भुवनेश्वर, ओडिशा । भारत के सुशासन मॉडल में तेजी से उभरते ओडिशा की नई भूमिका को लेकर ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा आयोजित सुशासन संवाद : ‘ओडिशा की उड़ान’ का आयोजन आज (28 जुलाई, 2025) ताज विवांता, भुवनेश्वर में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित से हुई। इसके बाद प्रस्तावना और रूपरेखा पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर जी ने रखी।
स्वागत संबोधन
पाञ्चजन्य संपादक हितेश शंकर जी ने अपने संबोधन में कहा— पहले तो उड़ीसा के भुवनेश्वर में इस ताज विवांता के इस बैंक्वेट हॉल में आज उत्कल समाज की जो बौद्धिक शक्ति, भविष्य की पीढ़ी समाज को दक्षता, कुशलता, मेधा देने वाली जो यह सज्जन शक्ति एकत्रित हुई है, आप सभी का पाञ्चजन्य परिवार, भारत प्रकाशन परिवार की ओर से अभिनंदन, अभिवादन। आप बहुत से आयोजनों के साक्षी रहे होंगे, आयोजन में जाना कोई बड़ी बात नहीं है, आयोजन तरह-तरह के होते रहते हैं। परंतु यह आयोजन सामान्य होकर भी विशेष है, क्योंकि यह कोई इवेंट नहीं है, कोई मीडिया कॉन्क्लेव नहीं है। यह एक समाज की वह बौद्धिक धारा है, जो समाज के मुद्दे तय करती है, जो समाज के विषय पर विचार करती है, समाज की उद्यमिता को जगाती है, भविष्य का पथ प्रशस्त करती है। उन विषयों के जागरण का आज यह बौद्धिक संगम है, वृहद समागम है। पुनः आप सभी का अभिवादन, स्वागत।
सुशासन संवाद की भारतीय अवधारणा
उन्होंने कहा- आज हम जिन विषयों की बात करेंगे, उससे पहले इस कार्यक्रम की यदि आप विषयवस्तु को समझने के लिए उसके शीर्षक को देखेंगे तो यह सुशासन संवाद है। और सुशासन संवाद, आप कह सकते हैं कि गुड गवर्नेंस कॉन्फ्लुएंस है। परंतु भारत की अवधारणा, शासन को लेकर भारतीय अवधारणा और गवर्नमेंट को लेकर गवर्नेंस को लेकर पश्चिम की अवधारणा में थोड़ा सा अंतर है। उस अंतर को समझेंगे तो आज के इस दिन का हमारा मिलना, उन कसौटियों पर जो बात करेंगे, उड़ीसा के चित्र की जो बात करेंगे, उसके आयामों में हम गहराई से उतर पाएंगे।
पश्चिमी बनाम भारतीय शासन मॉडल
हितेश जी ने पश्चिमी बनाम भारतीय शासन मॉडल पर प्रकाश डालते हुए कहा- जो पश्चिम की संकल्पना है, आधुनिक राज्य की संकल्पना है, यदि आप देखेंगे तो पाएंगे कि उसके केंद्र में व्यक्ति और उसका कल्याण इतना नहीं होता जितना प्रक्रिया की बात होती है। वह प्रक्रिया-आधारित ज्यादा है। उसके अलावा प्रबंधन कैसे किया जा सकता है और एफिशिएंसी कैसे आ सकती है, इस तरह की बातें पश्चिमी संकल्पना में आती हैं। परंतु भारत में शासन या सुशासन अच्छा कैसे है, उसके केंद्र में व्यक्ति है, उसके केंद्र में लोककल्याण की भावना है। उसकी कुछ कसौटियां हैं— उनमें एक निष्पक्षता है, पारदर्शिता है, गाति है, सर्वजन हिताय का भाव है, सर्वजन सुखाय का भाव है। इस भाव के साथ भारतीय विमर्श सरकार से ज्यादा और सरकार के साथ-साथ सरोकारों को गति देता है, आकार देता है, स्वरूप देता है। राज्य बढ़ता है क्योंकि समाज उसका विमर्श करता है। आज का जो संवाद, यह समागम, इस दृष्टि से विशेष होने वाला है।
पाञ्चजन्य की वैचारिक यात्रा
हितेश जी ने पाञ्चजन्य की वैचारिक यात्रा के बारे में बताते हुए कहा- बाकी मीडिया हाउसेस जिन्हें हम जानते हैं, आयोजनों को देखते हैं, उनके लिए कुछ विषय राजनीति से जुड़े हो सकते हैं, कुछ केवल सरकार से जुड़े हुए हो सकते हैं, कुछ उथल-पुथल से जुड़े हुए हो सकते हैं, कुछ विवादों से जुड़े हुए हो सकते हैं। परंतु पाञ्चजन्य के साथ ऐसा नहीं है। इस देश में जो मीडिया की यात्रा है, पत्रकारिता की यात्रा है, पाञ्चजन्य और ऑर्गेनाइजर की यात्रा जब शुरू हुई तो वह समय था जब देश में ज्यादातर साप्ताहिक या दैनिक समाचार पत्र बंद हुए। क्योंकि स्वतंत्रता से पहले तो यह था कि देश के लिए काम करना है तो अखबार निकालो, पत्रिका निकालो, जनजागरण करो।
परंतु जब स्वतंत्रता मिली तो सबने कहा कि शायद काम पूरा हो गया। तो बहुत सारे बंद हुए। परंतु उसी समय ऐसे प्रकाशनों का शुरू होना, दीनदयाल जी का इसका बीज रखना, अटल जी का इसका संपादकतत्व संभालना, यह इसीलिए था कि सरकारें तो आती-जाती हैं, सरोकार ज्यादा बड़ी चीज है। इसलिए पाञ्चजन्य की यात्रा शुरू होती है और वह एक वैचारिक पाथेय लेकर यात्रा शुरू होती है।
इसीलिए जब बाकी लोग शुष्क सरकारी व्यवस्था की बात करते हैं और पश्चिमी मॉडल सिर्फ सरकार के परिणाम के आधार पर उसको आंकता है, प्रक्रियाओं के आधार पर आंकता है, प्रबंधन के आधार पर उसकी दक्षता या एफिशिएंसी के आधार पर आंकता है— भारत मॉडल या पाञ्चजन्य उन आयामों की भी बात करता है जो सामान्य तौर पर चर्चा में नहीं आते। देश क्या है, उसकी परंपरा क्या है, उसकी संस्कृति क्या है, क्या उसका प्रवर्तन, उसका रिफ्लेक्शन गवर्नेंस में और शासन में दिखाई देता है— तो आज हम इन सभी विषयों पर चर्चा करेंगे और पाञ्चजन्य की जो यात्रा है उसकी भी चर्चा करेंगे।
नई ऊंचाइयों की ओर पाञ्चजन्य
पाञ्चजन्य की उपलब्धियों को गिनाते हुए हितेश जी शंकर ने कहा कि आपको जानकर अच्छा लगेगा कि उड़ीसा में पहली बार पाञ्चजन्य आया है। हमने मन बनाया था कि देर से सही, जा रहे हैं मगर कुछ अच्छे नंबर्स, अच्छे प्रतिशत, एक बड़ा आकार लेकर उत्कल में हम चरण रखेंगे, पहले उसके योग्य हो जाएं। तो आपको जानकर अच्छा लगेगा कि आज देश में जो पत्रिकाएं छप रही हैं और वास्तव में बिक रही हैं, दुकान में रखी हुई नहीं हैं, उनमें शीर्ष पत्रिकाओं में राष्ट्रीय स्तर पर पाञ्चजन्य का महत्वपूर्ण स्थान है, शीर्ष पर स्थान है।
सोशल मीडिया पर पाञ्चजन्य की मजबूत पकड़
साथ ही, जो न्यू मीडिया है, जिसे सोशल मीडिया कहते हैं, जो नए आयाम खड़े कर रहा है, वह उस दृष्टि से भी एक बड़ा आकार ले रहा है। जैसे नारायण ने अपना विराट रूप दिखाया, पाञ्चजन्य ने अभी विराट रूप नहीं दिखाया मगर आकार बढ़ना शुरू किया है। फेसबुक पर करीब हमारा 70 लाख का एक परिवार है। ऑपरेशन सिंदूर के समय पर यदि आपने देखा हो तो हमारी रीच और आंकड़े देश में किसी भी मीडिया हाउस से बड़े थे। हमारा ट्रैक्शन, रीच, एंगेजमेंट सबसे अधिक था। और कुछ समय हमने थर्ड पार्टी से भी जो देखा, तो वह 25 मिलियन तक प्रतिदिन का आंकड़ा गया था। मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा आंकड़ा है। और तब हम उत्कल में प्रवेश करने का संकल्प लेकर आए।
भविष्य की दिशाओं पर चर्चा
हितेश जी ने आगे कहा- आज हम उन नई विधाओं की बात भी करेंगे। अलग-अलग सत्र में इसका आज के विचार का आधार क्या है और उसका आह्वान क्या है, यह भी भाषण के आरंभिक सत्र में देखेंगे।
इसके बाद, इस देश में हर चीज में राजनीति और विवाद तलाशने वाली जो नजर है, वह इस देश को कैसे देखती है, राष्ट्र की उसकी संकल्पना क्या है, समाज को कैसे देखती है, भ्रंश रेखाओं या फॉल्ट लाइंस के बारे में कैसे सोचती है और संघ अपने शताब्दी वर्ष में संघ के बारे में कैसे सोचता है— इन सारे प्रश्नों के उत्तर, उनका मंथन भी आज यहां होगा।
ओडिशा के लिए नई संभावनाएं
उन्होंने आगे कहा- उड़ीसा के लिए, उत्कल के लिए भविष्य की नई दिशाएं, प्रगति की कौन-सी हो सकती हैं, कौन से संसाधन हैं, कौन सी संभावनाएं हैं, कहां पर काम करने की गुंजाइश है— एक्सपोर्ट एनालिसिस के बाद जो चीज निकली, ऐसे कुछ विशेषज्ञ भी हमारे साथ होंगे, उनकी बात भी हम करेंगे। हम यहां सांस्कृतिक विरासत की बात भी करेंगे। आगे आने वाली पीढ़ी की कमान जिनके हाथ में है, उनके मन में क्या विचार पल रहा है, राजनीति में क्या चल रहा है, उसकी बात भी हम करेंगे।
और राज्य का शीर्ष नेतृत्व, मुख्यमंत्री जी के साथ यहां की चुनौतियों के समाधान की बात भी हम करेंगे। राज्य की सांस्कृतिक झलक, उसकी धारा में डुबकी लगाने का काम भी आज हम करेंगे।
तो आप सभी का स्वागत है पाञ्चजन्य के उड़ीसा में पहले कार्यक्रम में, इस संवाद में। आप सभी का अभिनंदन। धन्यवाद।














