केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी की सजा को रद्द किए जाने के मामले में ट्विस्ट आ गया है। पहले खबर आई थी कि निमिषा की फांसी की सजा को रद्द कर दिया गया है, लेकिन अब ये खबर सामने आ रही है कि यमन ने निमिषा की रोकी गई फांसी की सजा के फैसले को रद कर दिया है। भारत के ग्रैंड मुफ्ती कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने कहा कि सना में हाई लेवल बैठक के बाद यमन ने निमिषा की फांसी रद करने का फैसला लिया है।
“यमन की जेल में बंद निमिषा को 2017 में एक यमनी नागरिक की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। उनकी फांसी की तारीख 16 जुलाई 2025 तय की गई थी, लेकिन आखिरी मौके पर इसे टाल दिया गया। हाल ही में, कुछ खबरों में दावा किया गया कि उनकी सजा रद्द हो गई है, लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे गलत बताया है।
क्या है निमिषा का मामला?
निमिषा प्रिया, जो केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली हैं, 2008 में बेहतर नौकरी की तलाश में यमन गई थीं। वहां उन्होंने 2014 में एक क्लिनिक शुरू किया, जिसमें उनका पार्टनर यमनी नागरिक तलाल अब्दो मेहदी था। निमिषा का आरोप है कि तलाल ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, उनका पासपोर्ट छीन लिया और क्लिनिक के पैसे का गलत इस्तेमाल किया। 2017 में, अपना पासपोर्ट वापस पाने के लिए निमिषा ने तलाल को बेहोश करने के लिए ड्रग्स दिए, लेकिन गलती से उनकी मौत हो गई। इसके बाद, निमिषा ने घबराहट में शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की और पकड़ी गईं। 2018 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई, जिसे 2023 में यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने बरकरार रखा।
फांसी टलने की कहानी
16 जुलाई 2025 को निमिषा की फांसी तय थी, लेकिन आखिरी समय पर इसे टाल दिया गया। इसकी वजह भारत सरकार की कोशिशें और केरल के प्रमुख सुन्नी विद्वान शेख अबूबकर अहमद (ग्रैंड मुफ्ती) की मध्यस्थता बताई गई। शेख अबूबकर ने यमनी विद्वानों से बात कर ‘दिया’ (ब्लड मनी) के जरिए माफी की गुंजाइश तलाशी। निमिषा के परिवार ने तलाल के परिवार को 1 मिलियन डॉलर की पेशकश की, लेकिन तलाल के भाई अब्देलफत्ताह मेहदी ने माफी देने से इनकार कर दिया और ‘किसास’ (बराबर सजा) की मांग की।
क्या कहा विदेश मंत्रालय ने
हाल ही में कुछ खबरों में दावा किया गया कि निमिषा की सजा पूरी तरह रद्द हो गई है। लेकिन विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि यह जानकारी गलत है। अभी तक यमनी अधिकारियों से कोई आधिकारिक लिखित पुष्टि नहीं मिली है। निमिषा की मां प्रेमा कुमारी, जो एक गरीब घरेलू सहायिका हैं, पिछले साल से यमन में अपनी बेटी को बचाने की कोशिश कर रही हैं। भारत सरकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी लगातार प्रयास कर रहे हैं।

















