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‘महाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा प्रबंधन’

‘सफलता के सिपाही’ सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी, आर्थिक सलाहकार प्रो. केवी राजू और प्रमुख सचिव नगर अमृत अभिजात ने अपने विचार रखे

Written byPanchjanyaPanchjanya
Mar 19, 2025, 02:09 pm IST
in विश्लेषण, उत्तर प्रदेश, धर्म-संस्कृति
कार्यक्रम के मंच पर (बाएं से) प्रो. केवी राजू , अवनीश कुमार अवस्थी एवं अमृत अभिजात

कार्यक्रम के मंच पर (बाएं से) प्रो. केवी राजू , अवनीश कुमार अवस्थी एवं अमृत अभिजात

अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि कुंभ से प्रत्येक भारतीय के मन में एक अनोखी जागृति आई है। यह जागृति सबसे उत्कृष्ट और आध्यात्मिक शक्ति से परे है। बहुत से लोगों ने कहा कि वे 2001 से कुंभ में जा रहे हैं, लेकिन महाकुंभ 2025 का जो स्वरूप और भव्यता है, वह दुनिया में कहीं नहीं देखी गई। मेले में अलग—अलग विचारधाराओं के लोगों ने भाग लिया और इससे लाभान्वित हुए हैं। प्रधानमंत्री जी ने 2047 तक विकसित भारत का जो लक्ष्य दिया है, महाकुंभ का आयोजन उस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है।

हम पूरी दुनिया को दिखा सकते हैं कि इतना बड़ा आयोजन कहीं भी, किसी भी देश में पहले कभी नहीं हुआ। मैंने 1989 में कुंभ में भाग लिया था जब मैं वहां सदर क्षेत्र का उप-मंडल अधिकारी था। उस समय हम लोग घोड़ों पर निकलते थे और व्यवस्थाएं बहुत सीमित होती थीं। उसके बाद दो कुंभ में हमने बिजली की व्यवस्था की। 2019 का कुंभ बहुत महत्वपूर्ण था। जब पहली बार माननीय मुख्यमंत्री जी ने इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने की घोषणा की तो हम वहां मौजूद थे। कुंभ केवल प्रयाग में नहीं हुआ, काशी धाम में भी कुंभ हुआ, अयोध्या में भी कुंभ हुआ। आस्ट्रेलिया से एक फोटोग्राफर आए थे, उन्होंने मुझे बताया कि हमने कुंभ को इतना साफ कभी नहीं देखा था। महाकुंभ में भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिली, पूरे विश्व में किसी भी कार्यक्रम में इतना भोजन नहीं बना होगा जितना एक दिन में महाकुंभ में पकाया गया और उसे बड़े प्रेम से लोगों को परोसा गया।

‘नहीं दिखा भेदभाव’

अमृत अभिजात ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने जब महाकुंभ मेले की पहली बैठक की थी, उस समय ही यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि पुलिस और प्रशासन के लोगों के व्यवहार में परिवर्तन आना चाहिए। श्रद्धालु जब मेले में आएं तो पुलिस और प्रशासन के लोग स्वागत भाव से व्यवहार करें। मैं बताना चाहूंगा कि देश और विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए लोगों ने पुलिस और प्रशासन ही नहीं, प्रयागराज के लोगों के व्यवहार की अत्यंत प्रशंसा की।

हम लोग यह उम्मीद कर रहे थे कि 42 से 45 करोड़ लोग मेले में आएंगे। वर्ष 2019 के कुंभ मेले में 25 करोड़ लोग आए थे, लेकिन 2025 का महाकुंभ संपन्न होते-होते यह संख्या 66 करोड़ के पार चली गई। इस मेले का आयोजन कराने के लिए कुल 15 हजार करोड़ रुपए की धनराशि आवंटित की गई थी। इसमें करीब साढ़े 7 हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने और 7 हजार करोड़ रुपये प्रदेश सरकार की तरफ से आवंटित किए गए। 566 प्रोजेक्ट पर काम किया गया। 21 विभागों ने पूरी लगन और तन्मयता के साथ मेला संपन्न कराने में अपना योगदान दिया। 183 देशों से लोग प्रयागराज में डुबकी लगाने के लिए आए।

वर्ष 2006 में, मैं प्रयागराज का जिलाधिकारी था। तब अक्सर आलोचना सुनता था कि फंड तो आता है। उस फंड से गंगा के घाट पर अस्थाई निर्माण किया जाता है और वह अस्थाई निर्माण गंगा जी के साथ ही बाढ़ में बह जाता है। इस बार हम लोगों ने कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा स्थाई निर्माण किया जाए। आवंटित धनराशि में से 75% धनराशि स्थाई निर्माण के लिए खर्च की गई है। हमारी कोशिश है कि पर्यटन के माध्यम से इसको इस तरफ आगे बढ़ाया जाए ताकि यहां प्रत्येक वर्ष भारी संख्या में लोग प्रतिभाग करें।

जिस तरीके से हमारी टेंट सिटी लोकप्रिय हुई है, उसे देख कर ऐसा लगता है कि अलग माहौल बन सकता है क्योंकि अयोध्या में विकास अब हो चुका है। अब प्रयागराज को वह स्थान मिले जिसका कि वह हकदार है। प्रयागराज, चित्रकूट, काशी और अयोध्या एक नए सर्किट के तौर पर उभर कर हमारे सामने आए हैं। महाकुंभ की वजह से हम लोगों ने देखा कि प्रयागराज में जो श्रद्धालु स्नान करने आए थे— वे काशी और अयोध्या और चित्रकूट भी दर्शनों को गए। मैंने मेला क्षेत्र में किसी भी भाषा, प्रांत या अन्य प्रकार का भेदभाव नहीं देखा। ऐसी आस्था का कोई सानी नहीं है ।

आर्थिक स्थिति सुधरी, समृद्धि आई

इस सत्र में प्रो. केवी राजू ने कहा कि अभी तक के जो महाकुंभ और कुंभ आयोजित हुए हैं उनकी अपेक्षा इस बार के महाकुंभ में तकनीक की बहुत बड़ी भूमिका रही है। तकनीक के माध्यम से ही इस बार के महाकुंभ को दिव्य, भव्य और डिजिटल महाकुंभ बनाया जा सका। सभी विभागों ने बहुत ही कुशलता के साथ इस मेले को संपन्न कराया। प्रयागराज जनपद के आसपास के सभी गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ा गया है। ये सभी सड़कें बहुत अच्छे ढंग से बनी हुई हैं। यही कारण है कि महाकुंभ में आए हुए लाखों लोगों ने गांवों में ‘होम स्टे’ किया। गांवों से मेला क्षेत्र और शहर तक आवागमन की सुविधा बहुत अच्छी थी।

गांवों में भी स्वच्छता और सफाई की बहुत ही सुंदर व्यवस्था देखने को मिली। प्रयागराज जनपद के आसपास के जनपदों जैसे मिर्जापुर, चंदौली और जौनपुर आदि में भी लाखों लोगों ने ‘होम स्टे’ किया। इसके चलते लाखों लोगों की आय में वृद्धि हुई। हालांकि ‘होम स्टे’ के माध्यम से होने वाली आय पर राज्य सरकार को कोई आयकर नहीं मिलता। जीएसटी भी नहीं मिलता है। नविकों ने जो कमाई की उस पर भी कोई आयकर नहीं मिलता और न ही कोई जीएसटी मिलता है। सभी लोगों को बड़े पैमाने पर आय हुई। यह मैं कोई शिकायत करने के लिए नहीं कह रहा हूं। अच्छी बात है कि लोगों को आय हुई।

यह अनौपचारिक अर्थव्यवस्था है। लोग तो इससे समृद्ध हुए ही हैं। उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी। सुख संपन्नता आई। ऐसा अध्ययन है कि जब कहीं किसी तरह का बड़ा आयोजन होता है तो उस क्षेत्र के 100 से 150 किलोमीटर के दायरे में लोग लाभ कमाते हैं। इस बार प्रयागराज जनपद के आसपास के जनपदों में लोगों को महाकुंभ आयोजन के चलते आय प्राप्त हुई। महाकुंभ मेला, दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। महाकुंभ के अवसर पर बहुत से लोग मिलते हैं। बहुत से परिवार आपस में बहुत वर्षों बाद मिलते हैं। यह मानवता का बहुत बड़ा मेला है। हालांकि मेला अब खत्म चुका है, लेकिन मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अच्छे प्रयासों और सुव्यवस्था के कारण लोग इतनी भारी संख्या में प्रयागराज पहुंचकर कुंभ स्नान कर सके।

Topics: महाकुंभMaha Kumbhमहाकुंभ विश्व का सबसे बड़ा प्रबंधनभारतीय के मन में एक अनोखी जागृतMaha Kumbh is the world's largest managementa unique awakening in the minds of Indiansdevelopment in Ayodhyaमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथChief Minister Yogi Adityanathअयोध्या में विकासपाञ्चजन्य विशेष
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