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होम भारत

One Nation, One Election के समर्थन में उतरे देश के पूर्व CJI, कही ये बात”

पूर्व चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और यू. यू. ललित ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' का समर्थन किया, लेकिन चेतावनी भी दी। जानें इसकी खासियतें और विवाद।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jul 8, 2025, 07:54 am IST
inभारत
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की वकालत करते रहे हैं। इस विचार को अब देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों का समर्थन प्राप्त हुआ है। पूर्व चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ ने संसदीय समिति को बताया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना संविधान के ढांचे के अनुरूप है। उन्होंने विपक्ष के इस दावे को खारिज किया कि यह अवधारणा संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ है। चंद्रचूड़ का कहना है कि संविधान में ऐसा कोई नियम नहीं है, जो केंद्र और राज्यों के चुनावों को अलग-अलग करने के लिए बाध्य करता हो।

चुनाव आयोग की शक्तियों पर सवाल

हालांकि, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, रंजन गोगोई और अन्य जजों ने चुनाव आयोग को दी गई व्यापक शक्तियों पर चिंता जताई है। प्रस्तावित विधेयक में आयोग को ऐसी शक्तियाँ दी गई हैं, जो विधानसभाओं के पांच साल के कार्यकाल को कम या ज्यादा करने की अनुमति दे सकती हैं। चंद्रचूड़ ने सुझाव दिया कि ऐसी शक्तियों के उपयोग के लिए संविधान में स्पष्ट दिशानिर्देश होने चाहिए। पूर्व चीफ जस्टिस यू. यू. ललित ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा कि ऐसी शक्तियों को नियंत्रित करने के लिए ठोस नियम जरूरी हैं।

क्षेत्रीय दलों पर प्रभाव की चिंता

चंद्रचूड़ ने यह भी आशंका जताई कि एक साथ चुनाव होने से क्षेत्रीय और छोटे दलों का प्रभाव कम हो सकता है। राष्ट्रीय दल, जो वित्तीय और संगठनात्मक रूप से मजबूत हैं, चुनावों में प्रभुत्व जमा सकते हैं। इस असंतुलन को रोकने के लिए उन्होंने चुनावी अभियान और वित्त पोषण के नियमों को और सख्त करने की सलाह दी है, ताकि सभी दलों को समान अवसर मिल सके।

इसे भी पढ़ें: आरएसएस के 100 साल: मंडलों और बस्तियों में हिंदू सम्मेलन का होगा आयोजन, हर घर तक पहुंचेगा संघ

मध्यावधि चुनावों की चुनौती

प्रस्तावित विधेयक के तहत, मध्यावधि चुनावों में चुनी गई सरकार का कार्यकाल केवल मूल पांच साल की अवधि के बचे हुए समय तक होगा। चंद्रचूड़ ने चेतावनी दी कि अगर यह अवधि एक साल या उससे कम है, तो मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) के कारण सरकार की नीति निर्माण और विकास कार्यों की क्षमता प्रभावित हो सकती है। कई सांसदों ने भी संसदीय समिति के सामने इस मुद्दे को उठाया है।

यू यू ललित का सुझाव

पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू. यू. ललित ने सुझाव दिया कि एक साथ चुनावों को लागू करने के लिए चरणबद्ध दृष्टिकोण अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि विधानसभाओं के बचे हुए कार्यकाल को ध्यान में रखते हुए योजना बनानी चाहिए, ताकि कानूनी चुनौतियों से बचा जा सके। यह दृष्टिकोण व्यावहारिक और कम विवादास्पद हो सकता है।

विपक्ष कहता है लोकतंत्र विरोधी

विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने इस विधेयक को “लोकतंत्र विरोधी” और “असंवैधानिक” करार दिया है। उनका कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय दलों को कमजोर करेगा और सत्ता का केंद्रीकरण करेगा। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि एक साथ चुनाव से प्रशासनिक और वित्तीय संसाधनों की बचत होगी, और बार-बार MCC लागू होने से शासन में रुकावटें कम होंगी।

Topics: एक राष्ट्र-एक चुनावD Y ChandrachudNarendra Modiपूर्व मुख्य न्यायाधीशयू. यू. ललितसंवैधानिक ढांचाFormer Chief Justiceचुनाव आयोगU.U. LalitElection CommissionConstitutional Frameworkनरेंद्र मोदीOne Nation-One Electionडी वाई चंद्रचूड़
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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