उत्तराखंड डेमोग्राफी चेंज: जंगलों में मुस्लिम वन गुज्जरों की घुसपैठ, बेबस दिख रहा वन विभाग, अतिक्रमण पर भड़के सीएम धामी
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उत्तराखंड डेमोग्राफी चेंज: जंगलों में मुस्लिम वन गुज्जरों की घुसपैठ, बेबस दिख रहा वन विभाग, अतिक्रमण पर भड़के सीएम धामी

राज्य में जनसंख्या असंतुलन की खबरें इन दिनों सुर्खियों में हैं, छोटे-छोटे क्षेत्रों को लक्ष्य बनाकर मुस्लिम संगठन कैसे उत्तराखंड की डिमोग्रेफी को चेंज करने में लगे हैं।

Written byदिनेश मानसेरादिनेश मानसेरा
Aug 31, 2024, 11:53 am IST
inउत्तराखंड
Uttarakhand demography change

देहरादून: उत्तराखंड के जंगलों में मुस्लिम संगठनों के द्वारा मुस्लिम वन गुज्जरों की घुसपैठ करवाई जा रही है, कांग्रेस शासनकाल में जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर में जंगलों में रहने वाले मुस्लिम वन गुज्जरों को स्थानीय नागरिक का दर्जा देते हुए इनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल कर लिए गए हैं। जिसे लेकर स्थानीय जनजाति लोगो में गुस्सा भी है।

राज्य में जनसंख्या असंतुलन की खबरें इन दिनों सुर्खियों में हैं, छोटे-छोटे क्षेत्रों को लक्ष्य बनाकर मुस्लिम संगठन कैसे उत्तराखंड की डिमोग्रेफी को चेंज करने में लगे हैं इसका उदाहरण राज्य की वन भूमि है जहां योजनाबद्ध तरीकों से मुस्लिम गुज्जर बसाए जा रहे है, फिर उनके बीच जाकर इस्लामिक मदरसे और मस्जिदे बनाई जा रही है। पहले ये माना जाता था कि वन गुज्जर मांस नहीं खाते और जंगल के रखवाले होते हैं, अपने दुधारू पशु चराने के लिए वन गुज्जरों को जंगल के अधिकार मिले हुए थे।

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लेकिन इनके बीच मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता को देखते हुए उन्हें जंगलों से बाहर लाकर बसाया गया और बदले में सरकार ने इनकी सुख सुविधाओं का ख्याल भी रखा, किंतु कुछ साल बीत जाने के बाद वन गुज्जर समूह के समूह जंगलों में घुसपैठ करने लगे हैं। खबर पुख्ता है कि उत्तराखंड में सत्तर फीसदी जंगल है जहां हजारों की संख्या में मुस्लिम वन गुज्जर अपनी घुसपैठ कर चुके हैं इनमें ज्यादातर अवैध कब्जे किए हुए है और ये कब्जे छोटे-छोटे नहीं बल्कि कई हेक्टेयर में किए जा चुके है और वन विभाग इन्हें खाली कराने के लिए मौन साधे बैठा हुआ है।

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर और नैनीताल जिले के जंगलों में मुस्लिम गुज्जरों ने सैकड़ों हैक्टेयर सरकार की जंगल भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है, कब्जाई गई जमीन पर मस्जिद मदरसे खोल दिए गए है, जिनकी अनुमति जिला प्रशासन से नहीं ली गई है। इन मस्जिद मदरसों में जमीयत से जुड़े मौलवी आकर उर्दू अरबी की तालीम दे रहे हैं। खास बात ये है कि पुलिस की खुफिया रिपोर्ट के आधार पर वन विभाग ने इस मामले में पिछले दिनों कागजी कार्यवाई भी की थी। उत्तराखंड के  तराई क्षेत्र के तराई सेंट्रल, तराई पूर्वी और तराई पश्चिमी फॉरेस्ट डिविजन के घने जंगलों में मुस्लिम गुज्जरों ने अवैध रूप से कब्जे कर हजारों हैक्टेयर सरकारी वन भूमि पर खेती करनी शुरू कर दी है, खास बात ये कि वन विभाग के अधिकारियों ने इस जानकारी कई महीनो तक छिपाए रखा? अब स्टेलाइट तस्वीरों ने उक्त अतिक्रमण की पोल खोल कर रख दी है।

तराई ही नहीं हरिद्वार, देहरादून, राजा जी पार्क, कालसी, चकराता त्यूनी, वन प्रभागों में भी वन मुस्लिम गुज्जरों के अवैध कब्जे सामने आए है। कुछ ऐसे वन गुज्जर गिरोह भी पकड़ में आए जो कि वन्यजीव शिकार में लिप्त है, टाइगर की खालें, हाथी दांत तस्करी में इनकी लिप्तता जाहिर हुई है।

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पैरवी के लिए पत्राचार

अभी हाल ही में मुस्लिम वन गुज्जरों के लिए पैरवी करने वाली एक संस्था ने उत्तराखंड सरकार को एक पत्र लिख कर खटीमा क्षेत्र में तराई केंद्रीय वन प्रभाग के किलापुर रेंज और टांडा क्षेत्र में सत्तर मुस्लिम वन गुज्जर परिवारों को बसाने के लिए दबाव बनाना शुरू किया है। वन विभाग ने पिछले अनुभवों और मीडिया में आ रही खबरों के बाद से इन जंगल में जाने से रोका हुआ है। मुस्लिम गुज्जर ट्राइबल वेलफेयर सोसाइटी नाम की संस्था जंगलों में वन गुज्जरों के अवैध कब्जो की पैरवी के लिए पत्राचार कर रही है।

सरकार के पास रिपोर्ट 

वन गुज्जरों को लेकर कुछ माह पहले खुफिया विभाग ने सरकार को एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें वन भूमि पर अवैध कब्जे किए जाने की जानकारी के साथ-साथ अवैध रूप से बनी मस्जिद मजारों मदरसे और अन्य धार्मिक संस्थाओं का भी जिक्र किया गया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर इस सूचना को वन विभाग के उच्च अधिकारियों के सामने रखा तो उसके बाद वन महकमे में कुछ दिन तो हलचल हुई फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया, ऐसा माना गया कि सीएम धामी के निर्देशों को एक खास आईएफएस लॉबी कोई न कोई बहाना देकर टालती रही है।

वन मुस्लिम गुज्जरों के बीच सक्रिय है कट्टरपंथी

जानकारी के मुताबिक, घने जंगलों से मुस्लिम गुज्जरों को ऐसे ही नहीं कुछ साल पहले बाहर किया गया था इसके पीछे कुछ वजहें थीं। तर्क ये दिया जाता रहा है कि टाइगर रिजर्व , वाइल्ड लाइफ रिजर्व से मुस्लिम गुज्जरों को इसलिए बाहर किया गया कि जंगल का स्वाभाविक स्वरूप बना रहे और वन्य जीव को कोई जीवन जीने में कोई बाधा न हो। कहा ये जाता था कि वन मुस्लिम गुज्जर मांस नहीं खाते और जंगल के रख वाले होते हैं। किंतु समय के बदलाव के साथ-साथ वन मुस्लिम गुर्जरों का सामाजिक, आर्थिक जीवन भी बदल रहा है और यहां भी मुस्लिम कट्टरपंथ प्रवेश करने लगा और ईद पर कुर्बानी होने लगी और धीरे-धीरे ये लोग रिजर्व फॉरेस्ट के जंगल में अपने झाले खत्ते के आसपास खेती के लिए वन कर्मियों से मिलीभगत कर सरकारी वन भूमि को कब्जाने लगे।

यहां मस्जिदें बन गई और लाउडस्पीकर लगा कर पांच वक्त की नमाज पढ़ी जाने लगी है, बच्चों के लिए जमीयत के उलेमाओं ने यहां आकर कट्टपंथ के मदरसे खोल दिए है जहां हिंदी नही, बल्कि उर्दू अरबी पढ़ाई जा रही है। इन मदरसों मस्जिदों को बनाए जाने के लिए, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जिला अधिकारी से अनुमति लेना आवश्यक है। जो कि नहीं ली गई है। ऐसे तीन मदरसे वन विभाग ने जाकर बंद करवाए है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं पर सुनाए गए फैसलों के बाद वन विभाग ने और खास तौर पर राजा जी नेशनल पार्क, कॉर्बेट पार्क, वेस्टर्न सर्कल के रिजर्व फॉरेस्ट, से इन्हें जंगल से बाहर निकाल कर भूमि आबंटित कर एक तरफ बसा दिया। बताया जाता है कि इस भूमि आबंटन की प्रक्रिया के दौरान भी बंदर बांट हुई और बड़ी संख्या में यूपी से आए मुस्लिम गुज्जर भी यहां आकर बस गए।

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ऐसा बताया गया कि जब 1983 में सर्वे हुआ था तब राजा जी पार्क में कुल 512 मुस्लिम गुज्जर और जब 1998 में सर्वे हुआ तो 1393 परिवार थे। जब कांग्रेस की विजय बहुगुणा सरकार में इन्हें जंगल से बाहर निकाल कर प्रत्येक परिवार को 0.87 हेक्टेयर (करीब एक हेक्टेयर) भूमि का आबंटन किया गया तो इनके संख्या 2500 से अधिक थी। सूत्रों के अनुसार, आबंटन से पूर्व मुस्लिम गुजारो में जमीयत ए उलेमा हिंद संगठन की घुसपैठ हो चुकी थी। एक मुस्लिम गुज्जर की तीन तीन बीवियां, विधवाओं के मुस्लिम निकाह, रिश्ते नातेदारी दिखा कर जमीनों पर अधिकार जता कर आबंटन करा लिए और सरकारी वन भूमि को एक जमीन जिहाद षडयंत्र के तहत हथिया लिया जाने लगा है।

बताया जाता है कि अब बहुत बड़ी संख्या में मुस्लिम गुज्जरों ने अपनी जमीन के एक बड़े हिस्से को यूपी हरियाणा के मुस्लिम गुज्जरों को सौ सौ रुपए के स्टांप पेपर पर बेच डाला है। जमीन खुरबुर्द करने ये वन गुज्जर अपने जानवर लेकर पहाड़ों की तरफ पहले की तरह आने जाने लगे हैं क्योंकि इन्हें “माईग्रेट” होने और जंगलों में जानवर ले जाने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। वन गुज्जरों ने जौनसार बावर के त्यूनी इलाके में भी अब अपने स्थाई डेरे बना लिए हैं इन डेरों में जमीयत के लोगों का आना जाना है वहां मस्जिद मदरसे खुल गए हैं और इस्लामिक तालीम और गतिविधियां चल रही है। खुले मैदानों में नमाज अता की जाती है।

जौनसार बावर क्षेत्र में मतदाता सूची में दर्ज हुए नाम

जौनसार बावर के चकराता त्यूनी आदि क्षेत्रों में मुस्लिम गुज्जर विरोधी आंदोलन उठ खड़े हुए हैं और स्थानीय लोगों ने इनके मदरसे तोड़ डाले है। जानकारी के मुताबिक, मुस्लिम गुज्जरों के नाम स्थानीय मतदाता सूची में कांग्रेस नेताओ ने दर्ज करवा दिए है जिनकी संख्या हजारों में है और अब वो जौनसार बावर के जनजाति क्षेत्र का लाभ उठा कर नौकरियों में आरक्षण की मांग करने लगे है। तराई के जंगल में ऐसे कई मामले चिन्हित हुए है कि एक एक मुस्लिम गुज्जर परिवार पच्चास पच्चास हैक्टेयर जमीन पर कब्जा कर खेती कर रहा है, ये जंगल की जमीन कैसे वनाधिकारियों ने कब्जा होने दी ये एक गंभीर जांच का विषय है।

सीएम धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ,कहते है कि  अतिक्रमण हटाओ अभियान रुका नहीं है। हम उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज के किसी भी षड्यंत्र को कामयाब नही होने देंगे। जंगल को इंसानी दखल से दूर करना होगा। किसी भी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

Topics: Muslimमुस्लिमउत्तराखंडUttarakhandडेमोग्राफी चेंजDemography Changeउत्तराखंड वन गुज्जरUttarakhand One Gujjar
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