केंद्र सरकार ने 3 जुलाई 2025 को एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास नियम, 2025 (UMEED) को लागू किया। ये नियम वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, लेखा-जोखा, और प्रबंधन को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पारदर्शी बनाने पर केंद्रित हैं। वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025, जो 8 अप्रैल 2025 से प्रभावी है, के तहत यह पहल शुरू की गई है।
यूनिक कोड के साथ वक्फ संपत्तियों की निगरानी
नए नियमों के तहत, प्रत्येक वक्फ संपत्ति को एक यूनिक पहचान नंबर मिलेगा। मुतवल्ली (वक्फ प्रबंधक) को डिजिटल पोर्टल पर पंजीकरण के लिए मोबाइल और ई-मेल के जरिए OTP से अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी। यह प्रणाली रियल-टाइम निगरानी, विवादों के समाधान और वित्तीय पारदर्शिता को बढ़ावा देगी।
राज्यों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश
नियमों में प्रावधान है कि हर राज्य सरकार को संयुक्त सचिव स्तर से नीचे का एक नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा। यह अधिकारी केंद्र के साथ मिलकर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण और लेखा-जोखा को सुगम बनाएगा। केंद्रीय वक्फ परिषद को डिजिटल पोर्टल पर अपलोड की गई सभी जानकारी तक पहुंच मिलेगी।
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सुप्रीम कोर्ट में कानून की वैधता पर बहस
वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 22 मई 2025 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकारों का हनन करता है। कोर्ट ने वक्फ-बाय-यूजर की अवधारणा, गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने, और कलेक्टर की शक्तियों जैसे मुद्दों पर गौर किया।
केंद्र का तर्क: पारदर्शिता और समावेशिता का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि यह कानून वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वक्फ इस्लाम का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह धार्मिक अनिवार्यता नहीं है, और कानून केवल प्रशासनिक सुधारों पर केंद्रित है।
विवादित बिंदुओं पर तीखी बहस
याचिकाकर्ताओं ने ‘वक्फ-बाय-यूजर’ की अवधारणा हटाने और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने जैसे प्रावधानों को संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन बताया। केंद्र ने जवाब में कहा कि गैर-मुस्लिमों की भागीदारी समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है और धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं करती।
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क्या होगा आगे?
नए नियमों के साथ वक्फ संपत्तियों का डिजिटल प्रबंधन शुरू हो चुका है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का आगामी फैसला इस कानून के भविष्य को तय करेगा। कोर्ट ने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक वक्फ संपत्तियों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।















