है। नेतृत्व की भूमिका, सहकर्मी मूल्यांकन और टीमवर्क के जरिए सहयोग, जिम्मेदारी व संचार कौशल के अलावा स्वास्थ्य, सुरक्षा और समावेशिता पर विशेष जोर देते हुए यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को आजीवन फिटनेस, वैज्ञानिक सोच व सामाजिक मूल्यों से जोड़ता है।

जिज्ञासा से जिम्मेदारी तक

कक्षा 3 की ईवीएस की पुस्तक ‘हमारा अद्भुत संसार’ में सामाजिक विज्ञान और पर्यावरण विज्ञान को ‘हमारे आसपास की दुनिया’ के रूप में एकीकृत किया गया है। यह विद्यार्थियों को परिवार, समुदाय, प्रकृति, वस्तुएं और पर्यावरण जैसे पांच प्रमुख विषयों से क्रमिक रूप से परिचित कराती है। यह छात्रों की जिज्ञासा, अन्वेषणशीलता व स्थानीय परिवेश से सीखने की क्षमता को बढ़ावा देती है। गतिविधियों, अवलोकनों और संवाद के माध्यम से वे वैज्ञानिक, सामाजिक और पर्यावरणीय अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप में समझते हैं। पुस्तक छात्रों को प्रश्न पूछने, खोज करने, निष्कर्ष निकालने और स्थानीय संसाधनों से सीखने के अलावा उन्हें वसुधैव कुटुम्बकम् और एकता में विविधता जैसे मूल्यों से जोड़ते हुए एक संवेदनशील, जिम्मेदार और समझदार नागरिक के रूप में तैयार करती है। कक्षावार पुस्तकें तीन वर्ष की अवधि में विद्यार्थियों को 5 प्रमुख विषयों हमारा परिवार और समुदाय, हमारे आसपास का जीवन, प्रकृति के उपहार, हमारे आसपास की चीजें और हमारा पर्यावरण से क्रमिक रूप से परिचित कराती है।

सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ती ‘सितार’

कक्षा 3 से 5 की उर्दू पाठ्यपुस्तक ‘सितार’ भाषा सीखने को आनंददायक, समावेशी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाती है। इसमें शब्दावली और वाक्य संरचना की जटिलता क्रमिक रूप से बढ़ाई गई है, जिससे सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना जैसे कौशलों का संतुलित विकास होता है। पुस्तक में कहानियां, कविताएं और संवाद हैं, जो छात्रों को जीवन से जोड़ते हैं। स्वास्थ्य, पर्यावरण, तकनीक और संस्कृति जैसे समसामयिक विषयों को भी समाहित किया गया है। चित्रों, दृश्य माध्यमों व अन्य विषयों से भाषा का समन्वय किया गया है। अनूदित कहानियां, स्थानीय अनुभव और गतिविधियां बच्चों की जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और सहभागिता को प्रोत्साहित करती हैं।

भाषा शिक्षण का नया तरीका ‘मल्हार’

कक्षा 6 की हिंदी पुस्तक ‘मल्हार’ भाषा सीखने को भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान परंपरा से जोड़ती है। इसमें विज्ञान, समाज, कला और अन्य भाषाओं के साथ अंतरविषयक और बहुभाषिक समन्वय है। इसमें सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना जैसे कौशलों का संतुलित अभ्यास कराया गया है। चित्रों, कहानियों, कविताओं और संवादों से संप्रेषणीयता और कल्पनाशक्ति को बढ़ावा दिया गया है।
‘कल्पना करो’, ‘मेरी समझ से’ जैसे खंड आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हैं। सीखने के लिए मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए प्रश्न दिए गए हैं, जो बोलने, लिखने, समझने आदि पर केंद्रित हैं। यह संवैधानिक मूल्यों, स्थानीय अनुभवों और डिजिटल दुनिया को भी पाठ्यक्रम से जोड़ती है। इसमें पर्यावरण, स्वच्छता, विविधता, लिंग-समानता जैसे विषय भी हैं। घर, मोहल्ला, डिजिटल दुनिया से जुड़े अनुभव इसे जीवनोपयोगी बनाते हैं। सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना—इन सभी कौशलों पर संतुलित ध्यान दिया गया है। पुस्तक दिव्यांग विद्यार्थियों सहित सभी के लिए समावेशी है।

आनंदपूर्ण अधिगम पर जोर

एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम में कक्षा 1 व 2 (बुनियादी स्तर) की अंग्रेजी किताबों नाम ‘मैरीगोल्ड’ से बदल कर ‘मृदंग’, कक्षा 3-5 (प्राथमिक स्तर) की पुस्तक का नाम ‘संतूर’ और मध्य स्तर की अंग्रेजी किताब हनीसकल का नाम बदलकर ‘पूर्वी’ किया गया है। मृदंग और संतूर नाम भारतीय वाद्ययंत्र पर आधारित हैं, जो संस्कृति, सामंजस्य और सौंदर्यबोध को दर्शाता है। ये पुस्तकें बुनियादी साक्षरता और आनंदपूर्ण अधिगम पर केंद्रित हैं। पुस्तक में सामाजिक अध्ययन, विज्ञान और नैतिक शिक्षा की विषयवस्तु को शामिल किया गया है, जैसे-यातायात नियम, पर्यावरण, दयालुता और ऐतिहासिक स्थलों के संदर्भ, जिससे बच्चे भाषा को अपने परिवेश से जोड़कर सीखते हैं।
संरचना और भाषा कौशलों का एकीकरण : यह सभी चार भाषा कौशलों को स्वाभाविक और क्रमिक रूप से एकीकृत करती है और सीखने की पद्धति को प्रोत्साहित करती है। जैसे-

  •  आइए सुनें : सुनने की आदतों और समझ को विकसित करता है।
  •  आइए बोलें : बोलने में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करता है।
  •  आइए पढ़ें : पढ़ने की गति, समझ और आनंद को बढ़ावा देता है।
  • आइए लिखें : सरल वाक्य निर्माण, वर्णक्रम और रचनात्मक लेखन की नींव रखता है।
  •  आइए करें : संवाद, अभिनय और खेल-आधारित गतिविधियों द्वारा गहन संलग्नता सुनिश्चित करता है।

अनुभवात्मक और योग्यता आधारित शिक्षण : पाठ्यपुस्तक की शिक्षण पद्धति अनुभवात्मक, खेल-आधारित और सहभागिता प्रधान है। कहानियां, कविताएं, खेल व चित्र बच्चों की कल्पना और रुचि को जगाते हैं। प्रत्येक पाठ से जुड़ी गतिविधियां गहरी भागीदारी और समझ को सुनिश्चित करती हैं। पुस्तक में योग्यता-आधारित शिक्षण पर जोर है, जैसे ध्वनियों की पहचान, वाक्य निर्माण, घटनाओं का क्रम तय करना और निर्देशों की समझ। विषयवस्तु बच्चों की तात्कालिक दुनिया से जुड़ी है, जैसे-परिवार, ऋ तुएं, जानवर, त्योहार और प्रकृति-जिससे अधिगम अर्थपूर्ण और आनंददायक बनता है।

समावेशी और सहयोगात्मक अधिगम : ‘संतूर’ पाठ्यपुस्तक समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहित करती है। इसमें दृश्य सामग्री, पुनरावृत्ति और संरचित गतिविधियों के ज़रिए विविध जरूरतों वाले शिक्षार्थियों का समर्थन किया गया है। समूह और जोड़ी गतिविधियां सहयोग, संवाद और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाती हैं। यह पुस्तक न केवल भाषा-कौशल, बल्कि संवेदनशीलता, संस्कृति और समावेशिता के मूल्य भी विकसित करती है, और छात्रों को आनंदपूर्ण व समृद्ध शैक्षणिक अनुभव देती है।

इसी तरह, कक्षा 6 (मध्य स्तर) की अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक ‘पूर्वी’ विद्यार्थियों को आधुनिक, संवेदनशील और सशक्त नागरिक बनने की दिशा में तैयार करती है। यह पाठ्यपुस्तक भाषा कौशलों के साथ-साथ छात्रों को संस्कृति, पहचान और चिंतनशील सोच से जोड़ती है। यह रटने की प्रवृत्ति को हटाकर अन्वेषण, आलोचनात्मक सोच और संवादात्मक अधिगम को बढ़ावा देती है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं-
डिजिटल एकीकरण : क्यूआर-कोडेड ऑडियो, सौंदर्यात्मक चित्र और रंग-कोडित खंड (‘आइए बोलें’, ‘आइए सोचें’) पाठ्यवस्तु को आकर्षक और छात्र-केंद्रित बनाते हैं।

नवाचारी मूल्यांकन : क्रॉसवर्ड, चित्रकारी, शिल्प जैसे गतिविधि-आधारित आकलन रचनात्मक भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं।
सांस्कृतिक और वैश्विक संतुलन : भारतीय लेखकों, पात्रों और विषयों को प्राथमिकता दी गई है। कुछ अंतरराष्ट्रीय रचनाएं भी हैं।
भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेश : पारंपरिक ज्ञान, रीति-रिवाज, राष्ट्रीय प्रतीकों और मूल्यों के जरिए सांस्कृतिक गर्व और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देती है।

भाषा-कौशल का एकीकरण : सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना-सभी कौशल संदर्भ आधारित गतिविधियों के माध्यम से सिखाए गए हैं।
अंतर्विषयक दृष्टिकोण : सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण और नैतिक शिक्षा से जुड़ाव के साथ, अंग्रेज़ी को जीवन से जोड़ने वाला विषय बनाया गया है।

समावेशिता और विविधता : ‘पूर्वी’ भारत की भाषायी, जातीय और सांस्कृतिक विविधता को स्थान देकर पुस्तक सहानुभूति और बहुलतावाद को बढ़ावा देती है।

परिहास नहीं इतिहास

इसी प्रकार, कक्षा 6–8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक ‘समाज की खोज : भारत और उससे आगे’ अंतःविषयक दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें भूगोल, इतिहास, संस्कृति, शासन और अर्थव्यवस्था को एकीकृत रूप से प्रस्तुत किया गया है। इसमें अंतःविषयक दृष्टिकोण के पांच विषय हैं- भारत और विश्व : भूमि और लोग, अतीत का ताना-बाना, सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपराएं, शासन और लोकतंत्र, आर्थिक जीवन। ‘लोकल से वोकल’ दृष्टिकोण छात्रों को स्थानीय से वैश्विक संदर्भों तक ले जाता है। यही नहीं, संस्कृत के शब्दों के सही उच्चारण और उनके अर्थ सीखने में सुविधा के लिए विशेषक चिह्न दिए गए हैं।

  • ‘अतीत का ताना-बाना’ विषय सिंधु-सरस्वती से भारत की स्वतंत्रता तक की यात्रा को भूगोल, शासन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था से जोड़कर प्रस्तुत करता है।
  •  अर्थव्यवस्था को केवल अवधारणा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के अनुभवों (जैसे रेहड़ी-पटरी, जन-धन योजना) से जोड़ा गया है।
  •  विविधता में एकता, वसुधैव कुटुंबकम् और लोकतंत्र की भारतीय अवधारणाओं को स्थान मिला है।
  • चित्र, मानचित्र, कलाकृतियां और कथानक छात्रों की कल्पना और समझ को समृद्ध करते हैं।
  •  ‘आइए अन्वेषण करें’, ‘सोचें’, ‘याद रखें’ जैसी प्रविष्टियां छात्रों को सक्रिय रूप से सोचने, शोध करने और समूह में कार्य करने के लिए प्रेरित करती हैं।
  • पाठ्यपुस्तकों में क्यूआर कोड शामिल हैं, जो छात्रों को डिजिटल संसाधनों से जोड़ते हैं।

नई शुरुआत और जिज्ञासा विकास

कक्षा 6 के विद्यार्थियों का पहली बार सामाजिक विज्ञान से परिचय कराया गया है। इसका उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि जिज्ञासा भी पैदा करना है। इसमें सरल, व्यावहारिक परियोजनाओं को शामिल किया गया है, जैसे-घर में पानी का उपयोग मापना।

  • भारतीय ज्ञान परंपराएं : उज्जैन मेरिडियन जैसे विषयों की सहज प्रस्तुति।
  • दार्शनिक कहानियां : विचारोत्तेजना के लिए उपनिषद् और वेदों की कथाएं। दैनिक जीवन का अर्थशास्त्र : छात्रों को अपने परिवेश (घर, स्कूल) से अर्थव्यवस्था समझने का अवसर।
  • संस्कृति और विविधता : त्योहार, भाषा, खानपान को अनुभव के रूप में।

समझ को गहरा करने का प्रयास

कक्षा 7 में उपरोक्त पांच विषयों के आपसी संबंध को स्पष्ट किया गया है। इससे छात्रों के लिए यह समझना आसान हो जाता है कि अर्थव्यवस्था, भूगोल और शासन कैसे आपस में जुड़े हुए हैं, न केवल सिद्धांत में, बल्कि वास्तविक उदाहरणों में भी।
ऐतिहासिक दृष्टिकोण : यह पाठ्यपुस्तक प्रारंभिक भारतीय साम्राज्यों, जैसे-मौर्य, शुंग और सातवाहन पर केंद्रित है। इससे छात्रों को उन कालखंडों के शासन और समाज के बारे में जानने-समझने का अवसर मिलता है, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता था।
सटीक शब्दावली : ‘जनपद’, ‘अधिराज’ जैसे शब्द अवधारणाओं की गहराई में ले जाते हैं।
संस्कृति और पारिस्थितिकी : महाकुंभ जैसे आयोजनों को पर्यावरण, संस्कृति और सार्वजनिक जीवन के संगम के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कथानक-आधारित इतिहास : पात्रों (भाविशा, ध्रुव) के जरिए अतीत की यात्रा कराने का प्रयास किया गया है।
लोकतंत्र की भागीदारी : स्कूल परिषद, समूह चर्चाएं और स्थानीय शासन की भूमिकाओं से जुड़ाव।

व्यापक दृष्टिकोण और आत्म-चिंतन

कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के कवर पेज पर अंतःविषयक दृष्टिकोण और भारतीय विरासत व लोकाचार में इसकी गहरी जड़ें दिखाई देती हैं। भारत के समृद्ध अतीत को लाल किले, मराठा किले और सिक्के तथा संघर्ष और प्रतिरोध का प्रतिनिधित्व करने वाले युद्धरत सैनिकों के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके अलावा, कथक नृत्यांगना और सितार वादक के माध्यम से सांस्कृतिक जीवंतता दिखाई गई है, जबकि कर्नाटक विधानसभा (विधानसभा) भवन आधुनिक शासन और लोकतंत्र का प्रतीक है। विविध भूमिकाओं में महिलाओं की उपस्थिति (एक नर्तकी और आधुनिक किसान के रूप में) विभिन्न क्षेत्रों में समानता और समावेश को बढ़ावा देती है। कृषि और आधुनिक तकनीक के दृश्य आर्थिक परिवर्तन को दर्शाते हैं।

संवेदनशील इतिहास लेखन : ‘History in Tapestry’ कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक है जो विभाजन, संघर्ष और प्रतिरोध जैसे विषयों को संतुलित व संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है। इसमें इतिहास को मानव अनुभव से जोड़ने और उससे बेहतर भविष्य की दिशा में सोचने पर जोर है।
राजनीतिक मानचित्र का पुनर्निर्माण : दिल्ली सल्तनत, मुगल, राजपूत, विजयनगर, सिख आदि शासकों की भूमिका अलाउद्दीन खिलजी, अकबर और औरंगजेब पर संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। महाराणा प्रताप, कृष्णदेवराय और नरसिंहदेव प्रथम के नेतृत्व में लड़ी गई लड़ाइयों पर भी प्रकाश डाला गया है।
मराठों का उत्थान : छत्रपति शिवाजी, नौसेना, गुरिल्ला युद्ध, अष्ट प्रधानमंडल व शक्तिशाली मराठा महिलाओं (जैसे ताराबाई, अहिल्याबाई होल्कर) पर चर्चा।
विस्मृत नायक : रानी दुर्गावती, रानी अबक्का, बेगम हज़रत महल जैसे नायकों का उल्लेख। सिख गुरुओं और त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा की भूमिका भी शामिल।
लोकतंत्र का अनुभवात्मक अध्ययन : चुनाव प्रक्रिया, मताधिकार, संसद भवन भ्रमण और सेंगोल जैसे तत्वों के माध्यम से नागरिक सहभागिता को बढ़ावा।
वास्तविक जीवन से जुड़ा अर्थशास्त्र : जेआरडी टाटा की कहानी के जरिए ‘उत्पादन के कारक’ की समझ।
भारतीय कौशल परंपरा का सम्मान : मूर्तिकारों, शिल्पियों और शास्त्रों के माध्यम से श्रम को गरिमा।

विज्ञान की पढ़ाई रोचक

कक्षा 8 की विज्ञान की पाठ्यपुस्तक शिक्षण को अनुभवात्मक, जिज्ञासा-आधारित और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसमें चित्रों के साथ स्पष्ट, सुलभ और संवादात्मक भाषा से इसे रोचक बनाया गया है। यह छात्रों को प्रश्न पूछने, आलोचनात्मक चिंतन करने और वास्तविक दुनिया के संदर्भों के माध्यम से वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझने के लिए प्रेरित करती है। भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और पृथ्वी विज्ञान की विषयवस्तु को समेकित रूप में प्रस्तुत किया गया है। भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत पर्यावरणीय जागरूकता, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को एकीकृत करने के साथ विज्ञान की अवधारणाओं को ऐतिहासिक दृष्टांतों और प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक योगदान से जोड़ा गया है। जैसे-

अध्याय 3 ‘स्वास्थ्य : अनमोल खजाना’: चेचक से बचाव हेतु ‘वैरियोलेशन’ नामक पारंपरिक विधि का उल्लेख।
अध्याय 7 ‘पदार्थ की कणिकीय प्रकृति’: आचार्य कणाद द्वारा परमाणु सिद्धांत (वैशेषिक सूत्र) का उल्लेख।
अध्याय 8 ‘तत्व, यौगिक और मिश्रण’: चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में मिश्रधातुओं के औषधीय उपयोग का वर्णन।
अध्याय 9 ‘विलयन और विलायक’: आयुर्वेद, सिद्ध चिकित्सा आदि में पारंपरिक विलायकों, जैसे-जल, दूध, तेल, घी आदि का उपयोग।
अध्याय 10 ‘प्रकाश : दर्पण और लेंस’: भास्कराचार्य द्वितीय द्वारा खगोलीय अध्ययन हेतु परावर्तन का प्रयोग।
अध्याय 11 ‘समय और आकाश’: ‘तैत्तिरीय संहिता’ से सूर्य की दक्षिणायन व उत्तरायण यात्रा का वर्णन।
ये उदाहरण छात्रों में भारतीय वैज्ञानिक विरासत के प्रति गर्व और जुड़ाव उत्पन्न करते हैं। किताब में प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिकों-विक्रम साराभाई, मेघनाद साहा, प्रफुल्ल चंद्र रे, जानकी अम्मल, असीमा चटर्जी, कमल रणदिवे और महाराज किशन भान के योगदान को भी दर्शाया गया है, जो छात्रों को अनुसंधान के लिए प्रेरित करेंगे।

संरचनात्मक नवाचार : प्रारंभिक अध्याय ‘विज्ञान की खोजी दुनिया की खोज’ छात्रों को वैज्ञानिक प्रक्रिया, जैसे- घटना, प्रश्न, जांच और प्रयोग से परिचित कराते हुए जिज्ञासा और अन्वेषण को प्रोत्साहित करता है। प्रत्येक अध्याय में चित्रों और ‘जांच और विचार’ अनुभाग के माध्यम से सोचने को प्रेरित करने वाला प्रस्तुतीकरण, प्रयोग व गतिविधियां अनुभवात्मक और खोज-आधारित शिक्षण को बढ़ावा देती हैं। ‘जिज्ञासा को जीवित रखें’ खंड में योग्यता-आधारित प्रश्न और सहयोगात्मक सोच पर जोर दिया गया है, ताकि विद्यार्थी प्रश्न गढ़ें और सहपाठियों के विचारों पर प्रतिक्रिया दे सकें। अध्यायों को ‘ज्ञात से अज्ञात’, ‘निकट से दूर’ की पद्धति पर आधारित कर सुसंगत और प्रभावशाली शिक्षण सुनिश्चित किया गया है।
कला और विज्ञान का समावेश : पुस्तक में भारतीय कला और विज्ञान का गहरा समन्वय छात्रों को विज्ञान, कला और संस्कृति के बीच अंतर्संबंध को समझने का अवसर देता है। जैसे-

  •  भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों और चांद-चांदनी के संबंध का उल्लेख।
  • मधुबनी, वारली, सौरा, गोंड जैसी पारंपरिक चित्रकलाओं में सूर्य और चंद्रमा के महत्व को दिखाया गया है।
  •  भारत के आधुनिक वैज्ञानिक योगदान को भी रेखांकित किया गया है। जैसे- वैक्सीन उत्पादन में भारत की अग्रणी भूमिका और परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समावेश।

अब गणित का ‘भूत’ नहीं डराएगा

कक्षा 8 की गणित की पाठ्यपुस्तक को खोजपरक, रचनात्मक और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह समस्या समाधान, पैटर्न की पहचान और निगमनात्मक तर्क पर केंद्रित है। भाषा ऐसी है कि छात्र इसे उपन्यास की तरह पढ़ सकें और गणित को जीवन से जोड़कर समझें। यह छात्रों को समाधान से अधिक प्रक्रिया का आनंद लेने के लिए प्रेरित करती है, जैसे कोई रहस्य सुलझाना। चित्रों, संकेतों और गतिविधियों के माध्यम से पुस्तक छात्र-केंद्रित और दृश्यात्मक रूप से समृद्ध बनी है। एक अध्याय भारतीय संख्या प्रणाली की ऐतिहासिक उपलब्धि को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जिससे संस्कृति और नवाचार के प्रति गौरव की भावना जागती है।

कौशल बोध कराती व्यावसायिक शिक्षा

‘कौशल बोध’ कक्षा 6 से 8 के लिए एक गतिविधि-आधारित पुस्तक शृंखला है, जो रटने के बजाय करके सीखने पर बल देती है। इसमें छात्र हाइड्रोपोनिक्स, जल संरक्षण, मशीन निर्माण जैसी परियोजनाओं के माध्यम से तकनीकी, रचनात्मक और जीवन कौशलों को विकसित करते हैं। यह आत्मविश्वास, टीमवर्क, समस्या समाधान और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करती है। स्थानीय संदर्भों पर आधारित परियोजनाएं समावेशिता व प्रासंगिकता सुनिश्चित करने के साथ छात्रों को डिजिटल साक्षरता, पर्यावरणीय चेतना, वित्तीय समझ व सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ती है ताकि वे जागरूक व सक्षम नागरिक बन सकें।

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