देश की राजधानी दिल्ली को दहलाने की साजिश कर रहे एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हो गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय एजेंसियों ने मिलकर एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया। गुरुवार को देश के कई राज्यों में एक साथ छापेमारी कर आतंकियों के इस नेटवर्क को उजागर किया गया। इस कार्रवाई में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कुल 11 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाकी लोगों से पूछताछ जारी है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रमोद सिंह कुशवाहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एक अखिल भारतीय आतंकी मॉड्यूल था, जो भारत में ‘गजवा-ए-हिंद’ की तर्ज पर जिहाद छेड़ने की तैयारी कर रहा था। इसके साथ ही, इस गिरोह ने टार्गेटेड किलिंग्स (निशाना बनाकर हत्या) की भी योजना बना रखी थी।
अशहर दानिश- इस आतंकी नेटवर्क का मुख्य सरगना झारखंड की राजधानी रांची का रहने वाला अशहर दानिश है। उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ दो अन्य आरोपियों – सूफियान अबूबकर खान और आफताब अंसारी, जो दोनों मुंबई के निवासी हैं, उन्हें भी दिल्ली से पकड़ा गया है। इसके अलावा, हुजैफा यमन को तेलंगाना के निज़ामाबाद से और कामरान कुरैशी को मध्य प्रदेश के राजगढ़ से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आतंकियों के पास से आईईडी (बम) बनाने की सामग्री, विस्फोटक पदार्थ, हथियार और कारतूस बरामद किए गए हैं। इन सामग्रियों से यह साफ जाहिर होता है कि वे किसी बड़े आतंकी हमले की तैयारी में थे। एसीपी प्रमोद सिंह कुशवाहा ने बताया कि आतंकियों की योजना दो स्तरों पर थी- ये लोग एक संगठन बनाकर इस्लामी शासन की स्थापना करना चाहते थे, जैसा कि आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठनों का सपना होता है। वे अपने ग्रुप को ‘लश्कर’ कहकर बुलाते थे। उनकी योजना भारत में इस्लामी कानून लागू करने और गजवा-ए-हिंद जैसी अवधारणा के तहत हिंसक गतिविधियां करने की थी। साथ ही, कुछ विशेष लोगों की हत्या करने की भी उन्हें जिम्मेदारी दी जानी थी, जो समाज में तनाव पैदा करने का उद्देश्य रखती थी।
पाकिस्तान से जुड़ाव- पुलिस के अनुसार, अशहर दानिश का हैंडलर पाकिस्तान समर्थित है। वह अपने को एक पेशेवर कंपनी का सीईओ बताता था ताकि किसी को शक न हो। लेकिन आतंकी नेटवर्क के भीतर उसका कोड नाम ‘गजवा लीडर’ था। वह एक एनजीओ के नाम पर जमीन खरीदने की भी कोशिश कर रहा था ताकि अपने नेटवर्क को स्थायी रूप से कहीं स्थापित किया जा सके। इस आतंकी गिरोह के सदस्य बेहद कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से इन युवकों को कट्टरपंथ की ओर मोड़ा गया और उन्हें ‘धार्मिक कर्तव्य’ बताकर आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया गया। पुलिस ने बताया कि इनका एक आंतरिक गुप्त समूह भी था, जिसमें केवल बेहद भरोसेमंद और कट्टर सोच वाले लोग शामिल थे।
आगे की कार्रवाई- फिलहाल, इस केस में गिरफ्तार पांच लोगों से पूछताछ जारी है और बाकी छह लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क का विदेशी कनेक्शन कहां-कहां तक फैला हुआ है और इनके पीछे कौन-कौन लोग हैं।















