पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत से एक बार फिर मानवाधिकारों को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। तुर्बत शहर में एक 30 वर्षीय बलूच महिला, रुबीना बलूच, को कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जबरन उठा लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहएक महीने के भीतर दूसरी घटना है जब किसी बलूच महिला को इस तरह गायब कर दिया गया।
कौन है रुबीना बलूच ..?
रुबीना बलूच पेशे से लेडी हेल्थ विजिटर हैं और केच जिले के गोवारकोप गांव की निवासी हैं, सोमवार को तुर्बत के ओवरसीज कॉलोनी इलाके में अपनी बहन से मिलने पहुंची थीं। बताया जा रहा है कि शाम करीब 4 बजे एक लक्षित अभियान के दौरान फ्रंटियर कॉर्प्स और मिलिट्री इंटेलिजेंस के जवानों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से ही उनका पता नहीं चला की वह कहाँ है..? किस स्थिति में हैं..?
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बलूच विमेंस फोरम ने दी चेतावनी
रुबीना के जबरन गायब किए जाने की बलूच यकजेहती समिति (BYC) और बलूच विमेंस फोरम ने कड़ी निंदा की है। बलूच विमेंस फोरम ने इसे बलूच महिलाओं को निशाना बनाने की बढ़ती खतरनाक प्रवृत्ति बताया है। फोरम ने अपने एक बयान में कहा-
“यह बेहद चिंताजनक है कि रुबीना बलूच को उनके परिवार की मौजूदगी में जबरन उठा लिया गया। यह न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि बेहद अमानवीय भी।”
साथ ही फोरम ने यह भी चेतावनी दी कि बलूच महिलाओं का इस तरह अचानक लापता होना अब सामान्य घटनाओं जैसा बन गया है, और यह महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से अपील की कि वे अपनी कार्रवाई में महिलाओं को इस तरह हिंसा और अपहरण का शिकार न बनाएं।
रुबीना से पहले महजबीन बलोच हुई थी लापता
रुबीना बलूच की गुमशुदगी महजबीन बलोच के लापता होने के ठीक एक महीने बाद हुई है। 24 वर्षीय महजबीन, जो एक पोलियो सर्वाइवर भी हैं, अचानक 29 मई को क्वेटा सिविल अस्पताल से लापता हो गई थीं। उस वक्त वह छात्रावास में जगह न मिलने की वजह से अस्पताल में ही अस्थायी रूप से रह रही थीं।
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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महजबीन बलोच को पुलिस, एंटी-टेरर स्क्वाड और खुफिया एजेंसियों ने मिलकर उन्हें उठाया था जिसके बाद से ही महजबीन का भी कोई सुराग नहीं मिला है।
मानवाधिकार का खुलेआम उलंघन
महजबीन और अब रुबीना- इन दोनों महिलाओं की गायबशुदगी ने बलूच समाज में जबरदस्त आक्रोश पैदा किया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या महिलाएं भी अब राजनीतिक दमन और सैन्य कार्रवाइयों का हिस्सा बन चुकी हैं.? पाकिस्तानी सेना ने अब कानून व्यवस्था के नाम पर अब बुनियादी मानवाधिकारों को भी ताक पर रख दिया है।

















