ऑपरेशन सिंदूर: प्रतीकों की पुकार, संकल्प की हुंकार
June 29, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

ऑपरेशन सिंदूर: प्रतीकों की पुकार, संकल्प की हुंकार

‘ऑपरेशन सिंदूर’ यह कोई सामान्य सैन्य ऑपरेशन नहीं था, न ही यह केवल एक कोडवर्ड था। यह एक सजीव सांस्कृतिक घोषणा थी, जो भारत की आत्मा से निकली थी।

Written byआसिफ़ ज़मां रिज़वीआसिफ़ ज़मां रिज़वी
May 15, 2025, 05:35 pm IST
in भारत
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

जब भारत ने हाल ही में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का माकूल और निर्णायक उत्तर दिया, तो उस जवाबी सैन्य कार्रवाई को एक ऐसा नाम दिया गया जिसने शत्रु को केवल रणभूमि में नहीं, बल्कि विचार और संस्कृति के धरातल पर भी पराजित कर दिया‘। ऑपरेशन सिंदूर’ यह कोई सामान्य सैन्य ऑपरेशन नहीं था, न ही यह केवल एक कोडवर्ड था। यह एक सजीव सांस्कृतिक घोषणा थी, जो भारत की आत्मा से निकली थी। यह प्रतिशोध नहीं, प्रत्युत्तर था; केवल सैन्य नहीं, सांस्कृतिक और वैचारिक युद्ध का प्रतीक भी था।

इस नाम के पीछे छिपा था वह पीड़ा और आक्रोश जो पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पूरे देश ने अनुभव किया। जब आतंकियों ने नवविवाहित जोड़ों को निशाना बनाया—ऐसे युवक जो विवाह के कुछ ही दिनों बाद जीवन की नई शुरुआत करने निकले थे, और जिनकी पत्नियों के हाथों में अब भी मेहंदी की रंगत थी, जिनके माथे पर सिंदूर की लाल रेखा उनके सुखद भविष्य की कामना थी—तो उन मासूम प्रतीकों को रौंदने की यह बर्बरता किसी एक व्यक्ति या परिवार पर नहीं, पूरे देश की आत्मा पर आघात थी।

भारत ने इस बार केवल बंदूक नहीं उठाई, उसने शब्दों का भी चयन ऐसा किया जो मन, मस्तिष्क और आत्मा तक जाकर चोट करे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम एक सांस्कृतिक घोषणा बन गया—यह स्पष्ट कर देने वाला संदेश कि अब भारत केवल गोलियों से नहीं, गौरव से भी जवाब देगा। सिंदूर हमारे समाज में केवल सौंदर्य प्रसाधन नहीं, वह विश्वास, पवित्रता, समर्पण और जीवन के प्रति आश्वासन का प्रतीक है। सिंदूर उस विवाह-संस्कार का प्रतीक है जो भारत की सांस्कृतिक पहचान में रचा-बसा है। वह स्त्री के आत्मबल का, उसकी आस्था का, और एक जीवनसाथी के साथ साझेदारी के दृढ़ संकल्प का रंग है। जब किसी नवविवाहिता का सिंदूर उसके पति के खून से धो दिया जाए, तो वह सिर्फ एक स्त्री का शोक नहीं होता—वह पूरे राष्ट्र के मस्तक पर लगे कलंक के समान होता है। और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उस कलंक को धोने का भारत का निर्णय था।

यह नामकरण एक युद्ध को युद्ध से आगे ले गया—यह वैचारिक और सांस्कृतिक प्रतिक्रिया थी। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि अब हर युद्ध केवल सीमा पर नहीं लड़ा जाएगा, वह मनोभूमि पर भी लड़ा जाएगा। यह विचारों की, प्रतीकों की, और गौरव की रक्षा की लड़ाई है।

इस बार की घोषणा भी अलग थी। जब सैन्य कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी दी गई, तो दो महिला सैन्य अधिकारियों को मंच पर लाकर देश को संबोधित कराया गया। यह केवल संयोग नहीं था, यह भारत की उस नवीन सोच का प्रतिरूप था जो अब नारी को केवल सहनशीलता की मूर्ति नहीं, शक्ति और साहस की प्रतीक मानती है। यह उस भारत का चित्र था जहाँ अब बेटियाँ न केवल सरहद की रक्षा करती हैं, बल्कि शत्रु पर आक्रमण करने की रणनीति भी बनाती हैं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक सैन्य क्रिया से कहीं अधिक था। यह भारत की बदलती मानसिकता, उसकी आत्मविश्वासपूर्ण चेतना और सांस्कृतिक अस्मिता की गूंज थी। यह उस सोच के विरुद्ध एक उद्घोषणा थी जो भारत को अब भी एक मौन, सहिष्णु और आत्मपीड़ित राष्ट्र मानती थी। भारत अब मौन नहीं, मुखर है। सहिष्णुता अब उसकी कमजोरी नहीं, उसकी विवेकशीलता है। लेकिन जब बात उसकी नारी की मर्यादा की हो, उसकी संस्कृति की प्रतिष्ठा की हो—तो वह अब दहाड़ने को तैयार है। लेकिन जिस पवित्रता के साथ भारत ने यह नाम चुना, उसी नाम पर कुछ तथाकथित बुद्धिजीवियों और राजनीतिक विरोधियों ने व्यंग्य कसा। उन्होंने ‘सिंदूर’ जैसे सांस्कृतिक प्रतीक का उपहास किया। वे यह भूल गए कि यही सिंदूर भारत की उन करोड़ों महिलाओं की भावना है जो हर रोज अपने पतियों, बेटों और भाइयों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं, जिनकी आँखों में सरहद पर खड़े अपने प्रियजनों की चिंता तो होती है, पर माथे पर सिंदूर की रेखा उम्मीद की तरह चमकती रहती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राष्ट्र को संबोधित करते हुए जो कहा, वह केवल चेतावनी नहीं, एक सांस्कृतिक उद्घोष था—“जो भारत की माताओं-बहनों की ओर बुरी नज़र डालेगा, उसका अंजाम अब पहले से अधिक कठोर होगा।” यह वाक्य अब केवल शब्द नहीं, भारत की विदेश नीति और सुरक्षा दृष्टिकोण का मूल भाव बन चुका है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ केवल एक सैन्य योजना नहीं थी, यह सैनिकों के लिए भावनात्मक प्रेरणा थी। यह उन्हें बताता था कि वे केवल सीमाओं की रक्षा नहीं कर रहे, वे उन सिंदूर की रेखाओं की रक्षा कर रहे हैं जो भारत की प्रत्येक स्त्री के मस्तक पर विश्वास और समर्पण के रूप में चमकती हैं। यह मनोवैज्ञानिक ऊर्जा का स्रोत बन गया—ऐसी शक्ति जो गोलियों से नहीं, भावना और विश्वास से आती है। यह ऑपरेशन भारत के बदलते स्वरूप का परिचायक है। एक ऐसा भारत जो अब केवल तकनीकी रूप से सशक्त नहीं, वैचारिक रूप से भी सजग है। जो समझ चुका है कि आधुनिक युद्ध केवल टैंकों और मिसाइलों से नहीं, प्रतीकों और विचारों से भी लड़े जाते हैं। जब एक सैन्य कार्रवाई का नाम ही एक सांस्कृतिक शस्त्र बन जाए, तो वह शस्त्रों से अधिक प्रभावी हो सकता है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ भविष्य की उस रणनीति की नींव है जिसमें भारत अब अपने सांस्कृतिक मूल्यों को भी युद्ध की भाषा में शामिल करेगा। यह सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का नवीन प्रारूप है—जहाँ परंपराएं केवल अतीत की स्मृति नहीं, वर्तमान की शक्ति बन चुकी हैं। यह नाम उस संघर्ष की चेतावनी है, जिसमें भारत अब भावनात्मक नहीं, निर्णायक है। वह अब केवल सहता नहीं, उत्तर देता है। जो भी उसकी संस्कृति, उसकी नारियों या उसकी आत्मा पर आघात करेगा, उसे अब केवल सीमा पर नहीं, आत्मा की गहराइयों से उत्तर मिलेगा। यही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सबसे गहरा और व्यापक संदेश है।

इस नाम ने मनोवैज्ञानिक युद्ध में भी दुश्मन को पराजित किया। दुश्मन ने जब यह नाम सुना, तो उसे समझ ही नहीं आया कि भारत किस स्तर पर लड़ाई लड़ रहा है। यह नाम एक मिसाइल की तरह शत्रु के दिमाग में जा बैठा। यह केवल एक ऑपरेशन नहीं था, यह उस भारत की वापसी थी जो युगों-युगों से अपने संस्कारों से ताकत पाता आया है। अब भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं लड़ा जाता, वह विचारों, प्रतीकों और आत्मबल से भी लड़ा जाता है।

जो लोग यह पूछते हैं कि इस ऑपरेशन का नाम ‘सिंदूर’ क्यों रखा गया, वे शायद कभी भारत की मिट्टी से जुड़े नहीं। वे नहीं जानते कि जब किसी स्त्री की मांग का सिंदूर मिटता है, तो वह केवल एक व्यक्ति का शोक नहीं होता—वह सम्पूर्ण राष्ट्र की अस्मिता पर आघात होता है। और जब पहलगाम में आतंकवादियों ने नवविवाहित पतियों की हत्या की, तो उन्होंने उस सिंदूर को रौंदा। तब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम केवल जवाब नहीं, प्रतिज्ञा बन गया—अब भारत चुप नहीं रहेगा। अब वह हर सिंदूर की रक्षा करेगा।

यह ऑपरेशन अपने नाम से ही एक वैचारिक क्रांति का शंखनाद था। यह वह क्षण था जब शस्त्र और शास्त्र, दोनों एक साथ चले। जब भारत ने कहा—अब शौर्य केवल तलवार से नहीं, विचार से भी होगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उन सभी के लिए चेतावनी है जो भारत की स्त्री शक्ति को कमज़ोर समझते हैं, जो हमारी संस्कृति को पिछड़ा कहते हैं, जो मानते हैं कि भारत अब भी भावनात्मक राष्ट्र है। हाँ, भारत भावनात्मक है—पर अब उसकी भावनाएँ शस्त्र बन गई हैं। अब भारत रोता नहीं, गरजता है।

भारत अब बदल चुका है। यह भारत अब न गोली से डरता है, न आलोचना से। यह भारत अब उपहास का उत्तर संकल्प से देता है। और यह भारत हर माँ, हर बहन, हर बेटी के सिंदूर की रक्षा के लिए युद्ध भी लड़ेगा, और उसे गर्व से दुनिया के सामने प्रस्तुत भी करेगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ कोई अंतिम कदम नहीं था, यह एक नई शुरुआत है। अब हर सांस्कृतिक प्रतीक भारत की रणनीति का हिस्सा होगा। अब हर अपमान का उत्तर संस्कार से भी मिलेगा और संहार से भी। अब भारत केवल भूगोल नहीं, विचारधारा से भी लड़ेगा। अब कोई भी हमला केवल सीमाओं पर नहीं होगा, हर मानसिक चोट का जवाब भी दिया जाएगा। और यह जवाब केवल बंदूक से नहीं, सिंदूर से भी आएगा।

यह उस भारत की कहानी है, जो अब श्रद्धा को कमजोरी नहीं मानता, जो अब प्रतीकों को केवल परंपरा नहीं, प्रेरणा मानता है। यह भारत उन हर नारी को नमन करता है, जो अपने माथे पर सिंदूर सजा कर केवल श्रृंगार नहीं करती, एक जीवन मूल्य, एक आस्था, एक संकल्प को जीवित रखती है। यही वह भावना है, जिसे आहत करने वालों को अब उत्तर मिलने लगा है—स्पष्ट, सशक्त और सांस्कृतिक।

Topics: Operation Sindooroperation sindoor newsभारत की सैन्य कार्रवाईसिंदूर का सांस्कृतिक महत्वभारतीय नारी शक्तिIndia Pakistan Newsपहलगाम आतंकी हमलाऑपरेशन सिंदूर
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

ऑपरेशन सिंदूर पर फेक खबरों का सरकार ने किया खंडन, रक्षा मंत्रालय ने कही बड़ी बात

Operation sindoor

ऑपरेशन सिंदूर पर कांग्रेस की ओछी राजनीति : रक्षा मंत्री के भाषण को गलत तरीके से किया जा रहा पेश, फैलाया जा रहा झूठ

Operation sindoor

ऑपरेशन सिंदूर: बलिदानी जवानों को लेकर मीडिया-सोशल मीडिया में फैली अफवाह, रक्षा मंत्रालय ने बताई सच्चाई

प्रतीकात्मक तस्वीर

‘हम भी अपने बच्चों को सेना में भेजेंगे’, कहानी ऑपरेशन सिंदूर के वीर बलिदानी नायकों की

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर में बलिदान हुए थे छह सपूत, सरकार ने जारी किए नाम

पहलगाम में आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों की हत्या की थी

पहलगाम आतंकी हमला: NIA ने फाइल की चार्जशीट, पाकिस्तानी हैंडलर अली साजिद का खुलासा

Load More

ताज़ा समाचार

यूरोपी में गर्मी से बुरा हाल

यूरोप में जानलेवा गर्मी : फ्रांस में अबतक करीब 1,000 लोगों की मौत

प्रियांक खड़गे

RSS मानहानि मामला: प्रियांक खड़गे और मोहम्मद हैरिस के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश, कोर्ट ने दोनों को किया तलब

तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहब देवरस एवं इंदिरा गांधी की तानाशाही

इंदिरा की अकड़ और बालासाहब की स्पष्टता

सुरों की साधना

सुरों की संगिनी प्रकृति: ऋतु चक्र, प्रहर और शास्त्रीय संगीत का शाश्वत नाता

रणधीर जायसवाल

कराची हमले के आरोपों को भारत ने बताया निराधार, कहा- पाकिस्तान अपने यहां आतंकी ढांचे पर करे विश्वसनीय कार्रवाई

ओ पी चौधरी, वित्त मंत्री, छत्तीसगढ़

श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों को मंदिर दान प्रकरण पर बोलने का अधिकार नहीं : ओ पी चौधरी

बात भारत की

सदियों पुराना नाता : सुवर्णभूमि से ‘एक्ट ईस्ट’ तक भारत दक्षिण पूर्व एशिया के संबंध

मुंबई पुलिस ने फैयाज को किया गिरफ्तार

मुहर्रम के दिन जहरीले कैप्सूल बांटकर 15000 लोगों को मारने की थी साजिश, जानें कैसे दबोचा गया फैयाज

प्रतीकात्मक तस्वीर (AI-generated image)

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर अफवाहों से बचें, सोशल मीडिया पर वायरल दावे भ्रामक: सरकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशल्स सरकार ने ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ अवॉर्ड से किया सम्मानित

दुनिया में बढ़ती भारत की साख : सेशेल्स ने पीएम मोदी को सबसे बड़े सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ से किया सम्मानित

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies