विवाह और ब्रह्मांड के आरंभ की दिव्य रात्रि : महाशिवरात्रि
July 19, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

विवाह और ब्रह्मांड के आरंभ की दिव्य रात्रि : महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि को सृष्टि का आरंभ का होता है, क्योंकि आज के दिन ही प्रकाश स्तंभ लिंग, अग्नि स्तंभ लिंग, उर्जा स्तंभ लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ लिंग से सृष्टि का शुभारंभ होता है। विज्ञान भी इसी सिद्धांत के आलोक में आगे बढ़ता है, फलस्वरूप विश्व के निर्माण की बिग बैंग थ्योरी तथा डमरु से दोलन सिद्धांत अर्थात पल्सेटिंग थ्योरी का जन्म हुआ।

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
Feb 26, 2025, 09:13 am IST
in विश्लेषण, धर्म-संस्कृति
MahaShivratri

प्रतीकात्मक तस्वीर

महाशिवरात्रि महापर्व केवल शिव-पार्वती का विवाह ही नहीं वरन सृष्टि के आरंभ की रात्रि है। अहोरात्र! महाशिवरात्रि! वस्तुतः आदि शक्ति का एकाकार स्वरूप, अर्धनारीश्वर के रूप में अभिव्यक्त, दो स्वरूपों में पृथक-प्रेम-फिर मिलन का संदेश दर्शन है। पुन: एकाकार हो जाना, यही तो जीवन का रहस्य है। यही सत्य है, यही सुंदर है, यही शिव है। इसीलिये सनातन धर्म शाश्वत है।
दुनिया में विविध धर्म हैं, परन्तु शायद ही इनके अधिष्ठाताओं ने नारी शक्ति को अभिव्यक्त किया हो। शक्ति के दो स्वरूपों के मधुर मिलन की रात्रि पर विश्व कल्याण निहित है।वहीं दूसरी ओर जनजातीय अवधारणा – जय सेवा, जय बड़ा देव,जोहार,सेवा जोहार -का मूल-कोयापुनेम अर्थात् मानव धर्म और प्रकृति की शाश्वतता, में निहित है, जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” के रुप में भारतीय संस्कृति में शिरोधार्य है।

विश्व में भारत से ही जनजाति समाज का आरंभ हुआ और उनके हमारे आदि देव एक ही हैं, अर्थात् अद्वैत है। हमारा मूल एक ही है,बड़ा देव ही महादेव हैं, इसलिए विघटनकारी तत्वों की बाँटने की कोशिश सफलीभूत नहीं होगी। “शम्भू महादेव दूसरे शब्दों में शम्भू शेक के आलोक में महादेव की 88 पीढ़ियों का उल्लेख मिलता है – प्रथम-शंभू-मूला, द्वितीय-शंभू-गौरा और अंतिम शंभू-पार्वती ही हैं”। शंभू मादाव का अपभ्रंश – महादेव ही है।

महाशिवरात्रि को सृष्टि का आरंभ का होता है, क्योंकि आज के दिन ही प्रकाश स्तंभ लिंग, अग्नि स्तंभ लिंग, उर्जा स्तंभ लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ लिंग से सृष्टि का शुभारंभ होता है। विज्ञान भी इसी सिद्धांत के आलोक में आगे बढ़ता है, फलस्वरूप विश्व के निर्माण की बिग बैंग थ्योरी तथा डमरु से दोलन सिद्धांत अर्थात पल्सेटिंग थ्योरी का जन्म हुआ।

शिव ही सृष्टि है, शिव में ही सृष्टि है! ऋग्वेद की सृष्टि के सृजन के रहस्य का विकास शिव में ही निहित हो जाता है। “सृष्टि से पहले सत् नहीं था, असत् भी नहीं, अंतरिक्ष भी नहीं था, आकाश भी नहीं, छिपा था क्या कहाँ, किसने देखा था, उस पल तो अगम, अटल जल भी कहाँ था “…सृष्टि का कौन है कर्ता, कर्ता है व अकर्ता, ऊँचे आकाश में रहता, सदा अध्यक्ष बना रहता, वही सचमुच में जानता, या नहीं भी जानता है किसी को नहीं पता, नहीं है पता,… वो था हिरण्यगर्भ सृष्टि से पहले विद्यमान, वही तो सारे भूत जगत का स्वामी महान्, जो है अस्तित्व में धरती आसमान धारण कर, ऐंसे किस देवता की उपासना करें हम हवि देकर… जिस के बल पर तेजोमय है अम्बर, पृथ्वी हरी भरी स्थापित स्थिर, स्वर्ग और सूरज भी स्थिर, गर्भ में अपने अग्नि धारण कर पैदा कर, व्यापा था जल इधर-उधर नीचे ऊपर, जगा चुके वो एकमेव प्राण बनकर किस देवता की उपासना करें हवि देकर,
ओऽम! सृष्टि निर्माता स्वर्ग रचियता पूर्वज रक्षा कर, सत्य धर्म पालक अतुल जल नियामक रक्षा कर, फैली हैं दिशायें बाहू जैंसी उसकी सब में सब पर। ऐसे ही देवता की उपासना करें हम हवि देकर… ऐंसे ही देवता की उपासना करें हम हवि देकर का तात्पर्य वस्तुतः शिव से ही है तब यही था शिवलिंग, यही पिंडी पूजन का निहितार्थ है। यहीं हिरण्यगर्भ से सृष्टि का निर्माण हुआ।
विश्व के निर्माण का मूलाधार शिवलिंग है।

वस्तुतः ॐ वेदों में ब्रह्म के रुप में ब्रह्मांड की ध्वनि का द्योतक होकर अभिव्यक्त है, और अनुसंधान में ॐ की व्युत्पत्ति भगवान् शिव के श्रीमुख हुई है। इसलिए बीज मंत्र “ॐ नमः शिवाय” है।

दो वर्ष पूर्व जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने यह दावा कर विवाद खड़ा कर दिया था कि ‘ओम् और अल्लाह एक ही हैं’। अब ॐ और अल्लाह की तुलना कर एक बताना मदनी के मानसिक दिवालियापन और अज्ञानता का द्योतक था , क्योंकि सनातन धर्म अनादि है और इस्लाम मजहब तकरीबन 1500 वर्ष पूर्व ही अस्तित्व में आया है। शब्दों के अर्थ नितांत विपरीत हैं इसलिए एक होने का प्रश्न ही नहीं उठता है। अल्लाह शब्द अल + इलाह शब्दों से बना है। इलाह शब्द का अर्थ सेमेटिक भाषाओं में और इब्रानी भाषा और पवित्र ग्रन्थों में भी देखा जा सकता है, जिस का अर्थ स्थूल रूप से “पूज्य या‌ उपास्य” है अल्लाह का मतलब होता है कि इसके सिवा कोई इबादत के लायक नहीं। इसलिए अल्लाह और इस्लाम की अवधारणा एकनिष्ठ है, जबकि ॐ के आलोक में सनातन धर्म की अवधारणा सर्वसमावेशी है। अतः तुलना किसी भी तरह नहीं की जा सकती है।

ॐ शब्द, अल्लाह शब्द से भिन्न अर्थ में होकर सर्वव्यापी है। ॐ की ध्वनि स्वयं में शाश्वत है। इसके बिना संपूर्ण ब्रह्मांड अधूरा है। अगर मंत्रोच्चारण करते समय ॐ की ध्वनि उच्चारित न की जाए तो मंत्रोच्चारण अधूरा रहता है। इसका नाद सभी से अलग विशेष है, जब आप ध्यान की चरम अवस्था में पहुंचते हैं, तब आपको ॐ की ध्वनि स्वयं सुनाई देने लगती है। ॐ भगवान शिव का पर्याय है, उनका प्रतीक है, ॐ की ध्वनि शांत भी है और तीव्र भी है। ॐ का महत्व शब्दों में नहीं पिरोया जा सकता है, केवल इसकी अनुभूति की जा सकती है। ओ, उ, और म, तीन अक्षरों से बने ॐ की महिमा अपार है। यह तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु, महेश के साथ तीनों लोकों का भी प्रतीक है। शास्त्रों में ॐ की ध्वनि के सौ से भी अधिक अर्थ विभिन्न संदर्भों में शिरोधार्य है इसलिए ॐ का अर्थ मदनी जैसे तथाकथित विद्वानों की समझ से परे है।

अखंड मंडलाकार बृहद

ब्रम्हांड का आकार शिवलिंग सदृश्य है अतः सम्पूर्ण सृष्टि की आराधना शिव आराधना में समाहित है। “ॐ नमः शिवाय” बीज मंत्र है।
।।ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌॥

—————————————-
(महाशिवरात्रि महापर्व की अनंत कोटि शुभकामनाएं।)
-।

Topics: ब्रम्हांड की उत्पत्तिShivaOrigin of the Universeसनातन धर्मsanatana dharmaशिवMahashivratriमहाशिवरात्रि
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

खटीमा: ईसाई बने थारू जनजाति के 36 लोगों ने सनातन धर्म में की घर वापसी, जनेऊ और कलेवा धारण किया

Jagannath Rath Yatra Significance Darubrahma Puri Temple King Indradyumna

पुरी रथयात्रा विशेष: भारत की सनातन आस्था का महामहोत्सव है जगन्नाथ स्वामी का रथयात्रा उत्सव

असत्य का नहीं होता अस्तित्व6 जुलाई को अयोध्या में आयोजित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की बैठक में उपस्थित सदस्य

असत्य का नहीं होता अस्तित्व

Lucknow Sanatan dharma Ghar wapsi

घर वापसी: लखनऊ में शबनम और हम्जा अली ने अपनाया सनातन धर्म, नाम भी बदले

मुस्लिम युवक ने अपनाया सनातन धर्म

घर वापसी: उज्जैन में सलमान ने छोड़ा इस्लाम; अपनाया सनातन धर्म, बना शांतनु

राधेश्याम शुक्ला

कौन हैं सनातन की साधना करने वाले राधेश्याम शुक्ला, जिनकी प्रेरक कहानी गीता प्रेस ने साझा की

Load More

ताज़ा समाचार

vp cp radhakrishnan releases book rss at 100 ek sadi sankalp ki in delhi

“युवाओं के राष्ट्रीय चरित्र को ढालने वाली आत्मा की कार्यशाला है संघ की शाखा” : उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

Young Thinkers Meet Dehradun RSS Arun Kumar Sangh At 100 Ramesh Pokhriyal Nishank Ram Madhav India Foundation

देहरादून: ‘लेखक गांव’ में राष्ट्रीय युवा विचारक बैठक शुरू, संघ सहसरकार्यवाह अरुण कुमार ने ‘RSS@100’ पर दिया व्याख्यान

Azam Khan

बरकरार रहेगी आजम खान की सजा, अपील खारिज, अफसरों को ‘तनखैया’ बताकर किया था जूते साफ करवाने का ऐलान

RSS Bhayyaji Joshi Udaipur Seva Bharati Natural Health Center Inauguration Website Digital Launch

प्राकृतिक चिकित्सा वैकल्पिक नहीं, बल्कि समानान्तर पद्धति: भय्याजी जोशी

श्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

PM मोदी का AI वीडियो वायरल! 22,000 रुपये लगाकर 25 लाख कमाने का झांसा, PIB Fact Check ने बताया फर्जी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पंजाब में आप सरकार के मर्म पर प्रहार कर चुनावी एजेंडा सेट कर गए PM मोदी

India UK trade deal

Explainer: UK के साथ व्यापार समझौते से भारत को क्या फ़ायदा होगा?

Journalist Alok Goswami passes away

वरिष्ठ पत्रकार आलोक गोस्वामी का निधन, पाञ्चजन्य के अतुलनीय सहयोगी अब हमारे बीच नहीं रहे

खटीमा: ईसाई बने थारू जनजाति के 36 लोगों ने सनातन धर्म में की घर वापसी, जनेऊ और कलेवा धारण किया

अमेजन से मंगवाई हिंदी की पुस्तक, मिली अंग्रेजी की; शिकायत के बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies