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सागर में विस्तार

भारत ने बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह के एक टर्मिनल के संचालन अधिकार अपने हाथ में लेकर चीन पर रणनीतिक जीत दर्ज की है। अन्य कई देशों में भी भारत कर रहा बंदरगाहों का निर्माण। सागर क्षेत्र में छा जाने की चीन की चाल को भारत दे रहा कड़ी टक्कर

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Aug 2, 2024, 05:58 am IST
in विश्व
बांग्लादेश का मोंगला बंदरगाह

बांग्लादेश का मोंगला बंदरगाह

हिन्द महासागर में लंबे वक्त से चले आ रहे ‘बंदरगाह युद्ध’ में भारत ने चीन को रणनीतिक तौर पर धराशायी कर दिया है। भारत ने बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह के संचालन सूत्र आधिकारिक रूप से अपने हाथ में लेकर यह दिखा दिया है कि उसके पड़ोसी देश चीन के मुकाबले उस पर अधिक विश्वास करते हैं। भारत की यह रणनीतिक जीत समुद्र के क्षेत्र में चीन की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को एक कड़ी टक्कर मानी जा रही है। चीनी कंपनियों ने हाल के कुछ वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में कई बंदरगाहों के निर्माण या उनमें निवेश करने के लिए समझौते किए हैं। भारत का भी पूरा प्रयास था कि इस क्षेत्र में वह चीन को परास्त करे, और इसमें उसकी कूटनीति सफल रही है।

चीन के सुप्रसिद्ध दैनिक ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ में इस विषय में एक लंबी रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। उसमें अखबार ने इसे समुद्र में भारत की चीन को कड़ी टक्कर माना है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत ने बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह पर एक टर्मिनल के संचालन अधिकार हासिल कर रणनीतिक जीत हासिल की है। बांग्लादेश से समझौते को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे विदेशी बंदरगाहों पर अर्ध-नियंत्रण हासिल करने की वैश्विक समुद्री दौड़ में बीजिंग को पछाड़ने के नई दिल्ली के प्रयासों के तौर पर देखा जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि चटगांव के बाद बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है मोंगला। ईरान में चाबहार और म्यांमार में सित्तवे बंदरगाह के बाद हाल के वर्षों में विदेशी बंदरगाहों के संचालन अधिकार पाने के मामले में भारत की यह तीसरी सफलता है।
भारत के बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि टर्मिनल का संचालन इंडियन पोर्ट ग्लोबल लिमिटेड (आईपीजीएल) द्वारा किया जाएगा। नौवहन क्षेत्र के एक विशेषज्ञ का कहना है कि मोंगला भारत के लिए एक बड़ा अवसर है, जिससे वह हिंद महासागर के तटीय क्षेत्रों के लिए एक समान बंदरगाह भागीदार के रूप में अपनी विश्वसनीयता स्थापित कर सकता है। इसमें संदेह नहीं कि समुद्री क्षेत्र में भारत की पहले उतनी साख नहीं थी, लेकिन इधर गत 10 वर्ष में मोदी सरकार की धारदार कूटनीति और प्रयासों से इस क्षेत्र में भारत भी एक बड़ा नाम बनकर उभरा है। हाल के कुछ वर्षों में ही इस क्षेत्र में काफी निवेश भी मिला है।

विश्व के प्रमुख बंदरगाहों पर अर्ध-नियंत्रण किसी देश की अपनी समुद्री शक्ति को दर्शाता है। इस लिहाज से भारत का बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह का संचालन पाना चीन के लिए निश्चित तौर पर परेशानी पैदा करने वाली बात है। पता चला है कि चीन ने 63 देशों में 100 से अधिक बंदरगाहों में निवेश किया है। हिंद महासागर क्षेत्र को चीन की समुद्री रेशम मार्ग पहल की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। बीजिंग ज्बूती में 7.8 करोड़ डॉलर से लेकर पाकिस्तान के ग्वादर में 1.6 अरब डॉलर तक निवेश कर रहा है। यहां यह भी ध्यान रहे कि इस वक्त हिंद महासागर में 17 बंदरगाहों में चीनी कंपनियों का दखल है। चीनी कंपनियां इनमें से 13 का निर्माण कर रही हैं और आठ परियोजनाओं में उनकी हिस्सेदारी है। हिंद महासागर से इतर, चीनी कंपनियों ने संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में बंदरगाहों या टर्मिनलों के लिए पट्टों पर भी हस्ताक्षर किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (बाएं ) की कूटनीति धीरे-धीरे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (दाएं) के मंसूबों पर पानी फेर रही

विदेशी बंदरगाहों में भारत का निवेश/संचालन अधिकार

चाबहार: भारत ने 24 दिसंबर, 2018 को ईरान के चाबहार में शाहिद बेहेश्ती बंदरगाह के एक हिस्से का संचालन संभाला।

हाइफा:
जुलाई 2022 में, अडाणी पोर्ट एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड और इस्राएल के गैडोट समूह के बीच बंदरगाह के लिए साझेदारी हुई।

कोलंबो: 30 सितंबर, 2021 को अडाणी पोर्ट ने श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह के वेस्ट कंटेनर टर्मिनल के निर्माण और संचालन के समझौते पर हस्ताक्षर किए।

सित्तवे: भारत ने 2016 में म्यांमार में गहरे पानी वाले सित्तवे बंदरगाह का निर्माण किया। यह बंदरगाह म्यांमार-भारत को सीधा जोड़ेगा।

चटगांव और मोंगला:
2018 में, भारत और बांग्लादेश ने ट्रांसशिपमेंट को बढ़ावा देने के लिए बांग्लादेश में मोंगला और चटगांव बंदरगाहों के उपयोग के लिए एक द्विपक्षीय समझौता किया। मोंगला बंदरगाह के एक टर्मिनल का संचालन अब भारत के हाथ में है।

मोंगला बंदरगाह समझौता तब हुआ था जब पिछले महीने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत की दो दिवसीय यात्रा पर आई थीं। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मुद्दे पर विस्तार से बात की थी। तब दोनों देशों के बीच समुद्री सहित कई सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे।

भारत-बांग्लादेश के बीच यह समझौता कितना प्रभावशाली है, इस संबंध में विशेषज्ञों की यह टिप्पणी बहुत कुछ बताती है कि, मोंगला बंदरगाह टर्मिनल का प्रबंधन हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी किनारों के प्रमुख समुद्री स्थानों पर भारत के प्रभाव को बढ़ाएगा और क्षेत्रीय सुरक्षा में उसकी भूमिका को मजबूत करेगा। दरअसल आज की परिस्थिति में बंदरगाहों का निर्माण और प्रबंधन ‘बंदरगाह कूटनीति’ का एक रूप है, एक नवीनीकृत राष्ट्रीय शक्ति उपकरण है, जिसका रणनीतिक महत्व बढ़ता ही जा रहा है। ध्यान रहे, साल 2018 में, बांग्लादेश ने भारत को पारगमन और कार्गो शिपिंग के लिए चटगांव तथा मोंगला बंदरगाहों तक पूरी पहुंच प्रदान की थी। अब निस्संदेह मोंगला में टर्मिनल का परिचालन नियंत्रण हासिल करने से भारत की व्यापार कनेक्टिविटी में विस्तार होगा।

भारत की दृष्टि से इस तथ्य को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि चीन के ऊर्जा आयात का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा हिंद महासागर क्षेत्र से होकर गुजरता है। यही वजह है कि बंदरगाह इसके रणनीतिक निवेश की दृष्टि से महत्वपूर्ण अंग बन गए हैं। भारत का इस क्षेत्र में बढ़ता प्रभुत्व हिन्द महासागर ही नहीं, बल्कि अन्य महासागरोंं में भी अपना प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों के लिए विशेष संबल माना जा सकता है। यह भारत का विस्तार है, सागर में विस्तार।

Topics: साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्टबंदरगाह कूटनीतिबंदरगाह युद्धSouth China Morning Postport diplomacyport warपाञ्चजन्य विशेष
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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