'वृक्ष अम्मा' तुलसी गौड़ा का निधन : पर्यावरण संरक्षण की महान योद्धा को प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि
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‘वृक्ष अम्मा’ तुलसी गौड़ा का निधन : पर्यावरण संरक्षण की महान योद्धा को प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि

पर्यावरण संरक्षण की प्रतीक 'वृक्ष अम्मा' तुलसी गौड़ा का निधन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी महान सेवाओं को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। जानिए उनके जीवन और योगदान की कहानी।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Dec 17, 2024, 05:06 pm IST
inश्रद्धांजलि, जनजातीय नायक

नई दिल्ली । कर्नाटक की प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और पद्मश्री सम्मानित तुलसी गौड़ा का सोमवार को उनके पैतृक निवास होन्नाली गांव (अंकोला तालुक, उत्तर कन्नड़ जिला) में निधन हो गया। 86 वर्षीय तुलसी गौड़ा लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थीं। उनके निधन की खबर से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुलसी गौड़ा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा-

“कर्नाटक की प्रतिष्ठित पर्यावरणविद् और पद्मश्री से सम्मानित तुलसी गौड़ा के निधन से अत्यंत दुःख हुआ। उन्होंने अपना जीवन प्रकृति के पोषण, हज़ारों पौधे लगाने और हमारे पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए समर्पित कर दिया। वे पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मार्गदर्शक बनी रहेंगी। उनका काम हमारी धरती की रक्षा के लिए पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं।”

‘वृक्ष अम्मा’ का जीवन परिचय

तुलसी गौड़ा को सम्मानपूर्वक ‘वृक्ष अम्मा’ (पेड़ों की मां) के नाम से जाना जाता था। उन्होंने अपना पूरा जीवन पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण के लिए समर्पित किया। तुलसी गौड़ा का जन्म कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में एक वनवासी परिवार में हुआ था। गरीबी और कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने प्रकृति के प्रति अपने गहरे प्रेम को कभी कम नहीं होने दिया।

तुलसी गौड़ा ने करीब 30,000 से अधिक पौधे लगाए और उनका संरक्षण किया। उन्हें पौधों और पेड़ों की हजारों प्रजातियों का गहन ज्ञान था, जिसे उन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त किए बिना ही अर्जित किया। उनकी विशेषता थी कि वे बीजों की पहचान और उनके सही प्रकार से रोपण में माहिर थीं।

सम्मान और उपलब्धियां

तुलसी गौड़ा के अथक प्रयासों को देखते हुए उन्हें वर्ष 2020 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उनके पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए अतुलनीय योगदान का प्रतीक था। उनका योगदान स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सराहा गया। वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके समर्पण के कारण वे कई सामाजिक और पर्यावरण संगठनों से भी जुड़ी रहीं। तुलसी गौड़ा ने अपने ज्ञान और अनुभव को आगे की पीढ़ियों को हस्तांतरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रकृति प्रेम और प्रेरणा

तुलसी गौड़ा का जीवन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं। उनकी सादगी, मेहनत और दृढ़ संकल्प ने उन्हें ‘पर्यावरण की सच्ची संरक्षक’ बना दिया। उन्होंने यह दिखाया कि संसाधनों की कमी भी एक व्यक्ति के दृढ़ निश्चय को नहीं रोक सकती।

अंतिम विदाई और श्रद्धांजलि

तुलसी गौड़ा का अंतिम संस्कार उनके गांव होन्नाली में किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में उनके परिवारजन, प्रशंसक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। उनके निधन से कर्नाटक समेत पूरे देश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति काम करने वाले लोगों में शोक व्याप्त है।

तुलसी गौड़ा का निधन पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी क्षति है। उनका जीवन, उनके कार्य और उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा। उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा, और उनके द्वारा लगाए गए हजारों पेड़ उनकी स्मृति को सदैव जीवित रखेंगे।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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