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खोखले दावों से दोहन

संसद में वक्फ संशोधन विधेयक के प्रस्तुत होने के बाद वक्फ बोर्ड की शरारत 33 प्रतिशत बढ़ी। अब वह नित नए खोखले दावे कर भयादोहन कर रहा है। हालांकि कुछ स्थानों पर उसे अदालती चपत भी लगी है

Written byअरुण कुमार सिंहअरुण कुमार सिंह
Nov 27, 2024, 10:08 am IST
inकर्नाटक
कर्नाटक वक्फ बोर्ड का दफ्तर

कर्नाटक वक्फ बोर्ड का दफ्तर

इन दिनों वक्फ बोर्ड की मनमानी से पूरे भारत के लोग आक्रोशित हैं। इनमें सबसे ज्यादा आक्रोशित हिंदू हैं और इसके बाद ईसाई। चकित करने वाली बात यह है कि वक्फ बोर्ड से कुछ मुसलमान भी पीड़ित हैं। विशेषकर कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में वक्फ बोर्ड की जबरदस्त मनमानी चल रही है। इसे देखते हुए लोगों ने वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा को लेकर की गई आपत्तियों को देख रही संयुक्त संसदीय समिति (जे.पी.सी.) के पास लाखों आवेदन भेजे हैं, जिनमें वक्फ बोर्ड को ही खत्म करने की मांग की गई है।

बता दें कि संसद में वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक के प्रस्तुत होने के बाद वक्फ बोर्ड कथित रूप से वक्फ की जमीन पर कब्जा करने वालों को ताबड़तोड़ नोटिस भेज रहा है। जे.पी.सी. के अध्यक्ष जगदंबिका पाल के अनुसार, ‘‘वक्फ संशोधन विधेयक प्रस्तुत होने के बाद वक्फ बोर्ड द्वारा किसानों को नोटिस भेजने में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।’’ इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वक्फ बोर्ड किस हद तरह की हरकतें कर रहा है।

इसे कुछ उदाहरणों के साथ समझा जा सकता है। ताजा मामला मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर का है। 18 नवंबर को खबर आई कि वक्फ बोर्ड ने गणेश जी के इस मंदिर पर दावा ठोका है। हालांकि इसकी प्रतिक्रिया तुरंत हुई। मंदिर के कोषाध्यक्ष पवन त्रिपाठी ने कहा, ‘‘सिद्धिविनायक मंदिर केवल मुंबई के लिए ही धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह दुनियाभर के हिंदुओं के लिए श्रद्धा का प्रतीक है, उनके लिए आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह मंदिर मुंबई और महाराष्ट्र का गर्व है, कोई भी बोर्ड मंदिर पर दावा नहीं कर सकता।’’

यह मंदिर 200 वर्ष पहले बना था। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं। वक्फ बोर्ड ऐसे मंदिर की जमीन पर दावा केवल अपने दम पर नहीं कर सकता। लोग मान रहे हैं कि वक्फ बोर्ड का यह दुस्साहस तब से और बढ़ गया है, जब से मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और इंडी गठबंधन के नेताओं के बीच इस बात के लिए समझौता हुआ है कि यदि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इंडी गठबंधन जीतता है, तो वक्फ बोर्ड जिस जमीन पर दावा करेगा, उसे वह दे दी जाएगी। यानी इंडी गठबंधन के नेताओं की मुस्लिम तुष्टीकरण की इस नीति से ही वक्फ बोर्ड की शरारतें बढ़ गई हैं।

इससे पहले वक्फ बोर्ड कर्नाटक में लगातार संपत्तियों पर मनमाने तरीके से दावा करता रहा है। हालांकि हाल ही में उसे न्यायालय से एक झटका लगा है। मामला गडग जिले का है। यहां के कुछ किसानों की जमीन पर वक्फ बोर्ड ने दावा कर दिया था। किसान उसके सामने झुके नहीं और उन्होंने मुकदमा लड़कर अपनी जमीन का मालिकाना अधिकार प्राप्त किया।

बता दें कि वक्फ बोर्ड ने मार्च, 2019 में गडग जिले के 315 किसानों की जमीन पर अपना दावा ठोका था। इसके लिए वक्फ बोर्ड ने वहां के किसानों को एक नोटिस भेज कर कहा था कि जिस जमीन पर वे लोग रह रहे हैं, खेती कर रहे हैं, वह वक्फ बोर्ड की है। इसके बाद किसान परेशान हो गए। उन्होंने यह जानना चाहा कि जिस जमीन पर वे पुरखों के जमाने से खेती करते आए हैं, वह वक्फ बोर्ड की कैसे हो सकती है?

इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए वहां के सभी किसान अगस्त, 2022 में न्यायालय गए। लगभग ढाई वर्ष तक न्यायालय में सुनवाई हुई। इसके बाद न्यायालय ने इन किसानों के पक्ष में निर्णय दिया। हालांकि, अभी भी 201 किसान अदालत के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

इससे पहले भाजपा की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि केवल विजयपुर जिले में ही वक्फ बोर्ड ने 14,210 एकड़ जमीन पर कब्जा कर रखा है। इसके अतिरिक्त राज्य के 53 स्मारकों को भी वक्फ बोर्ड अपना बता चुका है। यही नहीं, बीदर जिले के ऐतिहासिक किले की 17 संपत्ति पर भी वक्फ बोर्ड ने दावा किया है। एक और मामले में वक्फ बोर्ड को न्यायालय से हार मिली है।

बता दें कि 1976 में खुद ही वक्फ बोर्ड ने एक संपत्ति को निजी संपत्ति घोषित किया था। अब वक्फ बोर्ड उसे फिर से वक्फ संपत्ति घोषित करना चाहता है। इस मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय का कहना है कि वक्फ बोर्ड पहले के प्रशासक के निर्णय को केवल एक समिति बनाकर नहीं बदल सकता, उसे वक्फ प्राधिकरण में जाना होगा।

मामला बेंगलुरु का है। वक्फ बोर्ड शाह मोहम्मद रजा अली नामक व्यक्ति की संपत्ति पर कब्जा करना चाहता है। इसके विरुद्ध उसके बेटे जाबिर अली ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। अली की इस संपत्ति को 1965 में वक्फ बोर्ड के तत्कालीन प्रशासक ने वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था। इसके बावजूद यह संपत्ति अली के कब्जे में ही रही। इसको लेकर वक्फ बोर्ड ने 1975 में अली को एक नोटिस भेजा।

फिर जांच हुई और वक्फ बोर्ड ने ही इस संपत्ति को रजा की संपत्ति घोषित कर दिया। यही नहीं, 1977 में वक्फ बोर्ड ने अपनी सूची से इस संपत्ति को हटाने का भी आदेश दे दिया था। लेकिन वक्फ बोर्ड ने अचानक नवंबर, 2020 में रजा अली के बेटे जाबिर अली को अतिक्रमणकारी घोषित कर दिया। वक्फ बोर्ड का कहना है कि गड़बड़ी के कारण जाबिर अली को यह संपत्ति मिली है। इस आरोप से तिलमिलाया जाबिर उच्च न्यायालय पहुंचा। अब उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड से कहा कि वह किसी भी संपत्ति पर मनमानी नहीं कर सकता।

एक मत यह भी है कि कर्नाटक में वक्फ बोर्ड जो कुछ कर रहा है, उसके पीछे वहां के वक्फ मंत्री जमील अहमद खान हैं। उनकी इन हरकतों से सत्तारूढ़ कांग्रेस के नेता भी असहज महसूस कर रहे हैं, लेकिन ये लोग वोट बैंक के लिए कुछ बोल नहीं पा रहे हैं।

अब केरल के उन मछुआरों की बात, जिनकी जमीन पर वक्फ बोर्ड ने दावा किया है। मामला मुनंबम (कोच्चि) का है। यहां 600 से अधिक मछुआरे रहते हैं, जिनमें से अधिकतर ईसाई हैं। ये सभी जिस जमीन पर रहते हैं, उसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया गया है। अब ये लोग अपने घरों की मरम्मत भी नहीं करा सकते हैं।

इस विवाद के संबंध में पता चला है कि त्रावणकोर के राज परिवार ने 407.6 एकड़ जमीन फारुक कॉलेज को वक्फ संपत्ति के रूप में दी थी। बाढ़ के कारण अब यह जमीन केवल 114 एकड़ रह गई है। इस जमीन के लिए दो शर्तें लगाई गई थीं-
पहली, कॉलेज इस जमीन को बेच सकता है और इससे मिलने वाले पैसे का प्रयोग शैक्षणिक उद्देश्य के लिए कर सकता है।

दूसरी शर्त थी कि यदि इस जमीन का प्रयोग केवल शैक्षणिक उद्देश्य से ही किया जा रहा है, तो कानूनी उत्तराधिकारी इसे वापस ले सकते हैं। पहली शर्त के अनुसार कॉलेज द्वारा मछुआरों को जमीन बेचना सही है। लेकिन अब वक्फ बोर्ड उस जमीन पर दावा कर रहा है। वहीं मछुआरों का कहना है कि उन्होेंने इस जमीन को खरीदा है, जिसके कागजात भी हैं। उपरोक्त मामलों को देखते हुए यह कहना ठीक ही है कि वक्फ बोर्ड पर नियंत्रण आवश्यक है।

Topics: पाञ्चजन्य विशेषकर्नाटक में वक्फ बोर्डसिद्धिविनायक मंदिर
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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