1962 : भारत-चीन युद्ध : स्वप्नजीवी सरकार, देश पर प्रहार
June 4, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

1962 : भारत-चीन युद्ध : स्वप्नजीवी सरकार, देश पर प्रहार

चीनी हमले और कब्जे ने एक ओर तो नेहरू के ‘हिन्दी-चीनी, भाई-भाई’ जैसे नारों का खोखलापन उजागर कर दिया, वहीं भारत के वामपंथियों का दोहरा चरित्र भी सामने ला दिया

Written byPanchjanyaPanchjanya
Aug 14, 2023, 12:11 pm IST
in भारत

 

चीन की सेना द्वारा भारत के लद्दाख एवं नेफा सेक्टर में आक्रमण किया जाना एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। इस युद्ध ने विदेश नीति और रक्षा नीति के मोर्चे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रूमानी आदर्शवाद को विनष्ट कर दिया।

स्वतंत्र भारत के इतिहास में 20 अक्तूूबर, 1962 की सुबह 5 बजे चीन की सेना द्वारा भारत के लद्दाख एवं नेफा सेक्टर में आक्रमण किया जाना एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। इस युद्ध ने विदेश नीति और रक्षा नीति के मोर्चे पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के रूमानी आदर्शवाद को विनष्ट कर दिया। उस समय नयी दिल्ली में टाइम्स आफ लंदन पत्रिका से जुड़े आस्ट्रेलियाई पत्रकार नेविल मैक्सवेल ने अपनी पुस्तक ‘इंडियाज चाइना वार’ में दावा किया है कि इस हार के लिए नेहरू की नीतियां मुख्य रूप से जिम्मेदार थीं।

वर्ष 1947 में स्वतंत्र हुए भारत ने दो वर्ष बाद 1949 में हुई चीन की साम्यवादी क्रांति को मान्यता दे दी। चीन से अच्छे संबंध रखने के लिए नेहरू ने 29 अप्रैल 1954 को चीन के साथ पंचशील समझौता किया और हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे लगाये। भारत ने तिब्बत पर किये गये चीन के अधिकार को भी स्वीकार कर लिया। तिब्बत पर अधिकार करने के बाद चीनी सैनिक भारतीय सीमा में अतिक्रमण करने लगे। इस बीच, 1957 तक चीन एक तरह से लद्दाख के हिस्से अक्साई चिन पर कब्जा कर चुका था।

युद्ध ने नेहरूवादी विदेश नीति के दौर को खत्म कर दिया। यह साबित हो गया कि नेहरूवादी विदेश नीति भारत की सुरक्षा नहीं कर सकती और रक्षा एवं सैन्य शक्ति दिल्ली की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसने भारत को अपनी सैन्य शक्ति पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया और रक्षा पर खर्च बढ़ गया जिसके परिणामस्वरूप आज भारत एक परमाणु शक्ति है। दूसरे इसने भारत को अन्य देशों के साथ अधिक यथार्थवादी संबंध रखने के लिए प्रेरित किया। साथ ही इसने भारत को चीन को एक संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में स्थायी रूप से परिभाषित करने के लिए प्रेरित किया। 

चीन ने भारत पर विस्तारवादी होने का आरोप लगाते हुए 29 दिसंबर, 1959 को भारत के विदेश मंत्रालय को एक नक्शा भेजा जिसमें कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र और अरुणाचल प्रदेश के 50,000 वर्ग मील क्षेत्र को अपने कब्जे में दिखाया। यानी चीन की कारगुजारियां हमले के 10 महीने पहले से शुरू हो गयी थीं। परंतु नेहरू सरकार ने न तो सुरक्षा नीति में कोई ठोस काम किया और न ही विदेश नीति के स्तर पर। नेहरू तत्कालीन रक्षा मंत्री वी.के. कृष्ण मेनन पर बहुत भरोसा करते थे। लापरवाही का आलम यह था कि जब चीन युद्ध की तैयारियों में जुटा था, तब नेहरू और मेनन लंबी-लंबी विदेश यात्राओं में मग्न थे।

20 अक्तूबर से 21 नवंबर, 1962 तक चले इस युद्ध में भारत को पराजय मिली। चीन की सेना भारतीय सैनिकों के मुकाबले दोगुनी थी, उनके पास अच्छा प्रशिक्षण था, अच्छे हथियार थे, ऊंचाइयों पर युद्ध का अनुभव था, रसद की कोई कमी नहीं थी। दूसरी तरफ भारतीय सैनिकों के पास जाड़े की वर्दी तक नहीं थी और पुराने किस्म के हथियार थे। फिर भी भारत के जवानों ने डटकर युद्ध किया। वस्तुत: यह हार सेना की नहीं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व की थी। जीतते हुए चीन ने 21 नवंबर, 1962 को एकतरफा युद्धविराम की घोषणा कर दी और पहले की स्थिति में लौट गया।

चीन ने भारत पर विस्तारवादी होने का आरोप लगाते हुए 29 दिसंबर, 1959 को भारत के विदेश मंत्रालय को एक नक्शा भेजा जिसमें कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र और अरुणाचल प्रदेश के 50,000 वर्ग मील क्षेत्र को अपने कब्जे में दिखाया। यानी चीन की कारगुजारियां हमले के 10 महीने पहले से शुरू हो गयी थीं। परंतु नेहरू सरकार ने न तो सुरक्षा नीति में कोई ठोस काम किया और न ही विदेश नीति के स्तर पर। नेहरू तत्कालीन रक्षा मंत्री वी.के. कृष्ण मेनन पर बहुत भरोसा करते थे। लापरवाही का आलम यह था कि जब चीन युद्ध की तैयारियों में जुटा था, तब नेहरू और मेनन लंबी-लंबी विदेश यात्राओं में मग्न थे।

इस युद्ध ने नेहरूवादी विदेश नीति के दौर को खत्म कर दिया। यह साबित हो गया कि नेहरूवादी विदेश नीति भारत की सुरक्षा नहीं कर सकती और रक्षा एवं सैन्य शक्ति दिल्ली की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसने भारत को अपनी सैन्य शक्ति पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया और रक्षा पर खर्च बढ़ गया जिसके परिणामस्वरूप आज भारत एक परमाणु शक्ति है। दूसरे इसने भारत को अन्य देशों के साथ अधिक यथार्थवादी संबंध रखने के लिए प्रेरित किया। साथ ही इसने भारत को चीन को एक संभावित सुरक्षा खतरे के रूप में स्थायी रूप से परिभाषित करने के लिए प्रेरित किया।

Topics: Independent IndiaUtopian Governmentवी.के. कृष्ण मेननAttack on the Countryनेहरूवादी विदेश नीतिचीन युद्धभारत के लद्दाख एवं नेफा सेक्टरसाम्यवादी क्रांतिV.K. Krishna MenonNehruvian Foreign PolicyChina WarIndia's Ladakh and NEFA Sectorsस्वतंत्र भारतCommunist Revolution
Share1TweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

करतार सिंह सराभा : देश के लिए 19 वर्ष की आयु में हो गए बलिदान, भगत सिंह अपनी जेब में रखते थे उनकी फोटो

न्याय व्यवस्था : अपना देश, अपने लोग, अपना कानून

केवडिया में सरदार पटेल की गगनचुंबी प्रतिमा

1947 : रियासतों का एकीकरण : पटेल न होते, तो यह नक्शा न होता

Load More

ताज़ा समाचार

Gujarat Wire Free City Mission 2030 Budget

गुजरात 2030 तक बनेगा “वायर फ्री” : गुजरात में अब कार्यरत होगा देश का पहला “सर्विस कमिश्नरेट”

देश के 10 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में पश्चिम बंगाल के 8 शहर शामिल, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए खतरा!

दिल्ली अग्निकांड: होटल मालिक लवकेश बजाज 4 दिन की पुलिस रिमांड पर…

CM Yogi Gyan Bharatam Mission UP Tourism Policy Neem Karoli Baba Circuit

नीम करोली बाबा सर्किट से शिवाजी महाराज म्यूजियम तक! CM योगी का बड़ा ऐलान, UP में दिखेगा सांस्कृतिक पुनर्जागरण

dehradun administration removes illegal prasad shops outside fri rangers colony mazar

देहरादून: FRI रेंजर्स कॉलोनी के बाहर विवादित मजार पर प्रशासन का एक्शन, हटाई गईं अवैध दुकानें

ऑटो में हिंदू लड़की को छेड़ना… GYM को शरीयत नियमों से चलाना- ये कैसी जिहादी मानसिकता?

Cockroach

घर का अनचाहा ‘मेहमान’ है कॉकरोच, इसे दूर करना है जरूरी

कोच्चि IPL विवाद: ललित मोदी बोले-‘मिला था सोनिया गांधी का संरक्षण’

केरल में ‘ओनली फॉर मुस्लिम’ जिम पर बवाल: हिजाब में वर्कआउट, शरीयत कानून और इस्लामिक ड्रेस…

Thiland Pattaya Indian army beaten by trans pib fact check

थाईलैंड में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल को पीटने का वीडियो वायरल: PIB Fact check ने बताया फर्जी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies