2 साल पहले गडकरी ने 'पाञ्चजन्य कार्यक्रम' में किया था वादा, आज लद्दाख में दौड़ रहीं हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली 5 बसें
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2 साल पहले गडकरी ने ‘पाञ्चजन्य कार्यक्रम’ में किया था वादा, आज लद्दाख में दौड़ रहीं हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली 5 बसें

Written byLalit FularaLalit Fulara
Jul 25, 2025, 02:53 pm IST
in भारत

दो साल पहले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में हुए ‘Panchajanya Aadhar Infra Confluence 2023’ कार्यक्रम में हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली बसों को देने का वादा किया था। उन्होंने पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर के साथ अपने संवाद में कहा था कि हम हाइड्रोजन का निर्यात करने वाले बनेंगे और कार्बन उत्सर्जन को कम करके, प्रदूषण के संरक्षण के लिए हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली बसों को लेकर आएंगे। यह सपना अब सच हो गया है और देश को हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली 5 बसें मिल चुकी हैं। ये बसें सफलतापूर्वक केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की सड़कों पर दौड़ रही हैं।

इसी साल अप्रैल में हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली इन बसों का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ था और जून में ये बसें सबसे पहले प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर लेह और लद्दाख को मिलीं। ‘ऊंचे दर्रों की भूमि’ कहलाने वाले हिमालयी राज्य लद्दाख में हाइड्रोजन ईंधन से संचालित ये बसें पर्यावरण को बचाने के लिए वरदान साबित हो रही हैं। इन बसों के चलने से वहां प्रदूषण में कमी आ रही है और प्रकृति व पर्यावरण स्वच्छ हो रहा है।

NTPC ने सिडको को सौंपी हाइड्रोजन फ्यूल बसें

लद्दाख पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम (NTPC) ने जून में इस सूबे के औद्योगिक विकास निगम (सिडको) को हाइड्रोडन ईंधन सेल आधारित पांच बसें सौंपी हैं। यह पहल भारत में हाइड्रोजन से चलने वाली बसों की पहली व्यावसायिक तैनाती है। हाइड्रोजन से चलने वाली ये बसें दुनिया में सबसे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में चल रही हैं जो कि वैश्विक स्तर पर हरित गतिशीलता में महत्वपूर्ण मील का पत्थर बन गया है। वैसे भी पूरी दुनिया इस वक्त कार्बन के उत्सर्जन को कम करने की बात कह रही है, और भारत ने यह पहल शुरू भी कर दी है।

ईको-फ्रेंडली परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम

हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ये बसें ईको-फ्रेंडली परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इन बसों को लेह के पालम स्थित एनटीपीसी ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी स्टेशन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सौंपा गया। यह कदम क्लीन फ्यूल से पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया गया है। लद्दाख के अत्यधिक ठंडे माहौल में इन बसों का संचालन के लिए हुआ परीक्षण भी कामयाब रहा था और आज जब ये बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं, तो इतिहास बन गया है।

हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली बसें भारत में नई शुरुआत

लद्दाख जैसे इलाके की विषम परिस्थितियों में हाइड्रोजन बसों का सफल संचालन भारत में हाइड्रोजन ईंधन सेल गतिशीलता के एक नए युग की शुरुआत है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रशासन और NTPC के सहयोग से यह संभव हुआ है।

हर साल होगा 230 मीट्रिक टन स्वच्छ ऑक्सीजन का उत्सर्जन

हाइड्रोजन से चलने वाली ये बसें लद्दाख में 19 जून से चल रही हैं। लेह के पालम की सड़कों पर हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली इन बसों में टूरिस्ट भी सफर कर रहे  हैं। पालम समुद्र तल से 11,562 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हाइड्रोजन फ्यूल से चलने वाली ये बसें नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का हिस्सा है। इनसे हर साल 350 मीट्रिक टन कार्बन का उत्सर्जन कम होगा। इन बसों से हर साल 230 मीट्रिक टन स्वच्छ ऑक्सीजन का उत्सर्जन होगा। यानी जितनी ऑक्सीजन हर साल 13 हजार पेड़ों से मिलती है, उतनी ये बसें भी जनरेट करेंगी।

क्यों फायदेमंद है हाइड्रोजन ईंधन?

हाइड्रोजन ईंधन को प्रकृति और पर्यावरण के लिए फायदेमंद माना जाता है। जब हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में जलाया जाता है, तो यह पानी (H2O) पैदा करता है, जो एक गैर-विषाक्त और पर्यावरण के अनुकूल है। यह ईंधन का स्वच्छ विकल्प बनता है। इसके साथ ही कार्बन-तटस्थ भविष्य(Carbon-Neutral Future ) के सपने को भी पूरा करता है। कार्बन-तटस्थ भविष्य का अर्थ वायुमंडल में छोड़े गए कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) की मात्रा को पूरी तरह से संतुलित करना और इसके उत्सर्जन को कम करना है। यानी पेट्रोल और डीजल से होने वाले प्रदूषण को कम करना और प्रकृति का संरक्षण करना।

Topics: Hydrogen fuel buses run in LadakhIndia's first hydrogen busesPanchajanya Aadhaar Infra Conferencecarbon emissionsNitin GadkariHitesh ShankarladakhNTPCHydrogen fuel buses
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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