भारत के पावन भूमि में उत्तर प्रदेश नामक प्रदेश में प्रयाग एक पावन भूमि है। भारत हिंदुओं की भूमि है। प्रयागराज इस पवित्र भूमि पर सबसे पवित्र तीर्थ स्थानों में से एक माना जाता है। यहां तीन नदियों – पवित्र गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। कुंभ का आयोजन हर वर्ष होता है और महाकुंभ का आयोजन हर 12 वर्ष में होता है। प्रयागराज का अर्थ इस प्रथम यज्ञ के प्र और याग शब्दों से लिया गया है। भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का पहला यज्ञ जिस स्थान पर किया था, उसका नाम प्रयाग पड़ा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महाकुम्भ 2025 का आयोजन बड़ी सफलता के साथ किया गया है।
पुलिस विभाग की एक स्वतंत्र इकाई बड़ी तत्परता से काम कर रही है। महाकुंभ में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए थे। यहां आने वाले श्रद्धालु नदी में स्नान करके अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं।
प्रयाग दिव्यता, आनन्द और भक्तिमय वातावरण से परिपूर्ण था। हमारे देश के साधु-संत बड़ी संख्या में उपस्थित थे, महाकुंभ देश की मानव संस्कृति और सभ्यता की धरोहर है। सनातनी परिवार की नींव प्रयागराज से शुरू होती है।
मैं भी भाग्यशाली हूं कि मुझे छात्रावास से 2025 में प्रयागराज जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। प्रयागराज पहुंचने तक मेरे मन में कई सवाल थे लेकिन वहां जाकर मेरे सारे सवाल खत्म हो गए। जैसे ही मैंने पवित्र भूमि पर पैर रखा, ऐसा लगा जैसे मेरे सारे सपने सच हो गए हों।
आज मेरी राय में समस्त युवाओं को अपनी संस्कृति और सभ्यता का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। हमारी भारत भूमि की संस्कृति पूरे देश में दिखे, यह हम युवाओं की जिम्मेदारी है। प्रयागराज में सभी व्यवस्थाएं बहुत अच्छी तरह से की गई थीं।
जब मैं प्रयागराज से वापस आया तो मेरा मन बहुत शांत हो गया और महाकुंभ के दर्शन ने ही मेरे भविष्य के लिए स्थिरता प्रदान की है। मैं छात्रावास के सभी वरिष्ठ गुरुजी भाइयों का आदरपूर्वक आभारी हूँ। उन्होंने मुझे महाकुंभ का सुंदर अनुभव कराया है। आइये हम सब मिलकर अपने देश की संस्कृति का हिस्सा बनें। युवाओं को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा।

















