राष्ट्रीय विज्ञान दिवस विशेष: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति की नई उड़ान
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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस विशेष: विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारत की प्रगति की नई उड़ान

प्राचीन काल से ही भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अग्रणी रहा है। महर्षि अगस्त्य, महर्षि सुश्रुत, महर्षि कणाद, महर्षि नागार्जुन, ऋर्षि बोधायन, आचार्य चरक, आचार्य भास्कराचार्य, आचार्य पतंजलि, आचार्य पाणिनी, गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त, आर्यभट्ट इत्यादि ऐसे अनेक महान आविष्कारक हुए हैं।

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल
Feb 28, 2025, 10:04 am IST
inविश्लेषण, विज्ञान और तकनीक
National Science Day

प्रतीकात्मक तस्वीर

भारत में हर साल 28 फरवरी को ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ मनाया जाता है, जो भारतीय भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट रमन द्वारा 1928 में ‘रमन प्रभाव’ की खोज को समर्पित है। इसी खोज के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वैसे भारत में विज्ञान का इतिहास बहुत पुराना है। प्राचीन काल से ही भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अग्रणी रहा है और गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा तथा धातु विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यताओं में धातु विज्ञान, वस्त्र निर्माण, भवन निर्माण और परिवहन व्यवस्था का विकास हुआ था।

महर्षि अगस्त्य, महर्षि सुश्रुत, महर्षि कणाद, महर्षि नागार्जुन, ऋर्षि बोधायन, आचार्य चरक, आचार्य भास्कराचार्य, आचार्य पतंजलि, आचार्य पाणिनी, गणितज्ञ ब्रह्मगुप्त, आर्यभट्ट इत्यादि ऐसे अनेक महान आविष्कारक हुए हैं, जिनकी उपलब्धियों ने ही आधुनिक विज्ञान की नींव रखी। महर्षि सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा की नींव रखी, जिन्हें ‘सर्जरी के जनक’ के रूप में जाना जाता है। नागार्जुन ने रसायन और धातु विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रकार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। भारत के अनेक वैज्ञानिकों ने दुनिया को अनेक महत्वपूर्ण खोजें दी हैं। इनमें रमन प्रभाव की खोज के लिए सर चंद्रशेखर वेंकट रमन, मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में योगदान के लिए डा. एपीजे अब्दुल कलाम, आनुवंशिक कोड की खोज के लिए डा. हरगोविंद खुराना, सितारों की संरचना और विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए डा. सुब्रमण्यन चंद्रशेखर, हरित क्रांति के जनक डा. एम.एस. स्वामीनाथन, भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डा. विक्रम साराभाई इत्यादि के नाम प्रमुख हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बढ़ती आत्मनिर्भरता

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है, जो देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिणाम है। विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिक उपलब्धियों ने न केवल देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सशक्त किया है बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की स्थिति को मजबूत किया है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। 1948 में परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना हुई, जिससे परमाणु अनुसंधान को प्रोत्साहन मिला। 1960 के दशक में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना हुई, जिसने अंतरिक्ष अनुसंधान में देश को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाया। 1974 में पोखरण में पहले परमाणु परीक्षण ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को विश्व पटल पर स्थापित किया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक भारत में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। भारत सरकार ने वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास के लिए कई संस्थानों और संगठनों की स्थापना की है। हाल के वर्षों में भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

अंतरिक्ष अनुसंधान

अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत ने महत्वपूर्ण मील के पत्थर स्थापित किए हैं। हमारी अंतरिक्ष एजेंसी ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ (इसरो) ने कई सफल उपग्रह प्रक्षेपण कर पूरी दुनिया में धाक जमाई हैं, इन महत्वपूर्ण मिशनों में चंद्रयान और मंगलयान मिशन शामिल हैं। 1975 में ‘आर्यभट्ट’ उपग्रह के प्रक्षेपण से शुरुआत करते हुए भारत ने 2008 में ‘चंद्रयान-1’ और 2014 में ‘मंगलयान’ जैसे मिशनों के माध्यम से अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। चंद्रयान-3 ने तो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करके इतिहास रच दिया था। 2017 में इसरो ने एक साथ एक ही रॉकेट से 104 उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था। भारत गगनयान मिशन की भी घोषणा कर चुका है, जिसका उद्देश्य मानव को अंतरिक्ष में भेजना है। भविष्य में भारत मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के अलावा अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना करने की भी योजना बना रहा है।

सूचना एवं संचार क्षेत्र

21वीं सदी को ‘सूचना युग’ कहा जाता है और भारत ने इस क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, वाई-फाई, 5जी तकनीक, सुपर कंप्यूटर और क्वांटम कंप्यूटिंग में भारत ने अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। इन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से देश ने ई-प्रशासन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई-लर्निंग और मौसम पूर्वानुमान में उत्कृष्टता प्राप्त की है। डिजिटल इंडिया मिशन के माध्यम से भारत ने डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के विकास ने रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है और भारत का आईटी सेक्टर वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है।

चिकित्सा क्षेत्र

चिकित्सा के क्षेत्र में भी भारत ने निरंतर महत्वपूर्ण प्रगति की है। शल्य चिकित्सा और मनोदैहिक चिकित्सा (साइकोसोमैटिक मेडिसिन) में तो प्राचीन काल से ही भारत का योगदान उल्लेखनीय रहा है। आधुनिक समय में भारत ने कई नई दवाओं और टीकों का विकास किया है और चेचक, हैजा, येलो फीवर, कैंसर और पोलियो जैसी गंभीर बीमारियों के उन्मूलन में बड़ी सफलता हासिल की है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी भारतीय चिकित्सा वैज्ञानिकों ने वैक्सीन विकास और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत का मेडिकल टूरिज्म सेक्टर 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है, जहां अन्य देशों की तुलना में इलाज 65 से 90 प्रतिशत तक सस्ता और गुणवत्तापूर्ण है।

रक्षा क्षेत्र

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने बड़ी तरक्की की है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के माध्यम से भारत ने रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारत ने कई अत्याधुनिक मिसाइलों, विमानों और अन्य रक्षा उपकरणों का विकास किया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुसार, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश है। भारतीय वायु सेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना है, जिसमें राफेल, तेजस, सुखोई, मिग-29 और मिग-21 जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं। थल सेना की ताकत के मामले में, ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में भारत चौथे स्थान पर है। नौसेना के क्षेत्र में, भारत दक्षिण एशिया के सबसे शक्तिशाली नौसेना बलों में से एक है। रक्षा मंत्रालय ने ‘अग्निपथ’ योजना जैसी पहल के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारत ने न केवल कई परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण किया है बल्कि परमाणु हथियारों का भी सफल परीक्षण किया है।

कृषि क्षेत्र

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग से इस क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। भारत ने हरित क्रांति के माध्यम से खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल की है। नई कृषि तकनीकों और बीजों का विकास किया है। भारत आज खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है और प्रमुख अनाज निर्यातक देशों में से एक है। दुग्ध उत्पादन में भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है, दालों की खेती में भी अग्रणी है और कपास की संकर किस्मों के विकास में भी भारत ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उर्वरक उपयोग में भारत विश्व में चौथे स्थान पर है। परजीवी खेती, फर्टिगेशन, कृत्रिम बीज और अनुवांशिक संवर्धित बीजों के विकास में विज्ञान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश अब जैविक खेती की ओर तेजी से अग्रसर है, जिससे कृषि क्षेत्र में रोजगार की अपार संभावनाएं भी उत्पन्न हो रही हैं।

भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की स्थापना, भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे संस्थानों की स्थापना, प्रधानमंत्री विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद का गठन, राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति (एनएसटीपी) का निर्माण, अटल इनोवेशन मिशन, स्टार्टअप इंडिया मिशन इत्यादि प्रमुख हैं। यदि भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं की बात की जाए तो भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर प्रगति तो कर रहा है और वैश्विक स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान भी बना रहा है लेकिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना है, जिनमें वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास के लिए पर्याप्त धन का अभाव, वैज्ञानिक प्रतिभाओं का पलायन, वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी का अभाव, वैज्ञानिक सोच का अभाव इत्यादि शामिल हैं। हालाकि भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास की अपार संभावनाएं हैं और भारत सरकार तथा भारतीय वैज्ञानिक इन चुनौतियों का सामना करने और भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

(लेखक साढ़े तीन दशक से पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार हैं)

Topics: Space ResearchNational Science DayGreen Revolutionभारत में विज्ञानIndian Space Programmeरमन प्रभावप्राचीन भारतीय वैज्ञानिकअंतरिक्ष अनुसंधानहरित क्रांति‘आत्मनिर्भर भारत’भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रमSelf-reliant IndiaScience in Indiaसूचना प्रौद्योगिकीRaman EffectInformation TechnologyAncient Indian Scientistsराष्ट्रीय विज्ञान दिवस
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