करतार सिंह सराभा : देश के लिए 19 वर्ष की आयु में हो गए बलिदान, भगत सिंह अपनी जेब में रखते थे उनकी फोटो
July 2, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

करतार सिंह सराभा : देश के लिए 19 वर्ष की आयु में हो गए बलिदान, भगत सिंह अपनी जेब में रखते थे उनकी फोटो

पंजाब का एक ऐसे ही शेर थे करतार सिंह सराभा। करतार सिंह सराभा को महज साढ़े 19 वर्ष की आयु में अंग्रेजों ने भारत में एक बड़ी क्रान्ति की योजना के सिलसिले में फांसी पर लटका दिया था।

Written byसुरेश कुमार गोयलसुरेश कुमार गोयल
May 24, 2024, 12:44 pm IST
in भारत, पंजाब

देश को क्रूर अंग्रेजों से स्वतंत्र करवाने के लिए हजारों नौजवानों ने संघर्ष किया। अंग्रेजों ने बहुत बड़ी संख्या में देश की तरुणाई को फांसी पर लटका दिया और कई क्रांतिकारियों को काले पानी की सजा देकर जेल में ही खत्म कर दिया। आज़ादी के इस संघर्ष में पंजाब सहित पूरे देश के नौजवानों ने भाग लिया। पंजाब का एक ऐसे ही शेर थे करतार सिंह सराभा। करतार सिंह सराभा को महज साढ़े 19 वर्ष की आयु में अंग्रेजों ने भारत में एक बड़ी क्रान्ति की योजना के सिलसिले में फांसी पर लटका दिया था।

करतार सिंह का जन्म पंजाब के लुधियाना जिला के सराभा गाँव में 24 मई 1896 को माता साहिब कौर की कोख से पिता मंगल सिंह के घर हुआ। पिता का निधन बचपन में हो गया। दादा बदन सिंह ने उनका और उनकी छोटी बहन धन्न कौर का पालन-पोषण किया। इनके तीनों चाचा-बिशन सिंह, वीर सिंह व बख्शीश सिंह ऊंची सरकारी पदवी पर काम करते थे। करतार सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लुधियाना के स्कूल में हासिल की। उसके बाद उड़ीसा में अपने चाचा के पास चले गए जोकि उन दिनों बंगाल का हिस्सा था और राजनीतिक रूप से अधिक जागरूक था। दसवीं कक्षा पास करने के उपरांत रेवेंशा कॉलेज से ग्यारहवीं की परीक्षा पास की। परिवार ने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका भेजने का निर्णय लिया और साढ़े पंद्रह वर्ष की आयु में 1 जनवरी 1912 को अमेरिका पहुंच गए। अमेरिका में प्रारंभिक दिनों में सराभा अपने गांव के ही रुलिया सिंह के पास ही रहे।

अंग्रेजों द्वारा भारत के अप्रवासियों जोकि विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में काम करने वाले श्रमिक थे, उनके साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार का अनुभव होने पर इनके मन में देशभक्ति की भावना हिलोर मारने लगी। भारत की स्वतंत्रता के लिए 15 जुलाई 1913 को लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, बाबा ज्वाला सिंह, संतोख सिंह और संत बाबा वासाखा सिंह दादेहर ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में गदर पार्टी का गठन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य हथियारों के माध्यम से भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त करना था। करतार सिंह सराभा पार्टी के सक्रिय सदस्य बने। अमेरिका में रहने वाले सिख गदर पार्टी के सह-संस्थापक सोहन सिंह भकना से प्रेरित थे क्योंकि उन्होंने भारत में ब्रिटिश राज के खिलाफ विद्रोह किया था। सोहन सिंह भकना ने करतार सिंह सराभा को भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह करने के लिए प्रेरित किया। सोहन सिंह करतार सिंह को ‘बाबा गरनल’ कहते थे। करतार सिंह ने मूल अमेरिकियों से बंदूकें चलाना और विस्फोट करने वाले उपकरण और हवाई जहाज उड़ाना सीखा। गदर पार्टी के सदस्य के रूप में करतार सिंह अमेरिका में रहने वाले भारतीयों को ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता के बारे में जागरूक करते रहे। गदर पार्टी के लिए काम करते हुए करतार सिंह की भेंट ज्वाला सिंह ठट्ठीआं से भी हुई, जिन्होंने उसे बर्कले विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए प्रेरित किया, जहां सराभा ने रसायन शास्त्र में दाखिला लिया और बर्कले विश्वविद्यालय के पंजाबी होस्टल में रहने लगे।

गदर पार्टी ने 1 नवंबर 1913 को ‘द ग़दर’ नाम से अपना अखबार पंजाबी, हिंदी, उर्दू, बंगाली, गुजराती और पश्तो भाषाओं में प्रकाशित करना शुरू किया। 1913 में गदर पार्टी के गठन के बाद करतार सिंह ने विश्वविद्यालय का काम छोड़ दिया और पार्टी के सह-संस्थापक सोहन सिंह और सचिव लाला हरदयाल के साथ काम करना शुरू कर दिया। करतार सिंह सराभा ने अखबार के गुरुमुखी संस्करण को छापने में सक्रिय रूप से भाग लिया और इसके लिए कई लेख और देशभक्ति कविताएं भी लिखी। इस समाचार पत्र का संस्करण दुनिया भर के सभी देशों में रहने वाले भारतीयों को प्रसारित किया गया था। अखबार का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों पर किए जा रहे जबरदस्त अत्याचारों के खिलाफ भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाना था। 1914 में जब प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेज शामिल हो गए तो 5 अगस्त 1914 को गदर पार्टी के नेताओं ने “युद्ध की घोषणा का निर्णय” एक लेख प्रकाशित कर अंग्रेजों के खिलाफ भड़काऊ संदेश दिया। इस लेख की हजारों प्रतियां सेना की छावनियों, गांवों और कस्बों में बांटी गईं। प्रथम विश्व युद्ध की घोषणा के बाद अक्टूबर 1914 में करतार सिंह सराभा, सत्येन सेन और विष्णु गणेश पिंगले और गदर पार्टी के सदस्यों के साथ कोलंबो के रास्ते कलकत्ता पहुंच गए। करतार सिंह ने स्वतंत्रता सेनानी रास बिहारी बोस से भी मुलाकात की और मियां मीर और फिरोजपुर की छावनियों पर कब्जा कर, अंबाला और दिल्ली में सशस्त्र विद्रोह करने का निर्णय किया। इसको सफल करने के लिए लगभग 8 हज़ार भारतीय अमेरिका और कनाडा की सुख सुविदाओं को छोड़ कर समुद्री जहाजों से भारत पहुंचे।

गदर पार्टी के ही एक पुलिसकर्मी मुखबिर कृपाल सिंह ने लोभवश ब्रिटिश पुलिस को विद्रोह की योजना की जानकारी दे दी, जिसके फलस्वरूप 19 फरवरी को बड़ी संख्या में गदर पार्टी के क्रांतिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे विद्रोह विफल हो गया और ब्रिटिश सरकार ने सैनिकों से हथियार जब्त कर लिए। गदर पार्टी के क्रांतिकारी सदस्य जो पुलिस की गिरफ्तारी से बच गए थे उन्हें विद्रोह की विफलता के बाद नेताओं द्वारा भारत छोड़ने का आदेश दिया गया था। करतार सिंह को हरनाम सिंह टुंडीलत और जगत सिंह सहित पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ अफगानिस्तान जाने का आदेश दिया गया था। 2 मार्च 1915 को करतार सिंह सराभा अपने दो दोस्तों के साथ भारत लौट आए। अपनी वापसी के तुरंत बाद वह सरगोधा में चक नंबर 5 पर गए और विद्रोह का प्रचार करना शुरू कर दिया। गंडा सिंह नामक ब्रिटिश भारतीय सेना के सिपाही ने करतार सिंह सराभा, हरनाम सिंह टुंडीलत और जगत सिंह को चक नंबर 5, जिला लायलपुर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार करने के बाद करतार सिंह सराभा को लाहौर सेंट्रल जेल में रखा गया था, जहां उन्होंने कुछ उपकरणों की मदद से खिड़की को काटकर जेल से भागने का प्रयास किया था लेकिन सफल नहीं हो सके।

अदालत में जज ऐसे युवा भारतीय क्रांतिकारी के साहस को देखकर हैरान रह गए। अदालती सुनवाई के दौरान करतार सिंह सराभा ने देशद्रोह के आरोपों का सारा दोष अपने ऊपर ले लिया। न्यायाधीश ने इनके मासूम चेहरे को देखते हुए कठोर सजा नहीं देना चाहते थे इसलिए इन्हें अपना बयान भी बदलने को भी कहा। राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत करतार सिंह अपने बयान पर अडिग रहे। न्यायाधीश ने फांसी देने का हुक्म दिया। 16 नवंबर (कहीं 17 नवंबर) 1915 को करतार सिंह सराभा को उनके छह अन्य साथियों, बख्शीश सिंह, सुरैण सिंह व सुरैण, (ज़िला अमृतसर), हरनाम सिंह (जिला सियालकोट) जगत सिंह (जिला लाहौर), व विष्णु गणेश पिंगले, (ज़िला पूना महाराष्ट्र)- के साथ लाहौर जेल में फांसी पर चढ़ा दिया गया।

1977 में इनके जीवन पर एक पंजाबी फिल्म ‘शहीद करतार सिंह सराभा’ रिलीज़ हुई। भारत की स्वतंत्रता के लिए इनके बलिदान के सम्मान में पैतृक जिले पंजाब के लुधियाना में एक प्रतिमा स्थापित की गई। करतार सिंह सराभा ही भगत सिंह के सबसे लोकप्रिय नायक थे, जिनकी फोटो वह हमेशा अपनी जेब में रखते थे। मां भारती को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाने वाले महान क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा जी के बलिदान दिवस पर उन्हें सादर वंदन।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Topics: Shaheed Bhagat Singh GuruKartar Singh Sarabha PhotoIndependent IndiaShaheed Bhagat SinghKartar Singh Sarabha
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Kartar singh sarabah jayanti

अमेरिका में गूंजी थी ‘गदर’ की हुंकार, आज वहीं से उठ रहा भारत विरोधी नैरेटिव? जानिए करतार सिंह सराभा की कहानी

Kartar singh sarabah jayanti

अंग्रेजों के लिए दहशत का पर्याय थे, महारथी करतार सिंह सराभा

न्याय व्यवस्था : अपना देश, अपने लोग, अपना कानून

1962 : भारत-चीन युद्ध : स्वप्नजीवी सरकार, देश पर प्रहार

केवडिया में सरदार पटेल की गगनचुंबी प्रतिमा

1947 : रियासतों का एकीकरण : पटेल न होते, तो यह नक्शा न होता

Load More

ताज़ा समाचार

तमिलनाडु, मुख्यमंत्री जोसेफ विजय

गोवंश वध प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची विजय सरकार, मद्रास HC के आदेश को चुनौती, कहा- “यह रोक सही नहीं”

प्रतीकात्मक तस्वीर

लुधियाना के मिशनरी स्कूल में हिंदू बच्चे से बर्बरता: मासूम को अलग बैठाकर किया प्रताड़ित, प्रिंसिपल सैमुअल पर केस दर्ज!

भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

पंजाब: जिस ‘जीराम जी योजना’ को विधानसभा में दी थीं गालियां, पैसों के लिए AAP सरकार ने अब उसी को किया लागू!

Amritsar Drone Weapon Smuggling Case Punjab Police Deaddiction Centre Seizure

पंजाब में बड़ा खेल: नशा छुड़ाओ केंद्र की आड़ में चल रहा था पाकिस्तानी हथियारों का धंधा, विदेशी पिस्तौलें बरामद!

बहुआयामी वीर सावरकर (3) : निर्भीक उपन्यासकार

bjp spokesperson prem shukla reacts to india pakistan dialogue open letter rss stance

विपक्ष का ‘पाकिस्तान प्रेम’ फिर बेनकाब: 100 दिग्गजों की चिट्ठी पर भड़की BJP, कहा- ये लोग शांति के फर्जी कबूतर…

Kishanganj HRDF School Tribal Students Religious Education Investigation Thakurganj Bihar

बिहार: किशनगंज में जनजातीय बच्चों को दी जा रही मजहबी शिक्षा, केरल की संस्था पर भड़के ग्रामीण

रावलकोट में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन करते स्थानीय लोग। (फोटो- वीडियो ग्रैब)

PoJK में भड़का पाकिस्तान के खिलाफ सबसे बड़ा विद्रोह, प्रदर्शनकारी बोले- ‘कश्मीर नहीं पाक का हिस्सा, करेंगे भारत का रुख’

Israel Iran war

इजरायल के PM नेतन्याहू की चेतावनी: बोले- फिर करेंगे ईरान पर सैन्य हमला…ट्रंप की टेंशन बढ़ी

Explainer: अब VB G-RAM-G का जमाना, 25 फीसदी बढ़ी मजदूरी; बदलेगी गांवों की दशा-दिशा

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies