उत्तराखंड: पहले सरकारी भूमि पर कब्जा, फिर उसे वक्फ बोर्ड में दर्ज कर दो, इस प्रकार दोगुनी हो गई वक्फ बोर्ड की संपत्ति
August 15, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

उत्तराखंड: पहले सरकारी भूमि पर कब्जा, फिर उसे वक्फ बोर्ड में दर्ज कर दो, इस प्रकार दोगुनी हो गई वक्फ बोर्ड की संपत्ति

मस्जिद, मदरसे कब्रस्तान सुदूर पहाड़ी जिलों में वक्फ बोर्ड में हो गए रजिस्टर्ड।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Nov 28, 2024, 11:14 am IST
inभारत, उत्तराखंड
Uttarakhand Mosque Waqf board

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में भी वक्फ बोर्ड की संपत्तियां कैसे बन गई ? क्या किसी सोची समझी साजिश के तहत कांग्रेस की सरकार में इन्हें पंजीकृत किया गया ?  ऐसा जानकारी में आया है कि ज्यादातर मामलों में सरकारी भूमि पर कब्जा कर मस्जिद, मदरसे, ईदगाह कब्रस्तान बनाए गए और फिर उन्हें वक्फ बोर्ड में पंजीकृत कर दिया गया। जिसके बाद से इन संपत्तियों को किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने खाली करवाने अथवा अपने कब्जे में लेने का साहस नहीं जुटाया।

उल्लेखनीय है देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी के साथ-साथ वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में भी अप्रत्याशित वृद्धि हो गई है। जो कि इस बात का सबूत है कि राज्य में बढ़ती मुस्लिम आबादी भविष्य में राजनीतिक सामाजिक समस्या पैदा करने जा रही है। अभी ये वक्फ बोर्ड के आंकड़े हैं, इनके अलावा भी सैकड़ों संपत्तियां ऐसी भी हैं जो कि सरकारी जमीनों पर कब्जा कर बनाई हुई हैं और उनका जिक्र वक्फ बोर्ड की सूची में किया गया है।

इसे भी पढ़ें: उत्तरकाशी मस्जिद विवाद : मस्जिद इंतजामिया कमेटी नहीं दिखा पा रही मूल दस्तावेज, भू-दस्तावेजों में हेर-फेर की आशंका

देवभूमि उत्तराखंड के सनातन क्षेत्र में 5 हजार से अधिक वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का जिक्र सामने आया है। जानकारी के अनुसार उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने केंद्रीय वक्फ बोर्ड के सम्मुख राज्य में 5183 संपत्तियों का ब्यौरा प्रेषित किया है, इसके अलावा 205 संपत्तियों के मामले स्थानीय न्यायालय में विचाराधीन होने की बात भी कही जा रही है। कहा जा रहा है जब से धामी सरकार आई है उसके बाद दर्जनों ऐसे अवैध कब्जे हैं जिनमें मजार, मदरसे आदि धार्मिक संरचनाएं शामिल हैं, जो कि सरकारी भूमि पर है और कब्जेदारों को इन्हें खाली करवाने का भय सता रहा है। इसलिए कई फाइलें वक्फबोर्ड में पंजीकरण के लिए विचाराधीन हैं। ये बेशकीमती जमीनों पर अवैध कब्जे हैं। हल्द्वानी बनभूलपुरा, नैनीताल, भवाली, उधम सिंह नगर, कोटद्वार, देहरादून, हरिद्वार रुड़की क्षेत्र की कई ऐसे सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे हैं, जिन्हे कांग्रेस शासनकाल में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में सूचीबद्ध किया गया था।

राज्य की वनभूमि में बहुत सी मजारे ऐसी हैं जो कि पिछले पंद्रह साल में बनाई गई और उन्हें वक्फ संपत्ति बताया गया जैसे कालसी वन प्रभाग में भूरे शाह की मजार, भूरे शाह नाम की कई फ्रेंचाइजी मजारें धामी सरकार ध्वस्त कर चुकी है। ऐसे ही कालू सैय्यद की एक फ्रेंचाइजी मजार अल्मोड़ा और नैनीताल जिले में है। ऐसे दर्जनों मजारे हैं जो कि वक्फ बोर्ड में दर्ज करवाई गई है।

वन विभाग ने अपनी भूमि पांच सौ से अधिक अवैध कब्जे जो कि फर्जी मजारें थी, उन्हें पिछले साल में एक अभियान में हटाया था। ये मजारे एक दिन वक्फबोर्ड में दर्ज हो जानी थी। ऐसे ही पावन गंगा नगरी ऋषिकेश के ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के घर आंगन में बनी मजारें भी एक दिन वक्फ बोर्ड में शामिल हो जानी थी। कहा जा रहा है कि सनातन नगरी हरिद्वार कुंभ क्षेत्र की मजारें भी इसी योजना का हिस्सा है। इस षडयंत्र का हिस्सा है।

21 साल में हो गई दो गुनी संपत्तियां

मिली जानकारी के अनुसार, जब 2003 में उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का गठन हुआ था तब 2078 संपत्तियों की जानकारी आई थी। ये संपत्तियां यूपी वक्फ बोर्ड से उत्तराखंड वक्फ बोर्ड को विरासत में मिली थी। इनमें से 450 फाइल्स यूपी से उत्तराखंड में नही पहुंची।

देवभूमि में कहां-कहां है वक्फ बोर्ड की संपत्तियां

जानकारी ये है कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति सूची में मस्जिद से अधिक कब्रस्तानों की संख्या है। पहाड़ी जिलों में चमोली में 1, रुद्रप्रयाग में 1 टिहरी में 4, पौड़ी में 10, उत्तरकाशी में 1, बागेश्वर में 3, चंपावत में 6,अल्मोड़ा में 6 पिथौरागढ़ में 3 मस्जिदें और इनसे ज्यादा कब्रिस्तान होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा नैनीताल जिले में 48 मस्जिदें, उधम सिंह नगर में 144, हरिद्वार जिले में 322, देहरादून जिले में 155 मस्जिदें है जो कि वक्फ बोर्ड में पंजीकृत हुई हैं। सुदूर पहाड़ी जिलों में भी वक्फ बोर्ड की औकाफ ( दान में दी गई ) संपत्तियों की जानकारी सामने आ रही है।

इसे भी पढ़ें: देहरादून के दून अस्पताल की मजार पर सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज, भूमि जांच के लिए कमेटी गठित

उत्तराखंड में 2105 औकाफ़ संपत्तियां है जिनमें अल्मोड़ा जिले में 46 पिथौरागढ़ जिले में 11 पौड़ी में 26 सबसे अधिक हरिद्वार में 865 उधम सिंह नगर में 499 देहरादून में 435 संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का अपना  दावा है। पूरे देवभूमि उत्तराखंड में 773 स्थानों पर कब्रिस्तान बना दिए गए है जबकि 704 मस्जिदों को वक्फ बोर्ड के अधीन बताया गया है। उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की सूची से बाहर अभी इतनी ही और मस्जिदों के और होने की सूचनाएं है।

वक्फ बोर्ड में 100 मदरसे होने की सूचना सामने लाई जा रही है, जबकि मदरसा बोर्ड में सूची में चार सौ से ज्यादा मदरसे दर्ज है। राज्य के भीतर 201 से अधिक मजारें वक्फ बोर्ड में सूची बद्ध होने की जानकारी सामने लाई गई है। बताया जाता है कि यहां अब नमाज भी पढ़ाई जा रही है। जिन्होंने धीरे-धीरे मदरसे फिर मस्जिद का रूप ले लिया है। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में पूरे राज्य में 12 स्कूल और इतने ही मुसाफिरखाने है, सूची में 1024 मकान और 1711 दुकानें भी है। 70 ईद गाह, 32 इम्मामबाड़े, 112 कृषि भूमि प्लाट और अन्य 253 संपत्तियां है। ऐसा भी माना जा रहा है कि वक्फ बोर्ड की कई संपत्तियों पर प्रभावशाली और भू माफिया तत्वों के कब्जे हैं। जिन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।

ऐसी खबरे भी हैं कि देवभूमि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की स्थापना 2003 में हुई थी, तब वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की संख्या 2078 के आसपास बताई गई थी। इनमें से 450 संपत्तियों की फाइलें यूपी से अभी तक उत्तराखंड वक्फ बोर्ड को नहीं दी गई है और ये विषय एक विवाद के रूप में केंद्र सरकार तक पहुंचा हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि देवभूमि उत्तराखंड में पिछले 20 सालों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की संख्या दो गुना से अधिक हो गई है। जो इस बात को प्रमाणित करता है कि देवभूमि उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी में बेतहाशा वृद्धि हुई है। अभी ये आंकड़े ऐसे हैं जो कि वक्फ बोर्ड में दर्ज है। दरअसल बड़ी संख्या में मुस्लिम धार्मिक स्थल, मदरसे अभी ऐसे भी हैं जो कि वक्फ बोर्ड में दर्ज नहीं है और वे सरकारी जमीनों को घेर या अवैध कब्जे कर बनाए गए हैं। वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर भी संशय है कि क्या वो वास्तव में वक्फ बोर्ड की संपत्ति है अथवा उत्तराखंड सरकार की संपत्ति है ?

बहरहाल देवभूमि उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों का तेजी से बढ़ना भी चिंता का विषय है, राज्य में डेमोग्राफी चेंज को लेकर बहस छिड़ी हुई है और वक्फ संपत्तियों के बढ़ रहे आंकड़े भी इसी और संकेत देते हैं कि देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक देव स्वरूप के इस्लामीकरण की साजिश तो नहीं हो रही है ? बेरीनाग, उत्तरकाशी, धारचूला, हाट कालिका पिथौरागढ़ क्षेत्र ने बन रहे इस्लामिक धार्मिक केंद्रों को लेकर स्थानीय लोगों में गुस्सा ऐसे ही नहीं पनप रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है पहले कभी ऐसे धार्मिक स्थल यहां नहीं थे अब देवभूमि में मस्जिद, मदरसे, ईदगाह और मजारें जगह-जगह दिखाई दे रहे हैं।

दर्शन भारती कहते हैं कि उत्तराखंड के देव स्वरूप को हम बिगड़ने नहीं देंगे, सरकारी तंत्र की लापरवाही से मुस्लिम लोग वक्फ बोर्ड का सहारा लेकर सरकार की संपत्तियों पर धार्मिक स्थल बना रहे हैं जिसे सहन नहीं किया जाएगा।

सीएम पुष्कर धामी ने भी कहा है कि किसी भी सूरत में देवभूमि के सनातन स्वरूप से छेड़छाड़ करने की इजाजत, सरकार नहीं देगी। अवैध कब्जे हटाए ही जाएंगे, बेहतर है कि लोग खुद ही अपने कब्जे हटा दें। नहीं तो सख्त कानूनी कारवाई की जाएगी। हम देख और समझ भी रहे हैं कि क्या-क्या और कहां-कहां हो रहा ? हमारा लैंड जिहाद के खिलाफ अभियान जारी है।

 

Topics: वक्फ बोर्डमदरसाMadrasawaqf boardउत्तराखंड अवैध मस्जिदUttarakhand illegal mosqueउत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां हुई दोगुनाwaqf board properties in uttarakhand
Share16
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

कलकत्ता हाईकोर्ट

‘मदरसों में वंदे मातरम् गाने से आसमान नहीं टूट पड़ेगा’: ईसाई स्कूलों का हवाला देते हुए कलकत्ता HC ने की सख्त टिप्पणी

supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मदरसा शिक्षकों को दिया बड़ा झटका, 350 से अधिक की याचिकाएं खारिज की

इलाहाबाद उच्च न्यायालय

उत्तर प्रदेश के 4000 मदरसों में विदेशी फंडिंग की जांच करेगा एटीएस, इलाहाबाद HC ने दिया बड़ा फैसला

Ghaziabad Dasna Madarsa Buldozed

गाजियाबाद: डासना में सरकारी जमीन पर बने अवैध मदरसे पर चला बुलडोजर, कोर्ट ने ठोंका 1.23 करोड़ का जुर्माना

वक्फ संपत्तियों पर एक्शन

उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों पर बड़ा एक्शन, 31 हजार से अधिक का रजिस्ट्रेशन रद

Uttar Pradesh illegal Madarsa fined 10000 rs

धामी सरकार का बड़ा फैसला: मदरसा बोर्ड समाप्त, बनेगा USAME प्राधिकरण

Load More

ताज़ा समाचार

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

स्वतंत्रता संग्राम से सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक: गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रेरक जीवन

वंदे मातरम गायन के दौरान असहज हुईं सोनिया गांधी

क्या पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर असहज हुईं सोनिया गांधी? खरगे के साथ बातचीत का Video वायरल, BJP हमलावर

श्री कृष्णगोपाल जी ने दिल्ली में केशवकुंज में फहराया तिरंगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री कृष्ण गोपाल जी ने केशवकुंज में किया ध्वजारोहण

कोलकाता स्थित संघ कार्यालय में तिरंगा फहराते सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

देश की स्वतंत्रता को सुरक्षित बनाए रखना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी : सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले

नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराते सरसंघचालक श्री मोहन भागवत

स्वतंत्रता दिवस: सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने फहराया तिरंगा, कहा- आजादी की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी

भारत के विभाजन के साथ, पाकिस्तान की स्थापना ने न केवल भौगोलिक विभाजन किया बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा संकट का द्वार भी खोला

भारत विभाजन से हमने क्या सीखा ?

Bharat Bhushan tiwari Fact check

फैक्ट चेक: झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पत्थरबाजी का दावा झूठा

Income Tax filing

Explainer: विदेशी बैंक अकाउंट, प्रॉपर्टी व जेवरात का खुलासा: क्या है छोटे टैक्सपेयर्स के लिए CBDT की नई स्कीम?

लोकसभा में राहुल गांधी

राहुल गांधी लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह से नदारद, भाजपा बोली- ये ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता

Pojk protest

PoJK में पाकिस्तान के अत्याचार के खिलाफ सुधनोटी, हजीरा मंढोल और ब्रुसेल्स में विरोध

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies