सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिलाओं के कल्याण के लिए हैं कानून, पतियों से जबरन वसूली के लिए नहीं
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिलाओं के कल्याण के लिए हैं कानून, पतियों से जबरन वसूली के लिए नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें महिलाओं के भले के लिए बनाए गए कानूनों के दुरुपयोग पर चिंता जताई गई।

Written byMahak SinghMahak Singh
Dec 20, 2024, 11:02 am IST
in भारत
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया, जिसमें महिलाओं के भले के लिए बनाए गए कानूनों के दुरुपयोग पर चिंता जताई गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की कड़ी धाराएं महिलाओं के कल्याण के लिए हैं, न कि उनके पतियों को दंडित करने, धमकाने या उनसे जबरन वसूली करने के उद्देश्य से। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने यह टिप्पणी की, कि हिंदू विवाह एक पवित्र संबंध है, जो परिवार की नींव है और इसे किसी व्यावसायिक समझौते की तरह नहीं देखा जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि महिलाओं के लिए बनाए गए कानूनों का उद्देश्य उनका सुरक्षा और सशक्तिकरण करना है लेकिन कभी-कभी कुछ महिलाएं इन कानूनों का गलत तरीके से इस्तेमाल करती हैं। पीठ ने यह टिप्पणी एक ऐसे दंपत्ति के मामले में की, जो अलग-अलग रह रहे थे और विवाह को खत्म करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और यह सिर्फ महिलाओं के हित में होना चाहिए, न कि उन्हें अपने पतियों से धन ऐंठने का साधन।

इस मामले में, जहां एक अमेरिकी आईटी कंसल्टेंट ने तलाक की मांग की, वहीं पत्नी ने पति से 500 करोड़ रुपये के बराबर गुजारा भत्ता की मांग की थी, जो पति की पहली पत्नी को मिले थे। अदालत ने इस मामले में पति को आदेश दिया कि वह अपनी पत्नी को 12 करोड़ रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता एक महीने के भीतर दे, लेकिन इसके साथ ही यह भी कहा कि महिलाओं को यह समझना होगा कि कानून का उद्देश्य परिवार को बचाना और महिलाओं को सशक्त बनाना है न कि इसे एक लेन-देन का साधन बनाना।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि महिला और उनके परिवार द्वारा आपराधिक शिकायतों का इस्तेमाल पति और उनके परिवार से अपनी मांगों को पूरा करने के लिए गलत तरीके से किया जा सकता है। कोर्ट ने महिलाओं को सतर्क रहने की सलाह दी और कहा कि कड़े कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग किसी भी हालत में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि ये कानून महिलाओं के भले के लिए बनाए गए हैं, न कि किसी अन्य उद्देश्य के लिए।

Topics: महिलाओं के कल्याण के लिए हैं कानूनSupreme Courtसुप्रीम कोर्टIPCalimonyसुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसलाHusband and Wifeपति और पत्नी
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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