नीदरलैंड में कट्टरपंथी इस्लामवादियों को उनका सही स्थान दिखाकर उनकी अकड़ ढीली करने वाले दक्षिणपंथी नेता गीर्ट विल्डर्स भारतीय छात्रा शर्मिष्ठा पनौली की गिरफ्तारी के विरोध में सामने आए हैं। पुणे में कानून की छात्रा को कोलकाता पुलिस द्वारा गुरुग्राम से गिरफ्तार करने को लेकर नीदरलैंड के इस हिम्मती नेता ने शर्मिष्ठा के पक्ष में उतरकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें रिहा कराने की मांग की है।
शर्मिष्ठा पनौली को गत दिनों कोलकाता पुलिस ने सोशल मीडिया पर उसकी ‘इस्लाम विरोधी’ टिप्पणी के विरुद्ध दर्ज की गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार करके प. बंगाल में अलीपुर अदालत में पेश किया था जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने और मजहबी भावनाओं को आहत करने जैसे आरोप शामिल हैं। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग शर्मिष्ठा के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं और उसकी गिरफ्तारी को गलत और मजहबी तत्वों को और हवा देने वाला कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि शर्मिष्ठा को लेकर भड़काने वाली बातें करने वालों, शर्मिष्ठा का सिर तन से जुदा करने जैसी बातें करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही!

शर्मिष्ठा ने इंस्टाग्राम पर अपना एक वीडियो डाला था जिसमें उसेन ऑपरेशन सिंदूर पर बेबाक अंदाज में टिप्पणी की थी। वीडियो में पाकिस्तान और ‘इस्लामवादियों के विरुद्ध’ आपत्तिजनक बातें कही गई थीं, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। हालांकि, शर्मिष्ठा ने बाद में माफी मांग ली थी और वीडियो भी डिलीट कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे गिरफ्तार किया गया।
नीदरलैंड के वरिष्ठ नेता गीर्ट विल्डर्स उन्मादी इस्लामवादियों की हरकतों के विरुद्ध मुखर रहे हैं और अपने देश में इसके विरुद्ध लगातार आंदोलन चलाते आ रहे हैं। वे अक्सर इस्लाम और कट्टरपंथ के खिलाफ खुलकर बयान देते रहे हैं। उन्होंने शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी को गलत बताते हुए इसे ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दाग’ करार दिया है। वे सोशल मीडिया पर लिखते हैं, “शर्मिष्ठा को गिरफ्तार करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दाग है…।”
गीर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि वे शर्मिष्ठा के अधिकारों की रक्षा करें और उन्हें जल्द से जल्द रिहा किया जाए। शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी से नाराज भारतीय जनता पार्टी के नेता शुवेंदु अधिकारी ने इसे ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ का कदम करार दिया है और ममता बनर्जी सरकार पर सीधा आरोप लगाया है। वहीं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने भी शर्मिष्ठा की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की है। मिश्रा ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है और उसकी तत्काल रिहाई की मांग की है।
प. बंगाल की ममता बनर्जी सरकार हर मौके पर मजहबी तत्वों के पक्ष में खड़ी दिखती है। हिन्दू आस्था पर कोई चोट करता है तब यह सरकार अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं करती, लेकिन जैसे ही कोई हिन्दू कट्टरपंथी तत्वों के विरुद्ध आवाज उठाता है तो फौरन उसके विरुद्ध सख्ती दिखाती है। अपने मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लोकतांत्रिक मूल्यों को आसानी से नजरअंदाज करती दिखती हैं। गीर्ट विल्डर्स जैसे अंतरराष्ट्रीय नेताओं का शर्मिष्ठा के समर्थन में उतरना बताता है कि दूसरे देशों के लोग भी जान रहे हैं कि ममता किस प्रकार तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं।

















