महाराणा प्रताप: हल्दीघाटी की विजयगाथा और भारत के स्वाभिमान का प्रतीक
August 7, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

महाराणा प्रताप: हल्दीघाटी की विजयगाथा और भारत के स्वाभिमान का प्रतीक

18 जून सन् 1576 में हल्दीघाटी घाटी का युद्ध मध्य काल में भारत की स्वतंत्रता और स्वाभिमान का विजय दिवस है। रक्ततलाई (हल्दीघाटी का युद्ध) का युद्ध भारत वर्ष की आन-बान-शान, स्वतंत्रता और स्वाभिमान का प्रतीक है।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
May 9, 2025, 05:20 pm IST
inभारत

“बादलों में वो दम कहां जो सूर्य को रोक सके।
शेर की मार सह सके ऐसे सियार ने कभी जन्म नहीं लिया।
और एक शेर कभी गीदड के आगे झुक सकता नहीं है ।- महाराणा प्रताप

भगवान एक लिंग नाथ के दीवान महारथी राणा कीका (महाराणा प्रताप)और राणा पूंजा भील, हिंदू धर्म ध्वज रक्षक, हिंदुत्व के सूर्य, भारतीय स्वतंत्रता, स्वाभिमान और शौर्य के प्रतीक के रुप शिरोधार्य हैं। महाराणा प्रताप मुगलों के लिए यमराज की भाँति थे, वहीं राणा पुंजा भील ने अकबर के लालच भरे प्रस्ताव को ठुकरा कर यमदूत का रुप ले लिया था। इसलिए दोनों, धूर्त और लंपट अकबर के लिए भय का पर्याय बन गए थे। इतिहास गवाह है कि भयाक्रांत धूर्त अकबर कभी युद्ध के लिए राणा कीका के सामने नहीं आया। आज मणि -कांचन संयोग है, क्योंकि ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया विक्रम संवत 1597 तदनुसार 9 मई 1540 को महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था,और आज ही भारत ने पाकिस्तान को तहस-नहस कर दिया है।

इतिहास, इतिहास को दोहराता है, और इस दृष्टि से वर्तमान परिप्रेक्ष्य में लव जिहाद की आड़ में इस्लामिक स्टेट की जो अवधारणा है वही अवधारणा प्रकारांतर से मध्यकाल में भारत में देखी जा सकती हैं। वर्तमान में प्रचलित लव जिहाद की आड़ इस्लामिक स्टेट की अवधारणा में अनेक मनोवैज्ञानिक पहलू हैं परंतु मध्यकाल में लव जिहाद की आड़ में इस्लामिक स्टेट की अवधारणा का मनोवैज्ञानिक पहलू भय तथा तथाकथित प्रेम का संदेश था। तथाकथित सल्तनत काल में अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी को प्राप्त करने के लिए लव जिहाद का उद्घोष किया था परंतु उसका राणा रतन सिंह ने माकूल जवाब दिया था और रानी पद्मावती के साथ हजारों वीरांगनाओं ने जौहर कर नारी अस्मिता की रक्षा की थी। अकबर ने राजपूताना में पूतना के रुप में प्रवेश किया था और लव जिहाद की आड़ में इस्लामिक स्टेट की स्थापना करना उदेश्य से घुसपैठ की थी परंतु महाराणा प्रताप ने लंपट अकबर के मंसूबों पर पानी फिर दिया।

यहाँ अकबर के बारे में लव जेहादी शब्द का प्रयोग उस भाव के रुप में हुआ है जिसका खुलासा कम ही हुआ है।
अब देखिए न समकालीन लेखक अब्दुल कादिर बदायूंनी बताता है कि अकबर के हरम में 5 हजार औरतें थीं और देखें 300 पत्नियों के साथ ढेर सारी रखैलें भी थीं। यहाँ तक कि अकबर ने तो अपने संरक्षक पितृ तुल्य बैरम खान की पत्नी सलीमा बेगम को भी अपनी पत्नी बना लिया था। ऐंसे थे तथाकथित अकबर महान!!!

अकबर राजपूताना के साथ मैत्री पूर्ण संबंधों की आड़ में अपनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा की प्रतिपूर्ति करना चाहता था, इसलिए उनसे कन्या लेकर वैवाहिक संबंध स्थापित करना आरंभ किया था। हल्दीघाटी के युद्ध के विविध कारण हैं परंतु उनमें से एक प्रमुख कारण यह भी है कि महाराणा प्रताप अन्य राजाओं की तरह अपने कुल की कन्याओं को समर्पित करने तैयार न थे। अकबर ने इस्लामिक स्टेट की अवधारणा को लेकर संपूर्ण भारत में कहर बरपा दिया था और इसी संदर्भ में महाराणा प्रताप के पास 4 बार मैत्रीपूर्ण संधि करने के लिए अकबर ने विभिन्न राजदूत मंडल भेजें, परंतु महाराणा प्रताप, अकबर के कुचक्र को समझते थे इसलिए अपने राष्ट्र की स्वतंत्रता और अस्मिता के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते थे।

वहीं दूसरी ओर भोमट क्षेत्र पानरवा के भील राजा भील वंश के गौरव महारथी राणा पूंजा को अनेक बार धूर्त अकबर ने प्रकारांतर मिलाने के अथक प्रयास किए परंतु सब व्यर्थ गए। गौरतलब है कि जब – जब भारतवर्ष के स्व पर आंच आई है तब – तब जनजातियों ने सर्वस्व अर्पित किया है, जिसका अनूठा दृष्टांत हल्दीघाटी का युद्ध है। गौरतलब है कि मेवाड़ के राज्य चिन्ह में एक ओर महाराणा प्रताप हैं तो दूसरी ओर राणा पुंजा भील हैं। राज्य चिन्ह में आदर्श वाक्य के रुप में अंकित है कि, ” जो दृढ़ राखे धर्म को, तिही राखे करतार “।

अकबर जब राणा पुंजा भील को नहीं मिला सका तब उसने राणा पुंजा को युद्ध से पृथक रहने के लिए धमकाया, परंतु कोई लाभ न हुआ। अतः युद्ध होना अवश्यंभावी हो गया था। रणनीति के अनुसार राणा पूंजा भील ने हल्दीघाटी के युद्ध के एक दिन पूर्व 17 जून को ही अरावली पर लामबंदी कर ली थी ताकि मुगलों पर घात लगा कर हमला किया जा सके। 8 जून सन् 1576 को प्रातः 8 बजे हल्दीघाटी में भयंकर मोर्चा खुल गया। महाराणा प्रताप अग्रिम दस्ते ने हकीम सूर के निर्देशन में और दूसरी ओर दक्षिण पक्ष के नायक राजा रामशाह ने मुगलों पर भयानक हमला किया।

मुगल सेना को खमनौर तक जमकर खदेड़ा, मुगल और कछवाहा राजपूत सैनिक भेड़ों की झुंड की भांति भाग निकले। मुगल सेनानायक गाजी खां मुल्ला चिल्लाता हुआ भागा कि “घोर आपत्ति के समय भाग जाना मोहम्मद साहब की उक्तियों में से एक है” महाराणा के प्रथम आक्रमण के तीव्र वेग से ही मुगलों की पीठें मुड़ गईं। अब्दुल कादिर बदायूंनी ने जो स्वयं रण क्षेत्र में विद्यमान था, अपनी पुस्तक मुन्तखब – उत-तवारीख में लिखा है कि “हमारी जो फौज पहिले हमले में ही भाग निकली थी वह बनास नदी को पार कर पांच-छह कोस तक भागती रही।”

युद्ध भयानक हो उठा था। पुन:शहजादा सलीम, मान सिंह, सैय्यद बारहा और आसफ खान ने मोर्चा संभाला। शहजादा सलीम और मान सिंह की रक्षार्थ 20 हाथियों ने घेराबंदी कर रखी थी। घेराबंदी तोड़ने के लिए राणा प्रताप ने रामप्रसाद को आगे बढ़ाया अपरान्ह लगभग 12.30 बजे हाथियों का घमासान युद्ध हुआ। शस्त्रों से सुसज्जित रामप्रसाद ने भयंकर रौद्र रुप धारण किया अकबर के 13 हाथियों को अकेले रामप्रसाद ने मार डाला और 7 हाथियों को मोर्चे से हटा दिया गया। इस तरह राणा प्रताप के लिए रामप्रसाद ने शहजादा सलीम और मानसिंह तक पहुंचने का मार्ग खोल दिया।

महाराणा प्रताप ने शहजादा सलीम पर भयंकर आक्रमण किया, महावत मारा गया और हौदे पर जबरदस्त भाले का प्रहार किया, शहजादा सलीम नीचे गिर गया जिसे बचाने मान सिंह आया परिणाम स्वरूप मान सिंह की भी वही दुर्गति हुई। शहजादा सलीम और मान सिंह युद्ध भूमि से पलायन कर गए।

सैय्यद बारहा और आसफ खां पर राणा पूंजा भील ने घात लगाकर हमला किया फलस्वरूप मुगल सेना हल्दीघाटी से पलायन कर गई और महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी का युद्ध जीत लिया। परंतु दूसरी ओर रामप्रसाद ने शेष हाथियों का पीछा किया और आगे निकल गया परंतु थकान अधिक हो गई थी और महावत भी मारा गया तब 7 हाथियों और 14 महावतों की सहायता से पकड़ा गया। अकबर के इस युद्ध का एक कारण रामप्रसाद हाथी की प्राप्ति भी करना था, परंतु सब व्यर्थ गया अकबर ने इसका नाम पीरप्रसाद रखा और हर प्रकार के मनपसंद खाद्यान्न प्रस्तुत किए परंतु रामप्रसाद ने ग्रहण नहीं किया और इसी अवस्था में 18 दिन बाद रामप्रसाद ने प्राणोत्सर्ग किया। धूर्त अकबर ने स्वयं रामप्रसाद की मृत्यु पर कहा कि “जिसके हाथी को मैं नहीं झुका सका.. उसके स्वामी को क्या झुका सकूंगा”। चेतक के महान योगदान और बलिदान ने उसे विश्व का महानतम घोड़ा बनाया है।

18 जून सन् 1576 में हल्दीघाटी घाटी का युद्ध मध्य काल में भारत की स्वतंत्रता और स्वाभिमान का विजय दिवस है। रक्ततलाई (हल्दीघाटी का युद्ध) का युद्ध भारत वर्ष की आन-बान-शान, स्वतंत्रता और स्वाभिमान का प्रतीक है। हल्दीघाटी भारतीयों के शौर्य और स्वाभिमान की विजय का सर्वाधिक पवित्र तीर्थ है।18 जून 1576 को महाराणा प्रताप की ओर से न केवल राजपूतों वरन् सभी जातियों के सर्वोत्तम योद्धाओं के रक्त से इस पवित्र भूमि का तिलक हुआ था, जबकि वर्णसंकर मुगलों के रक्त से भूमि अपवित्र हुई और चगताई तुर्कों (मुगलों) को मैदान छोड़कर भागने पड़ा, जिसकी सजा चालाक अकबर ने मान सिंह और आसफ खाँ को दी। नवीन शोधों और तत्कालीन समय के जमीन के पट्टे तथा अन्य साक्ष्य महाराणा प्रताप की विजय को प्रमाणित करते हैं। हल्दीघाटी के युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने 18 युद्ध जीते और 25 वर्ष तक संघर्ष कर मुगलों को धराशायी कर दिया। वामपंथी इतिहासकारों,पाश्चात्य इतिहासकारों, इन पर एक दल विशेष के समर्थक परजीवी इतिहासकारों ने गहरी साजिश रची और हल्दीघाटी के युद्ध को अनिर्णायक बता दिया तो कुछ ने मुगलों को ही जिता दिया,और पाठ्य पुस्तकों में ठूंस दिया,अब हटाना है, जबकि सच आपके सामने है।

Topics: चेतकहल्दीघाटी का युद्धमेवाड़ का संघर्षभारत की स्वतंत्रता का इतिहासलव जिहाद का इतिहासमहाराणा प्रतापअलाउद्दीन खिलजीराणा पूंजा भीलरानी पद्मिनी
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
Share1
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

महाराणा प्रताप और इस्लामिक आक्रांता अकबर

हल्दीघाटी के मैदान में असल में हुआ क्या था, आखिर हल्दीघाटी किसके नाम रही? जानें सच

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

महाराणा प्रताप का जीवन लोककल्याण, आदर्श शासन और राष्ट्रीय अस्मिता की रक्षा का उदाहरण है : सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत

महाराणा प्रताप और आक्रांता अकबर

आक्रान्ता मुगलों पर विजय का प्रतीक था हल्दीघाटी युद्ध

Haldighati Battle History Maharana Pratap Victory Evidence Akbar Mughal Army

हल्दीघाटी युद्ध का असली सच: अकबर के सेनापतियों को मिली थी सजा? इन 3 सबूतों से समझें महाराणा प्रताप की महाविजय!

न्यायालय के आदेश के बाद भोजशाला परिसर में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करते हिंदू

भोजशाला : विजय सत्य सनातन की

महाराणा प्रताप जयंती : स्वाभिमानी अडिग प्रताप

Load More

ताज़ा समाचार

Sambhal Violence Judicial Commission Report VHP Dr Surendra Jain Statement Panchjanya

“सत्य की विजय, बेनकाब हुए षड्यंत्रकारी”: संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का VHP ने किया स्वागत

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया (फाइल चित्र)

जस्टिस के खिलाफ सोशल मीडिया अभियान: अवमानना केस में केजरीवाल-सिसोदिया को HC का अल्टीमेटम, 4 सप्ताह में मांगा जवाब!

Haridwar Kumbh Mela 2027, Kumbh 2027 Preparations, Meladhikari Sonika, IIT Roorkee Bridge Testing, Uttarakhand News Today, Panchjanya News

कांवड़ यात्रा 2027 के बाद ‘कुंभ 2027’ की तैयारियों में आएगी तेजी: हरिद्वार में बनेंगे 5 नए पुल, IIT रुड़की करेगी जांच

Spain Morocco Migration Crisis Ceuta Melilla Fence Infiltration Panchjanya

स्पेन में मोरक्को से आई भारी भीड़ का एक सप्ताह: लोग तो लौट गए, पर पीछे छोड़ गए अनसुलझे सवाल और भारी अराजकता!

Kanwar yatra 2025

हरिद्वार कांवड़ यात्रा 2026 : 2 करोड़ 19 लाख 70 हजार से अधिक शिवभक्तों ने लिया गंगा जल

सैनिकों के नाम पर कार्यक्रम और मंच से पूर्व सैनिक ही गायब : फौजीयों के अपमान पर बरसे कर्नल कोठियाल- माफी मांगे कांग्रेस

दीप प्रज्ज्वलित कर प्रबोधन बैठक के समापन सत्र का शुभारंभ करते श्री मोहनराव भागवत। साथ में हैं आचार्य स्वामी जीतेंद्रनाथ जी और विश्वमांगल्य सभा की अन्य पदाधिकारी

‘परिवार व्यवस्था को मजबूत करना समय की आवश्यकता’

Sarsanghchalak Dr Mohan Bhagwat IIMUN Mumbai Speech Gen Z

“Gen-Z देश का भविष्य, शंका नहीं संवाद करें”: मुंबई में डॉ. मोहन भागवत जी ने शिक्षा, आरक्षण और LGBTQIA+ पर रखा दृष्टिकोण

सूबेदार बलदेव तिवारी से कांपते थे अंग्रेज। (चित्र प्रतीकात्मक और एआई द्वारा निर्मित)

महायोद्धा सूबेदार बलदेव तिवारी : राजा शंकर शाह और रघुनाथ के बलिदान का लिया प्रतिशोध

RSS Chief Dr Mohan Bhagwat Statement Gen Z Youth Protests Mumbai Panchjanya

“प्रदर्शन करने वाले Gen Z युवा देशद्रोही नहीं”: मुंबई में RSS सरसंघचालक जी ने कहा- “व्यवस्था सुधार के लिए संवाद जरूरी”

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies