बुरा करने वालों के साथ कैसा व्यवहार करें? जानिए प्रेमानंद जी महाराज से
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होम जीवनशैली

बुरा करने वालों के साथ कैसा व्यवहार करें? जानिए प्रेमानंद जी महाराज से

प्रेमानंद जी महाराज के इस प्रेरणादायक प्रवचन में एक गहन जीवन संदेश निहित है - अच्छाई को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे दुनिया कैसी भी हो।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jul 21, 2025, 11:23 am IST
inजीवनशैली
प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद जी महाराज

प्रेमानंद जी महाराज अपने प्रवचन में बहुत ही सुंदर और गहरा संदेश दिए अच्छाई को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, चाहे दुनिया कैसी भी बन जाए।वे एक प्रेरणादायक कथा के माध्यम से यह बात समझाते हैं। कथा इस प्रकार है-काशी नगरी में एक दिन गंगा जी में एक बिच्छू बहता जा रहा था। एक सज्जन व्यक्ति ने देखा कि बिच्छू डूब रहा है, तो उसने उसे बचाने के लिए हाथ बढ़ाया। लेकिन जैसे ही उसने बिच्छू को उठाया, बिच्छू ने डंक मार दिया। दर्द के बावजूद उस व्यक्ति ने फिर प्रयास किया और फिर से बिच्छू को बाहर निकालने की कोशिश की। बिच्छू ने फिर डंक मार दिया। तीसरी बार फिर वही हुआ। यह देखकर एक व्यक्ति जो पास में खड़ा था, उसने कहा, “क्या आप पागल हैं? वह बार-बार आपको डंक मार रहा है और आप फिर भी उसे बचा रहे हैं?”

उस सज्जन व्यक्ति ने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, “बिच्छू का स्वभाव है डंक मारना और मेरा स्वभाव है बचाना। वह अपने स्वभाव से काम कर रहा है, तो मैं अपने स्वभाव को क्यों छोड़ूं? मैं अच्छाई करना नहीं छोड़ूंगा।” अर्थ यह है कि जैसे बिच्छू का स्वभाव है काटना, वैसे ही कुछ लोगों की आदत होती है बुरा बोलने या दूसरों को नीचा दिखाने की। लेकिन अगर हम उनके जैसे बन जाएँ और अपनी अच्छाई छोड़ दें, तो फिर हमारी अच्छाई का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

महाराज जी कहते हैं कि आज के समय में भी यही होता है। यदि आप किसी के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं, तो जरूरी नहीं कि वह भी आपके साथ वैसा ही व्यवहार करे। कई बार लोग आपकी अच्छाई का उत्तर बुराई से देते हैं। लेकिन तब हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि वह उनका स्वभाव है, हमारा नहीं। हमें अपनी अच्छाई बनाए रखनी चाहिए। अगर कोई बुरा बर्ताव करे, तो सोचना चाहिए कि वह अज्ञान में है। हम बदला नहीं लेंगे, ताकि हमारा मन शांत रहे।

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संघर्ष से भागो मत, वही आपको सफलता देगा- प्रेमानंद जी महाराज

हमें यह भी समझना चाहिए कि जब हम किसी से बदले की भावना रखते हैं, तो हम उनके जैसे बन जाते हैं। लेकिन जब हम अपनी अच्छाई पर टिके रहते हैं, तो हम ईश्वर के और निकट होते हैं। अच्छाई केवल तब तक अच्छाई है जब तक वह बिना किसी अपेक्षा के की जाए। यदि हमने किसी से अच्छे व्यवहार की अपेक्षा रखी और वह पूरी नहीं हुई तो हम दुखी हो जाते हैं। लेकिन जब हम केवल ईश्वर को समर्पित होकर अच्छा व्यवहार करते हैं, तो फिर हमें कोई दुख नहीं होता, चाहे सामने वाला कुछ भी करे।इसलिए महाराज जी कहते हैं कि अगर आप अपने जीवन में सच्चे अर्थों में भक्ति करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने व्यवहार को भगवान को समर्पित करें। दूसरों के व्यवहार से दुखी होने के बजाय यह समझें कि भगवान देख रहे हैं और वह हर अच्छे कर्म का फल देंगे- समय पर। हमेशा यह ध्यान रखें कि हमारे अच्छे कर्म, हमारा मधुर व्यवहार, हमारी विनम्रता – यह सब हमारी आत्मा की पूंजी है। इसे किसी और की बुराई से खोने मत दीजिए। कोई आपसे बुरा व्यवहार करे, कटु बोल बोले, आपके काम में बाधा डाले, फिर भी आप उसे ईश्वर का अंश समझकर क्षमा कर दीजिए। ऐसा करने से आपकी आत्मा हल्की हो जाएगी और आप परमात्मा के और करीब आ जाएंगे।

Topics: प्रेमानंद जी महाराजPremanand Ji MaharajVrindavan wale Premanand ji maharajPremananda Ji Maharaj SatsangPremananda Ji Maharaj Bhajan
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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