‘रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में न जाकर कांग्रेस ने किया पाप’ -गौरव वल्लभ
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‘रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में न जाकर कांग्रेस ने किया पाप’ -गौरव वल्लभ

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे गौरव वल्लभ उस पार्टी में सनातन विरोधी माहौल को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। गौरव के शब्दों में कहें तो, श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में निमंत्रण के बाद भी कांग्रेस के किसी शीर्ष नेता का उसमें न जाना किसी पाप से कम नहीं था।

Written byतृप्ति श्रीवास्तवतृप्ति श्रीवास्तव
Apr 21, 2024, 06:10 pm IST
inसाक्षात्कार
कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता रहे गौरव वल्लभ के साथ पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव

कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता रहे गौरव वल्लभ के साथ पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे गौरव वल्लभ उस पार्टी में सनातन विरोधी माहौल को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे। गौरव के शब्दों में कहें तो, श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में निमंत्रण के बाद भी कांग्रेस के किसी शीर्ष नेता का उसमें न जाना किसी पाप से कम नहीं था। इस पाप से मुक्ति के लिए उन्होंने मानस का अखंड पाठ तक कराया था। दिल में सनातन के प्रति अटूट आस्था लिए आखिरकार वह गत दिनों कांग्रेस को त्याग भाजपा से जुड़े हैं। सनातन धर्म, कांग्रेस की देशविरोधी राजनीति और आगामी आम चुनावों से जुड़े अनेक विषयों पर पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव ने उनसे विस्तृत बातचीत की, जिसके प्रमुख अंश प्रस्तुत हैं

आप पेशे से प्राध्यापक हैं और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ हैं। कांग्रेस को छोड़ते वक्त क्या आपने ‘जोखिम मूल्यांकन’ किया था?
‘जोखिम मूल्यांकन’ वित्तीय निर्णय से जुड़ा होता है। लेकिन व्यक्ति के दिल से जुडे़ मामलों में जोखिम मूल्यांकन नहीं, बल्कि दिल का मूल्यांकन करना चाहिए। कांग्रेस को दिए अपने त्यागपत्र में मैंने दिल की भावनाएं व्यक्त की हैं। मैंने कांग्रेस छोड़ने का निर्णय अचानक नहीं लिया। मैंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को स्पष्ट बता दिया था कि जब तक वे सनातन विरोध को मौन सहमति देना बंद नहीं करेंगे, तब तक न टेलीविजन पर दिखूंगा और न प्रेसवार्ता करूंगा। जब कांग्रेस एवं उसके सहयोगी दलों के लोग सनातन धर्म के खिलाफ खराब बातें करते हैं तो देश के आमजन को बुरा लगता ही है। तमिलनाडु में स्टालिन ने धर्म को गाली दी, कांग्रेस ने उसका विरोध नहीं किया। मैंने प्रश्न उठाया तो कहा कि गठबंधन में फूट पड़ जाएगी। कांग्रेस के नेताओं ने सनातन की तुलना कोरोना से करने का अपराध किया। यह सब देखने के बाद धैर्य का बांध टूटा तो कांग्रेस नेताओं से दो टूक कह दिया कि भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने और रामलला के दर्शन करने नहीं जाओगे, तो मैं टीवी बहसों में नहीं जाऊंगा।

हर वर्ष वह बजट पर प्रेस वार्ता करते थे, लेकिन इस बार नहीं की। कांग्रेस आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करते-करते अपनी ही पुरानी नीतियों का विरोध कर रही है। उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीति पीवी नरसिम्हा राव की सरकार के काल में आयी थी। आज कोई सीईओ प्रधानमंत्री की तारीफ करता है तो कांग्रेस अकारण ही उसके खिलाफ खड़ी हो जाती है। राष्ट्र की प्रगति, धर्म की रक्षा और अर्थ निरपेक्षता, इन तीन चीजों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। मैंने कांग्रेस के नेताओं को बोला कि जब अडानी को ‘सेबी’ ने क्लीनचिट दे दी है, तो अब विरोध बंद करो। लेकिन उनके लिए सेबी, सीबीआई, ईडी, सर्वोच्च न्यायालय से लेकर सभी अदालतें खराब हैं। तो क्या सिर्फ वे ही सही हैं, बाकी सब गलत?

चुनाव आते ही कांग्रेस राहुल गांधी व उनकी बहन को शिवभक्त दिखाने की कोशिश करती है। सनातन विरोधी होते हुए भी इस दोहरे चरित्र को आप कैसे देखते हैं?
क्या आपने कांग्रेस के किसी शीर्ष नेता को चुनावी रैली के अलावा कभी किसी मंदिर में जाते देखा है? जो सनातन को मानते हैं, वे मंदिर जाकर भगवान के पूजन के लिए चुनाव आने का इंतजार नहीं करते। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने तो भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिलने के बाद भी उसे अस्वीकार कर दिया। मैं तब उदयपुर में था। वहीं पर मानस अखंड पाठ करवाया। हमारा यही कहना था कि कांग्रेस के पाप को धोने के लिए यह अखंड पाठ कर रहे हैं।

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को इस तरह का परामर्श आखिर कौन देता है?
कांग्रेस पार्टी को अभी जो लोग चला रहे हैं, वे स्कूल में रहते अपनी कक्षा में मॉनीटर का चुनाव भी नहीं लड़े होंगे जबकि वे कई दशक से राज्यसभा में हैं। वे यही चाहते हैं कि कांग्रेस न तो सत्ता में आये और न ही सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाये। दूसरा, ऐसे ही लोग 30 साल से कांग्रेस का घोषणापत्र बना रहे हैं। उन घोषणापत्रों में इतना दम होता तो आज कांग्रेस का यह हाल नहीं होता। तीसरे, जो व्यक्ति कांग्रेस में चुनावी टिकट पर हस्ताक्षर करता है, यदि उससे पूछ लिया जाए कि उत्तर प्रदेश और बिहार क्या अलग-अलग राज्य हैं, तो वह दुविधा में पड़ जाएगा। सचाई जानते हुए भी कांग्रेस के शीर्ष नेता मौन हैं तो वे भी उतने ही दोषी हैं। सच तो यह है कि जो लोग कभी मंत्रियों के निजी सहायक हुआ करते थे, वे आज कांग्रेस चला रहे हैं। उनका जमीनी जुड़ाव नहीं है। ऐसे लोग जब अपनी पार्टी के निर्णय भी लागू नहीं करा सकते, तो देश से जुड़े निर्णय कैसे कर पाएंगे? प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में कांग्रेस के नेता इतने अंधे हो चुके हंै कि सुबह नाश्ते के समय प्रधानमंत्री के बारे में खराब बातें बोलते हैं, दोपहर में अडानी, अंबानी, टाटा को कोसते हैं और रात में डिनर के समय जो करते हैं, वह मैं यहां बता नहीं सकता !

कहा जाता है कि राहुल गांधी को ऐसे लोग घेरे हुए हैं, जो कांग्रेस का भला नहीं चाहते?
यह बात सही है कि राहुल जिन लोगों से घिरे हुए हैं, उनको राजनीति का ‘रा’ भी नहीं पता। कांग्रेस का अध्यक्ष अच्छा हो सकता है, लेकिन वह स्वयं एक भी निर्णय नहीं ले सकता। आज देश के कुछ राज्यों से कांग्रेस 50 साल से गायब है। राजस्थान में कांग्रेस ने सीपीआई को तीन सीट सिर्फ इसलिए दीं, क्योंकि उसे उम्मीदवार ही नहीं मिले। कांग्रेस का आज हाल यह है कि पार्र्टी से टिकट लेने वाला खुद ही कह रहा है कि मैं हारने वाला हूं।

क्या वजह है कि कांग्रेस के नेता बार-बार देश के बडे उद्योगपतियों के लिए बुरा-भला कहते हैं?
कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लगता है कि जितना उनको गाली देंगे, उतना वे अपशब्द प्रधानमंत्री मोदी को लगेंगे। हैरत की बात है कि कांग्रेस अडानी को गाली दे रही है और कांग्रेस की राज्य सरकारें उनके लिए लाल कालीन बिछा रही हैं। यह गलत नहीं है, क्योंकि किसी भी राज्य में पूंजी निवेश से ही रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।

राहुल गांधी जो भी बोलते हैं, उस पर मीम बन जाता है। क्या उनको अर्थ जगत का ज्ञान है?
देखिए, मैं राजस्थान का रहने वाला हूं। हमारे यहां के बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि सोये हुए को तो कोई भी जगा सकता है, परंतु जो सोने का दिखावा कर रहा हो, उसको प्रभु भी नहीं जगा सकते। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राहुल गांधी की यही हालत है। अगर कोई सीखना ही न चाहे तो उसको कोई नहीं सिखा सकता। मैं कांग्रेस के नेताओं के व्यक्तिगत कारनामे बता दूं तो उनका सड़क पर निकलना मुश्किल हो जाएगा। मैंने कांग्रेस के नेताओं को बताया कि विपक्ष की भूमिका होती है सकारात्मक आलोचना करना। आप आलोचना करो और बताओ कि इसके लिए सही रास्ता क्या है? मैंने जब यह बोला तो कहा गया कि ये तो आरएसएस का ‘मोल’ है। मैंने कहा, अटल बिहारी वाजपेयी जब विपक्ष में थे तो उन्होंने कई मुद्दों पर सरकार की प्रशंसा की थी। तब देश को लगा कि यह व्यक्ति जो बोलता है, वह सही है। यदि मैं रोज रोज सरकार का मजाक उड़ाऊं तो इसका मतलब होगा मैं देश का मजाक उड़ा रहा हूं, क्योंकि सरकार को देश की जनता चुनती है। विपक्ष सरकार की सकारात्मक कमी निकाले तो सरकार को मदद मिलती है।

आपने तो एक बार कहा था कि ‘मैं कभी भी भाजपा में नहीं जाऊंगा’, लेकिन अब…?
मैं तो सनातन के पक्ष में खड़ा हूं। शुरू से कहा है कि अरविंद केजरीवाल कलयुग के सबसे बड़े भ्रष्टाचारी हैं। कांग्रेस 15 दिन में बदल गयी और कहने लगी केजरीवाल सबसे बड़े ईमानदार हैं। मैंने कहा था कि वाम दलों को दुनिया ने नकार दिया, उनसे बात नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस आज उन्हीं की गोद में बैठी है। मैं शुरू से कहता था कि भगवान राम का विरोध राष्ट्र का विरोध है। मैं मानता हूं कि राजनीति समाज को बदलने का माध्यम है। मैं भाजपा से जुड़कर सामाजिक बदलाव में योगदान देना चाहता हूं। मैंने कांग्रेस से कहा था कि आज मोदी को लोग इसलिए सुनते हैं, क्योंकि उन्होंने ऐसा मॉडल बनाया है, जिसको देश ने सराहा है। कांग्रेस की आज हालत ऐसी है कि वहां कार्यकर्ता अपने शीर्ष नेता से नहीं मिल सकते। मेरे जीवन में तीन मुद्दे सबसे ऊपर रहे हैं-राष्ट्र निर्माण में योगदान, धर्म की रक्षा व आर्थिक समानता।

भाजपा में आप अपनी क्या भूमिका मानते हैं?
प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य 2047 तक विकसित भारत बनाना है। इसी संकल्प ने मुझे प्रेरणा दी है। उनके इस संकल्प में गिलहरी का सा योगदान मैं भी देना चाहता हूं। माता-पिता एवं गुरुओं के आशीर्वाद से उन्हें बहुत मिला है। वे अपने तीसरे कार्यकाल में भारत को दुनिया की तीसरी आर्थिक महाशक्ति बनाने की बात कर रहे हैं और कांग्रेस व उसके सहयोगी सिर्फ उन्हें हराने की बात कर रहे हैं।

विपक्षी दल केन्द्र सरकार पर बेरोजगारी का आरोप लगाते हैं? एक अर्थ विशेषज्ञ के नाते इसे कैसे देखते हैं?
बेरोजगारी को लेकर कई तरह के सर्वे आते रहते हैं। समस्या यह है कि जो खुद का रोजगार कर रहे हैं, सर्वे में उन्हें बेरोजगार मान लिया जाता है। संगठित और असंगठित क्षेत्र से जुड़े डाटा को ठीक से समझने की जरूरत है। हमारे देश में असंगठित क्षेत्र भी सुदृढ़ है। इसलिए इस तरह के आंकड़े आधे-अधूरे होते हैं। भारत में युवा आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है। परंतु इसका कुछ नेता राजनीतिक लाभ के लिए भयावह चित्रण करते नजर आते हैं। यह गलत है, इसे रोका जाना चाहिए। सरकार का पूरा ध्यान स्वरोजगार पर है, जो देश की आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है।

 राहुल गांधी जैसे नेता कभी-कभी ऐसे बयान देते हैं जो देश के लिए खतरनाक कहे जा सकते हैं। इस पर आप क्या कहेंगे?
देखिए, मैंने कांग्रेस को दिए अपने त्यागपत्र में दिशाहीनता जैसे शब्द का प्रयोग किया था। आप कांग्रेस के किसी भी नेता से पूछें कि जाति जनगणना में कौन सा आंकड़ा जोड़ेंगे? उनको इस बारे में कुछ भी पता नहीं है। ऐसी बातों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस लोगों को जाति के नाम पर भ्रमित करने का काम कर रही है। इस तरह के बयान देने की सलाह राहुल गांधी को बिहार के एक दल ने दी है, जिसे मानना किसी राष्ट्रीय पार्टी के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि हमारे लिए सिर्फ चार जातियां हैं-महिला, गरीब, युवा और किसान। वहीं, राहुल गांधी आज ऐसी बातें बोल रहे हैं, जो भारत की अखंडता और सौहार्द के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। कांग्रेस की नीति है, जाति के नाम पर फूट डालो और राज करो। लेकिन अच्छा यह है कि अब देश की जनता जाग चुकी है और इसका जबाव भी दिया जा रहा है।

प्रधानमंत्री का प्रयास है कि साल 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाएंगे। आपका इस पर क्या नजरिया है?
आर्थिक क्षेत्र में भारत आज दुनिया में पांचवें स्थान पर है। भारत की सकल घरेलू उत्पाद दर 7 प्रतिशत की औसत से बढ़ रही है, जबकि बाकी दुनिया में यह 3.5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। स्वाभाविक है कि दुनिया बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में निवेश करेगी। इस दृष्टि से आने वाले समय में भारत दुनिया का एकमात्र पूंजी बाजार होगा और दुनिया को एक मुनाफे वाला बाजार उपलब्ध कराएगा। साल 2047 तक विकसित देश बनने के सपने को संजोए भारत तेजी से उस दिशा में बढ़ रहा है।

Topics: धर्म की रक्षाSecularismश्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठासनातन विरोधी माहौलधर्म को गालीShri Ram Mandir Pran PratisthaAnti Sanatan Environment
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