वक्फ बोर्ड में देश में कैंसर की तरह फैल रहा है। कांग्रेस की सरकारों के दौरान प्रदान की गई असीमित शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए वह लगातार मनमाने तरीके से संपत्तियों, स्मारकों पर अपना दावा करता जा रहा है। लेकिन मौजूदा वक्फ कानून के कारण सरकारें भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं पा रही हैं। अकेले कर्नाटक की ही बात करें तो वहां पर वक्फ बोर्ड ने किसानों की जमीनों, गांवों, लोगों के घरों और स्मारकों पर दावे करके हंगामा खड़ा कर रखा है। ये रिपोर्ट कर्नाटक में बीते 10 दिन के अंदर वक्फ बोर्ड द्वारा क्लेम की गई संपत्तियों को लेकर है।
हावेरी में गांव पर किया दावा, भड़के लोग
ये घटना हावेरी जिले के कडाकोला गांव की है। गांव में तीन संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड अपना दावा करता है। वक्फ बोर्ड के इस दावे से लोगों में इस बात का डर बैठ गया कि कहीं वक्फ बोर्ड उनके पूरे गांव को ही अपना न बना दे। अपनी संपत्तियों को खोने के डर से भड़के लोगों ने 1 नवंबर को स्थानीय मुस्लिम नेता मोहम्मद रफी पर पथराव करके उसकी बाइक को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस प्रशासन का कहना था कि लोगों को इस बात का डर था कि वक्फ बोर्ड उनकी संपत्तियों पर कब्जा कर सकता है। इसी के बाद अपनी संपत्ति खोने के डर से भड़के लोगों ने मुस्लिम नेताओं को निशाना बनाने की कोशिश की।
बीदर
5 नवंबर को कर्नाटक के बीदर में वक्फ बोर्ड ने किसान की 18.60 एकड़ जमीन पर अपना दावा ठोंक दिया। वक्फ बोर्ड ने किसान कृष्णमूर्ति की मानवता दिखाने की गलती का फायदा उठाया, जिसमें उन्होंने करीब 30 साल पहले एक मुस्लिम के शव को अपनी जमीन पर दफनाने दिया था। अब उसी को आधार बनाकर वक्फ बोर्ड ने किसान की जमीन को अपने नाम पर कर लिया।
कोगाडू
8 नवंबर को कर्नाटक के ही कोडागू जिले के अंतर्गत आने वाले कुशलनगर में वक्फ बोर्ड की संपत्ति बताकर हिन्दू महिला की पैतृक संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की गई। 45 वर्षीय पुचिमाणा रेणुका उथप्पा नाम की महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि खुद को वक्फ बोर्ड से बताकर दो लोगों ने एक हिन्दू महिला को उसकी पैतृक संपत्ति खाली करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।
बीदर किले पर दावा
9 नवंबर, 2024 को कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने सारी हदों को पार करते हुए बीदर जिले में स्थित ऐतिहासिक ‘बीदर किले’ पर भी अपना दावा ठोंक दिया। वक्फ बोर्ड ने किले के अंदर 17 संपत्तियों को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया। वक्फ बोर्ड की इस हरकत के बाद जिला प्रशासन का कहना है कि किले के अंदर जिन संपत्तियों को वक्फ ने अपना बताया है वो सभी किले के सबसे प्रमुख स्थलों में से एक हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि सभी प्रमुख स्मारकों की ही तरह ये किला भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) के स्वामित्व के तहत आता है। लेकिन, वक्फ के इन दावों की जानकारी अभी तक एएसआई को है ही नहीं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार वक्फ की असीमित ताकत पर लगाने के लिए वक्फ संशोधन विधेयक-2024 जब से लाई है। तभी से वक्फ बोर्ड तेजी से संपत्तियों पर अपने दावे करता जा रहा है।
















