कनाडा से आया जी-7 का न्योता, सोशल मीडिया पर शेयर कर पीएम मोदी ने कांग्रेस को बैकफुट पर धकेला, प्रोपेगेंडा पर लगा विराम
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कनाडा से आया जी-7 का न्योता, सोशल मीडिया पर शेयर कर पीएम मोदी ने कांग्रेस को बैकफुट पर धकेला, प्रोपेगेंडा पर लगा विराम

कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि 15 जून 2025 को कनाडा में होने जा रहे इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका होगी। ऐसा पहली बार होगा जब बीते छह वर्षों में भारत G7 बैठक से बाहर रहेगा

Written byआर.पी. सिंहआर.पी. सिंह
Jun 6, 2025, 11:27 pm IST
inभारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Canada Invite to PM Modi in G7 summit: पिछले कुछ वर्षों से भारत और कनाडा के रिश्तों में तनाव बना हुआ था, जिसके चलते यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि भारत इस बार G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा, क्योंकि इसकी मेज़बानी कनाडा कर रहा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि 15 जून 2025 को कनाडा में होने जा रहे इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका होगी। ऐसा पहली बार होगा जब बीते छह वर्षों में भारत G7 बैठक से बाहर रहेगा। हालांकि, इन अटकलों पर अब विराम लग गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच फोन पर बातचीत हुई, जिसमें कनाडाई प्रधानमंत्री ने औपचारिक रूप से भारत को सम्मेलन में आमंत्रित किया। पीएम मोदी ने जी-7 में आमंत्रण के लिए कनाडाई पीएम कार्नी का आभार जताया और कनाडा के चुनाव में जीत हासिल करने पर बधाई भी दी है।

कनाडाई पीएम को फोन कॉल पर दिए गए न्योते से यह स्पष्ट हो गया है कि भारत G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेगा, और कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों पर भी विराम लग गया है। भारत और कनाडा के बीच हालिया तनावों के बीच एक सकारात्मक मोड़ आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी दी कि उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में पीएम मोदी ने हाल ही में हुए चुनावों में कार्नी को मिली जीत पर उन्हें बधाई दी और इस महीने कनाडा के कनानसकीस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रण के लिए आभार जताया।

 

पीएम मोदी ने मार्क कार्नी से बात कर चुनाव में जीत पर दी बधाई

पीएम मोदी ने लिखा, ‘कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से फोन पर बात करके खुशी हुई। हाल ही में हुए चुनाव में उनकी जीत पर उन्हें बधाई दी और इस महीने के अंत में कनानसकीस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।’ उन्होंने आगे कहा, ‘गहरे जन-जन संबंधों से बंधे जीवंत लोकतंत्रों के रूप में भारत और कनाडा आपसी सम्मान और साझा हितों के मार्गदर्शन में नए जोश के साथ मिलकर काम करेंगे। शिखर सम्मेलन में हमारी मुलाकात का बेसब्री से इंतजार है।’ इस ट्वीट के साथ यह साफ हो गया है कि भारत G7 शिखर सम्मेलन में शामिल होगा, जिससे उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया है जो भारत की संभावित अनुपस्थिति को लेकर लगाई जा रही थीं। साथ ही, यह घटनाक्रम भारत-कनाडा संबंधों में एक नई सकारात्मक शुरुआत का संकेत भी देता है। यह समिट कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कनानास्किस में 15 से 17 जून तक होगी। भारत को यह न्योता समिट शुरू होने के ठीक 8 दिन पहले मिला है।

विपक्ष के प्रोपेगैंडा को लगा विराम

G7 शिखर सम्मेलन को लेकर हाल के दिनों में कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि कनाडा इस बार भारत को सम्मेलन में आमंत्रित नहीं कर रहा है। इन खबरों के पीछे भारत और कनाडा के बीच हालिया समय में उत्पन्न राजनयिक तनाव को प्रमुख कारण बताया गया। खासकर 2023 में खालिस्तानी मुद्दे को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में जो खटास आई, उसने इस आशंका को और बल दिया। भारत 2019 से लगातार G7 सम्मेलनों में विशेष आमंत्रित अतिथि (Guest Country) के रूप में भाग लेता रहा है। इस भूमिका में भारत ने जलवायु परिवर्तन, वैश्विक स्वास्थ्य, तकनीकी सहयोग और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे अहम मुद्दों पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे में जब यह अटकलें सामने आईं कि भारत को इस बार आमंत्रण नहीं मिलेगा, तो यह न सिर्फ भारत-कनाडा संबंधों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े करने लगा, बल्कि कनाडा की अंतरराष्ट्रीय भूमिका और निर्णयों की निष्पक्षता पर भी चर्चा होने लगी। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को G7 सम्मेलन में आमंत्रित किए जाने और उनके व कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच फोन पर हुई सकारात्मक बातचीत ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि भले ही मतभेद रहे हों, लेकिन वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

कनाडा के साथ भारत के रिश्तों में आई थी खटास

भारत और कनाडा के बीच बीते कुछ समय से रिश्तों में गहराता तनाव अब एक नई दिशा लेता दिख रहा है। यह तनाव वर्ष 2023 में उस समय अपने चरम पर पहुंच गया था, जब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था, लेकिन इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में खटास आ गई। इन आरोपों के बाद ट्रूडो की घरेलू साख पर भी असर पड़ा और उन्हें देश के भीतर कड़े राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ा। अंततः उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

कनाडा के आम चुनावों में मार्क कार्नी ने लहराया जीत का परचम

इसके बाद कनाडा में आम चुनाव हुए, जिसमें मार्क कार्नी ने जीत दर्ज की और देश के नए प्रधानमंत्री बने। मार्क कार्नी के नेतृत्व में कनाडा की विदेश नीति में एक संतुलित और व्यावहारिक रुख देखने को मिल रहा है। उन्होंने भारत के साथ संवाद को पुनर्स्थापित करने की पहल की है, जिसका प्रमाण हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई फोन पर बातचीत और G7 शिखर सम्मेलन के लिए भारत को दिए गए निमंत्रण में देखा जा सकता है। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि दोनों देश अब आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर संबंधों को नई दिशा देने की ओर अग्रसर हैं।

वैश्विक मंच से भारत को अलग रखना कनाडा के लिए असंभव

G7 शिखर सम्मेलन विश्व की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का ऐसा मंच है, जहां वैश्विक मुद्दों पर गंभीर चर्चा होती है। पिछली बार इस सम्मेलन का आयोजन वर्ष 2023 में जापान के हिरोशिमा शहर में हुआ था। G7 समूह में अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इटली और कनाडा शामिल हैं। यह मंच न केवल आर्थिक नीतियों पर, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे व्यापक और सामयिक विषयों पर भी चर्चा के लिए जाना जाता है। ऐसे में भारत जैसे उभरते वैश्विक शक्ति को इस मंच से अलग करना न केवल अनुचित होता, बल्कि आयोजक देश के रूप में कनाडा की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी गहरा धक्का पहुंचा सकता था।

वैश्विक राजनीति में भारत की अहम भूमिका

भारत आज वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक संतुलन में एक अहम भूमिका निभा रहा है। इसलिए G7 जैसे वैश्विक मंच से भारत को बाहर रखना व्यावहारिक और राजनयिक दृष्टि से कनाडा के लिए असंभव था। आखिरकार, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को G7 सम्मेलन में आमंत्रित किया जाना इस बात का संकेत है कि वैश्विक राजनीति में भारत की भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता और कनाडा भी इस सच्चाई को भली-भांति समझता है।

 

Topics: पीएम मोदीकनाडाजस्टिन ट्रूडोमार्क कार्नीCanada Invite to PM Modi in G7 summit:जी 7 समिट
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