AAP सरकार की मिलीभगत से चल रहा घाटे का खेल : बिजली वितरण कंपनियों के घाटे पर भाजपा ने उठाए सवाल
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AAP सरकार की मिलीभगत से चल रहा घाटे का खेल : बिजली वितरण कंपनियों के घाटे पर भाजपा ने उठाए सवाल

भाजपा ने मांग की है कि वह उपभोक्ताओं के हित में इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करे और AAP सरकार ओडिशा सरकार के उदाहरण का पालन करे। बता दें कि ओडिशा में सरकार ने घाटा दिखा रही बिजली कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया था।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Nov 7, 2024, 09:33 pm IST
in दिल्ली

नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली प्रदेश इकाई ने राजधानी में बिजली वितरण कर रही तीन में से दो कंपनियों पर जानबूझकर घाटा दिखाने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और सांसद बांसुरी स्वराज ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार और बिजली कंपनियों पर गंभीर सवाल उठाए। भाजपा का कहना है कि बिजली कंपनियाँ बीएसईएस और बीपीवाईएल जानबूझकर घाटा दिखा रही हैं, और दिल्ली सरकार इसे रोकने के बजाय इसे बढ़ावा दे रही है। इस कदम का अंततः असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

तीन में से दो कंपनियां घाटे में, एक कंपनी मुनाफे में

दिल्ली में तीन प्रमुख बिजली वितरण कंपनियाँ काम कर रही हैं: बीएसईएस, बीपीवाईएल, और एनडीपीएल। भाजपा नेताओं ने बताया कि इनमें से एनडीपीएल मुनाफे में है, जबकि बीएसईएस और बीपीवाईएल घाटे में हैं। भाजपा का दावा है कि ये दोनों कंपनियाँ लगभग 26 हजार करोड़ रुपये के घाटे का दावा कर रही हैं, जबकि दिल्ली सरकार इस आंकड़े को घटाकर 21 हजार करोड़ दिखा रही है।

वीरेंद्र सचदेवा ने इस संदर्भ में सवाल उठाया कि आखिर क्यों सरकार इस घाटे को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार बीएसईएस और बीपीवाईएल को लाइसेंस नियमों का उल्लंघन करने की छूट दे रही है, और इन कंपनियों की तरफ से घाटा दिखाकर सरकार को राजस्व का नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

लाइसेंस रद्द करने की मांग

भाजपा नेताओं का कहना है कि बीएसईएस और बीपीवाईएल कंपनियां लगातार घाटा दिखाकर दिल्ली के उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ डाल रही हैं। वीरेंद्र सचदेवा ने सुझाव दिया कि अगर ये कंपनियाँ लगातार घाटे में हैं और लाइसेंस नियमों का पालन नहीं कर रही हैं, तो दिल्ली सरकार को चाहिए कि इनके लाइसेंस रद्द कर दे। सचदेवा ने उदाहरण दिया कि ओडिशा में सरकार ने घाटा दिखा रही बिजली कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया था।

भाजपा नेत्री बांसुरी स्वराज का बयान

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा इन कंपनियों के “रेगुलेटरी असेट” और “सेट-ऑफ” को स्वीकार करना न केवल कानूनी, नैतिक और व्यावसायिक रूप से गलत है, बल्कि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इन कंपनियों के घाटे को मान्यता दी, तो इसका बोझ सीधे दिल्ली के नागरिकों को उठाना पड़ेगा। बांसुरी स्वराज ने कहा कि सरकार का यह कदम उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ होगा और उन्हें आर्थिक रूप से प्रताड़ित करेगा।

भाजपा का आरोप : “दिल्ली सरकार की मिलीभगत”

भाजपा नेताओं ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर इन कंपनियों की अनियमितताओं पर आँखें मूँद रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की तरफ से इन कंपनियों को मिलने वाली रिश्वत के कारण वे लगातार घाटा दिखाने का खेल कर रही हैं। सचदेवा ने सवाल उठाया कि अगर एक कंपनी मुनाफे में चल सकती है तो बाकी दो कंपनियों को घाटा क्यों हो रहा है? यह साफ है कि कंपनियां घाटा दिखाकर अपने फायदे के लिए खेल रही हैं और सरकार इसमें भागीदार है।

भाजपा की मांग : उपभोक्ताओं के हित में हो कार्रवाई

भाजपा ने दिल्ली सरकार से मांग की है कि वह उपभोक्ताओं के हित में इन कंपनियों के लाइसेंस रद्द करे और ओडिशा सरकार के उदाहरण का पालन करे। पार्टी का मानना है कि अगर दिल्ली सरकार ने इस मामले में उचित कदम नहीं उठाए, तो आम उपभोक्ताओं पर इसका बड़ा वित्तीय असर पड़ेगा।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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