मैं एक समारोह में था जहां मुझसे पाकिस्तान द्वारा लगातार एलओसी (Line of Control) उल्लंघन के बारे में सवाल पूछा गया । पूछा गया कि पाकिस्तान हमेशा एलओसी पर सीमा उल्लंघन क्यों करता है और भारतीय सेना केवल रक्षात्मक उपाय के रूप में क्यों जवाब देती है। इसकी वजह शायद यह भी है कि हमारा मीडिया, विशेष रूप से टीवी चैनल पाकिस्तान द्वारा एलओसी उल्लंघन की रिपोर्ट कैसे करते हैं। हमें 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पिछले 11 दिनों से नियंत्रण रेखा (एलओसी) के लगातार उल्लंघन के पीछे पाकिस्तान के गेमप्लान को समझना होगा और सही परिप्रेक्ष्य में रखना होगा।
भारत और पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में अखनूर से गुरेज तक लगभग 750 किमी की एलओसी साझा करते हैं, जिसकी ऊंचाई अखनूर से कारगिल और गुरेज की ओर 4000 फीट से 14,000 फीट तक पहुँच जाती है। अखनूर के आसपास की निचली पहाड़ियों से लेकर बर्फ से ढके पहाड़ों तक, एलओसी में एक चुनौतीपूर्ण इलाका है, जिसमें छोटे नाले, नदियां, गहरे जंगल, घाटियां और ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं। इलाका चुनौतीपूर्ण है और यह आतंकवादियों को भारत में घुसने की संभावना देता है। हालांकि भारत ने नियंत्रण रेखा के लगभग 550 किलोमीटर हिस्से पर बाड़ लगा रखी है, लेकिन यह क्षेत्र अभी भी कम संख्या (2 से 4) में आतंकवादियों की घुसपैठ के लिए संवेदनशील बना हुआ है।
भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा का वर्तमान संरेखण 1972 के शिमला समझौते के द्वारा निर्धारित है। भारत ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर पाकिस्तान के साथ बहुत संयम से काम लिया है और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम समझौते का पूरी तरह से पालन किया है, जिसे आखिरी बार फरवरी 2021 में भारत और पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशकों द्वारा नवीनीकृत किया गया था। चूंकि पाकिस्तान ने 25 अप्रैल को भारत के साथ शिमला समझौते को निलंबित कर दिया है, इसलिए संघर्ष विराम समझौता स्वतः ही शून्य हो गया है। इस प्रकार, पाकिस्तान ने चालाकी से एलओसी को सक्रिय रखने की कोशिश की है। पाकिस्तान इस बात का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है की नियंत्रण रेखा के पार भारत और पाकिस्तान के बीच लड़ाई पारंपरिक युद्ध नहीं है क्योंकि दुनिया इसे अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) के रूप में मान्यता नहीं देती है।
पाकिस्तान के तीन लक्ष्य
फिलहाल पाकिस्तान एलओसी उल्लंघनों के पीछे तीन लक्ष्य लेकर चल रहा है। पहला उद्देश्य भारतीय सेना की एक बड़ी ताकत को एलओसी से बांधना और भारत द्वारा किसी भी आश्चर्यजनक हमले से बचना है। दूसरा मकसद युद्ध जैसी स्थिति का फायदा उठाकर एलओसी के रास्ते भारत में ज्यादा से ज्यादा आतंकियों की घुसपैठ कराना है। तीसरा उद्देश्य पाकिस्तानी जनता को यह बताना है कि पाकिस्तानी सेना में भारत से लड़ने की क्षमता है और उनका समर्थन मिलते रहना चाहिए। पाकिस्तान बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) के माध्यम से हमला करने का धूर्त प्रयास भी करेगा। बैट पाकिस्तानी कमांडो और उच्च प्रशिक्षित आतंकवादियों की एक छोटी टीम है, जो एलओसी पर स्थित भारतीय चौकियों पर अचानक हमले करती है।
एक और हार नहीं चाहेगा पाकिस्तान
मौजूदा परिदृश्य में, पाकिस्तान का उद्देश्य हर कीमत पर भारत के साथ पारंपरिक युद्ध से बचना होगा। भारत पारंपरिक युद्ध क्षेत्र में पाकिस्तान पर बहुत अधिक बढ़त रखता है और इस प्रकार पाकिस्तान 1971 के युद्ध की तरह एक और हार नहीं चाहेगा। पाकिस्तान भारत से एक बड़े प्रतिशोध की उम्मीद करता है और चाहेगा कि भारत इसे पारंपरिक युद्ध की दहलीज से नीचे रखे। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के पास चार दिनों से अधिक समय तक भारत के साथ पारंपरिक युद्ध लड़ने के लिए गोला-बारूद नहीं है। अपनी इन सीमाओं को ध्यान में रखते हुए, पाकिस्तान भारत के साथ अपनी कार्यवाही को एलओसी तक सीमित रखना चाहेगा।
भारत ने दिया करारा जवाब
यहाँ बताना चाहूँगा की भारत ने पाकिस्तान द्वारा एलओसी उल्लंघनों का अधिक आक्रामक जवाब दिया है। भारतीय सेना सजग है और एलओसी पर अधिक करारा जवाब दे रही है। देशवासियों को भारतीय सेना की आक्रामक क्षमता का पता है। सही समय पर त्वरित और माकूल जवाब पाकिस्तान को दिया जा रहा है। एलओसी पर पाकिस्तान की तुलना में भारतीय सेना के पास कहीं बेहतर हथियार और उपकरण हैं। अब तक, पाकिस्तान द्वारा उल्लंघन बड़े पैमाने पर छोटे हथियारों और स्वचालित हथियारों से किया गया है। एलओसी के भारतीय हिस्से में किलेबंद और मजबूत बंकर हैं। सच कहूं तो पाकिस्तान की इस तरह की गोलीबारी से हमारी रक्षा प्रणाली को कोई नुकसान नहीं हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने युद्ध की तैयारी में 22 अप्रैल से 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं। यह स्पष्ट रूप से पाकिस्तान में भय को इंगित करता है।
सरकार पर तुरंत कार्रवाई का दबाव न बनाएं
कुछ राजनीतिक पार्टियां मोदी सरकार पर तुरंत जवाबी कार्यवाही का दवाब बना रहे हैं। सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से यह बहुत गलत है। ऐसी जल्दबाजी सेनाओं पर अतिरिक्त दवाब बनाती हैं। यह समय रणनीतिक धैर्य और पूरी तैयारी से पाकिस्तान को सबक सिखाने का है। निर्णायक कार्यवाही से पहले युद्ध के सभी पहलुओं पर विचार करना होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एक सुलझे हुए नेता के तौर पर सभी से मिल रहे हैं। जमीन पर भी पुख्ता तैयारी हो रही है। भारतीय सेना को अब सक्रिय रूप से एलओसी के पार आतंकी नेटवर्क को नष्ट करना है। पाकिस्तान की ओर से बहुत झूठा प्रचार किया जाएगा। हम भारतीयों को झूठ के प्रपंच को समझना होगा और अपना मनोबल बना कर रखना होगा।
भारतीय मीडिया दे ध्यान
अधिकांश भारतीय मीडिया 2014 से पहले वाली पुरानी भाषा में पाकिस्तान द्वारा एलओसी पर संघर्ष विराम उल्लंघन की रिपोर्ट कर रहा है। भारत ने स्पष्ट रूप से आतंकवाद के प्रति कार्रवाई में शून्य सहिष्णुता ( Zero Tolerance towards Terrorism) का प्रदर्शन किया है। एलओसी के पार पाकिस्तान को कोई बड़ी कामयाबी हासिल नहीं हो पाई है। 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद भी एलओसी के पार पाकिस्तान के प्रयासों को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिया था। इस प्रकार, भारतीय सेना एलओसी पर जरूरत के मुताबिक आक्रामक रवैया अपनाती है।
आम भारतीय नागरिकों के लाभ के लिए, हमारा मीडिया पाकिस्तान द्वारा एलओसी उल्लंघनों को अधिक सही ढंग से रिपोर्ट कर सकता है। कुछ उदाहरण से इसे समझाने की कोशिश करूंगा। रिपोर्ट का एक तरीका यह हो सकता है कि ‘पुंछ और नौशेरा सेक्टर में एलओसी पर पाकिस्तान की कोशिश बुरी तरह नाकाम ‘ या ‘भारतीय सेना ने सुंदरबनी सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की एक और कोशिश नाकाम कर दी’। भारतीय सेना के आक्रामक इरादे को ‘पाकिस्तान द्वारा एलओसी उल्लंघन के जवाब में भारतीय सेना द्वारा पांच पाकिस्तानी बंकरों को बर्बाद किया’ के माध्यम से बताया जा सकता है। मीडिया की इन सुर्खियों को आम भारतीयों की आशंकाओं को दूर करने में सक्षम होना चाहिए।
पाकिस्तान को सही समय पर पराजित करना भारत का राष्ट्र धर्म
चाणक्य से विरासत में मिली गहरी सभ्यतागत जड़ों और रणनीतिक संस्कृति वाले एक महान राष्ट्र के रूप में, भारत को धैर्य और दृढ़ता का प्रदर्शन करना होगा। युद्ध में कोई उपविजेता नहीं होता है और पाकिस्तान की शक्ति संरचना को सही समय पर पराजित करना भारत का राष्ट्र धर्म है। भारत इस समय एलओसी पर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को बर्बाद करने में पूरी तरह सक्षम है। रणनीतिक धैर्य, ठोस नेतृत्व और उच्चतम संकल्प के साथ एकजुट भारत पाकिस्तान को आसानी से पराजित कर सकता है। ऐसी ही भावना के साथ इस समय 140 करोड़ भारतीयों को एकजुट रहकर पाकिस्तान को परास्त करना है। जय भारत
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