चेन्नई । तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के किलपौक क्षेत्र की एक प्रमुख सड़क “वाडेल्स रोड” को अब ‘आर्चबिशप एज्रा सरगुनम रोड’ के नाम से जाना जाएगा। यह नामकरण तमिलनाडु की डीएमके सरकार द्वारा तुष्टिकरण के चलते हाल ही में दिवंगत हुए पादरी एज्रा सरगुनम के सम्मान में किया गया है। लेकिन अब डीएमके सरकार का यह फैसला अब जबरदस्त विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर, तमिलनाडु सरकार के इस निर्णय की भारी आलोचना हो रही है, खासकर भाजपा समेत कई हिंदू संगठनों द्वारा।
कौन था एज्रा सरगुनम..?
एज्रा सरगुनम, जो ईवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया (ECI) के पूर्व प्रमुख थे, लंबे समय से अपने हिंदू विरोधी बयानों और कट्टर ईसाई प्रचार के कारण चर्चा में रहे हैं। एज्रा सरगुनम का नाम भारत को “ईसाई राष्ट्र” घोषित करने और हिंदू धर्म को समाप्त करने जैसे बयान देने के कारण बदनाम रहा है। वह अपने भाषणों में वह अक्सर सनातन धर्म के प्रति जहर उगलते रहते थे, वह कहते थे- “हिंदू कोई धर्म नहीं है। यह एक बनावटी व्यवस्था है। जो ईसाई धर्म नहीं अपनाते, उन्हें तब तक मारो जब तक खून न निकल आए, भगवान माफ कर देगा।”
इतना ही नहीं, उसने अपने अनुयायियों से यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को हिंदू कहे, तो उसे “चुप कराने के लिए हिंसा जरूरी है।”
डीएमके नेताओं की मौजूदगी में उद्घाटन
बता दें इस सड़क नामकरण का औपचारिक उद्घाटन के लिए डीएमके सरकार ने एक भव्य समारोह आयोजित किया गया, जिसमें डीएमके क जो बड़े नेता सम्मलित हुए उनमे शामिल थे-
- डीएमके मंत्री के. एन. नेहरू
- HR&CE मंत्री पी. के. शेखर बाबू
- चेन्नई की मेयर आर. प्रिया
- डीएमके विधायक इनिगो इरुधयराज
सरकार के इस कदम को एज्रा के “धार्मिक योगदान” के सम्मान के रूप में बताया गया, लेकिन उसके विवादास्पद और उग्र भाषणों को नजरअंदाज करने पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
ये हिंदू समाज के लिए अपमान है : नैनार नागेंद्रन
तमिलनाडु में भाजपा के राज्य अध्यक्ष और विधायक नैनार नागेंद्रन ने इस फैसले के खिलाफ जमकर आक्रोश जताते हुए अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें एज्रा को हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक और हिंसक बातें कहते सुना जा सकता है।
तमिलनाडु में भाजपा अध्यक्ष नागेंद्रन ने लिखा-
“ये शर्म की बात है कि डीएमके ने एक ऐसे व्यक्ति के नाम पर सड़क का नाम रखा, जो खुलकर हिंदुओं के खिलाफ नफरत और हिंसा का प्रचार करता था। ये वीडियो खुद इस बात का प्रमाण हैं कि वह किस हद तक जहरीली सोच फैलाता था।”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या डीएमके की अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति में कोई सीमा नहीं बची..?
It is a shame that the DMK Government has named Waddels road in Chennai after Late Father Ezra Sargunam, a known-Hindu hater.
The video I have attached is proof of the venom he has spewed against Hindus. He has openly instigated violence against Hindus.
Is there no limits for… pic.twitter.com/QjbnZpLABT
— Nainar Nagenthiran (@NainarBJP) July 22, 2025
एज्रा की पुरानी बयानबाज़ियाँ और राजनीतिक संबंध
- पादरी एज्रा सरगुनम का नाम कई बार विवादों में आया है. जिनमे से निम्नलिखित है-
- एज्रा सरगुनम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया.
- उसने हिंदू धर्म को “राजनीतिक फायदा” का साधन बताया
- कट्टर इस्लामी संगठन SDPI को हिंदुओं के खिलाफ भड़काना
- धर्मांतरण विरोधी कार्यकर्ता रामलिंगम की हत्या के समय भड़काऊ भाषण
- भारत को ईसाई राष्ट्र कहने की सार्वजनिक घोषणाएं
2056 तक इसाई राष्ट्र बनाने और एक लाख चर्च का लक्ष्य
बता दें कि एज्रा सरगुनम के नेतृत्व में ईसीआई ने एक बड़ा मिशन चलाया, जिसके तहत 2005 तक 2,000 से अधिक चर्च बनवाए गए और 2056 तक भारत में 1 लाख चर्च बनाने का लक्ष्य तय किया गया। उनका दावा था कि भारत को “ईसाईकरण” करना एक मिशनरी कर्तव्य है।
क्या भारत में धार्मिक असहिष्णुता को वैधानिक मिल रही है मान्यता..?
इस घटना ने देशभर में एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। जिससे सवाल उठते हैं कि क्या एक शांतिप्रिय बहुसंख्यक समाज के खिलाफ नफरत फैलाने वालों को सरकारी सम्मान मिलना चाहिए..? क्या तुष्टिकरण के चलते सड़कें उन लोगों के नाम पर होनी चाहिए जो समाज में घृणा का बीज बोते हैं..? क्या DMK सरकार धार्मिक भावनाओं से ऊपर अपनी राजनीति रख रही है..?
इन सवालों के जबाव आज बहुत लोग जानने को बैचेन हैं। लेकिन जब तक जबाव ना मिले तब तक सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति को सार्वजनिक सम्मान न दें, जिसने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का काम किया हो.!

















