बॉम्बे हाईकोर्ट ने गाजी सलाउद्दीन रहमतुल्ला हूले उर्फ परदेशी बाबा ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक दरगाह को गिराने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने गुरुवार (24 जुलाई) को कहा, “हम यह स्वीकार नहीं कर सकते कि भीड़ का गुस्सा और बड़ी संख्या में यहां लोगों के आने से यह साबित होता है कि दरगाह एक वैध संरचना है। यह जमीन हड़पने का मामला है। कोर्ट किसी को भी इस तरह से जमीन हड़पने की अनुमति नहीं दे सकता।” इस तरह अदालत ने दरगाह गिराने के आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया।
दरअसल, यह दरगाह पहले 160 स्क्वायर फीट में थी, लेकिन ठाणे नगरपालिका की मंजूरी के बिना धीरे-धीरे 17 हजार स्क्वायर फीट (1579.35 वर्ग मीटर ) से अधिक जमीन पर कब्जा कर लिया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रस्ट ने उस जमीन को कभी खरीदा ही नहीं और ना ही किसी तरह के निर्माण अनुमति ली। केवल चैरिटी कमिश्नर द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी करना भूमि पर स्वामित्व या कब्जे का प्रमाण नहीं हो सकता। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह जमीन एक निजी व्यक्ति की है, जिसने सिविल कोर्ट में अतिक्रमण का मुकदमा जीत लिया है।
रिपोर्ट्स मुताबिक, जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खता की पीठ ने 30 अप्रैल 2025 को पारित एक आदेश में ठाणे नगर निगम (टीएमसी) द्वारा ढांचा गिराने के फैसले को बरकरार रखा था। परदेशी बाबा ट्रस्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के दरगाह गिराने की अनुमति देने वाले फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 17 जून 2025 को एक आदेश पारित किया, जिसमें ट्रस्ट को हाईकोर्ट की पीठ के समक्ष पुनः जाने और उन तथ्यों को उजागर करने के लिए एक रिकॉल आवेदन दायर करने की अनुमति दी, जिन्हें कथित तौर पर उच्च न्यायालय के समक्ष दबा दिया गया था।
बता दें कि यह मामला 23 साल पुराना है, जो परदेशी बाबा ट्रस्ट और एक निजी कंपनी के बीच चल रहा है। कंपनी जमीन पर मालिकाना हक होने का दावा करती है। कंपनी के मुताबिक, दरगाह के 160 स्क्वायर फीट के क्षेत्र को बढ़ाकर 17 हजार स्क्वायर फीट से अधिक तक फैला दिया गया है। यह जमीन कंपनी की है। इस निर्माण के लिए ठाणे नगर निगम की भी अनुमति नहीं ली गई।

















