भारतीय परंपराओं और भारतीय धरोहरों को सम्मान देने वाले न्यायाधीशों पर कथित लिबरल मीडिया का निशाना क्यों?
July 22, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

भारतीय परंपराओं और भारतीय धरोहरों को सम्मान देने वाले न्यायाधीशों पर कथित लिबरल मीडिया का निशाना क्यों?

भारत में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिंदू मंदिरों और न्यायाधीशों पर हमले बढ़ रहे हैं। तमिलनाडु के मंदिर विवाद से लेकर मनुस्मृति के उल्लेख तक, जानिए हिंदू आस्था की चुनौतियां।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Dec 15, 2025, 09:15 am IST
in विश्लेषण
Justice GR Swaminathan

प्रतीकात्मक तस्वीर

तमिलनाडु में एक प्राचीन मंदिर है। प्रत्येक मंदिर की तरह वहाँ पर भी दीप जलाने का सातत्य है। यह निरंतर चलने वाली एक क्रिया है। मंदिर है तो दीप जलेगा ही, वह अंधकार में नहीं रह सकता। परंतु क्या ऐसा संभव है कि को न्यायाधीश किसी मंदिर को लेकर यह निर्णय दे और इस निर्णय का पालन राज्य सरकार न करे और साथ ही उस न्यायाधीश के विरुद्ध कदम उठाने के लिए पूरा का पूरा विपक्ष तत्पर हो जाए?

धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिन्दू आस्था पर हमला

यह कैसी विडंबना है कि भारत जैसे देश, जहां की पहचान ही हिन्दू मंदिर हुआ करते हैं, वहाँ पर हिन्दू मंदिर में दीप जलाने के निर्णय का पालन ही न हो और प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करे कि वहाँ पर दीप जलाया ही न जा सके और न्यायाधीश को भी दंडित करने का प्रयास करे? और किसलिए क्योंकि मंदिर के बाद वहाँ पर दरगाह बनी और जैसा होता आया है कि कथित धर्मनिरपेक्षता के नाम पर हिन्दू मंदिर के तमाम अधिकार छीन लिए गए। मगर हिंदुओं ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया और इस पहाड़ी का नाम वर्ष 2022 में तिरुपरंकरुणम ही रखा और दरगाह में प्रचलित जानवरों की कुर्बानी पर रोक लगा दी। इसके बाद वर्ष 2025 में राम रविचंद्रन ने कार्तिगई दीपम के लिए पहाड़ी पर दीपक जलाने की मांग की और यह एक उचित याचिका भी है। न्यायाधीश ने इसे हिन्दू परंपरा कहते हुए यह निर्णय दिया कि यह प्राचीन परंपरा है और इससे मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचती है।

न्यायालय के आदेश को दिखाया ठेंगा

परंतु तमिलनाडु सरकार ने इसे नहीं माना और बाद में जब न्यायालय ने अवमानना आदेश भी जारी कर दिया। परंतु पालन नहीं होना था और न ही हुआ। इसे लेकर सारा विपक्ष अर्थात डीएमके, कांग्रेस, सपा और यहाँ तक उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना भी जस्टिस स्वामीनाथन के विरोध में इम्पीचमेंट मोशन को लेकर सामने आ गए। ऐसे में प्रश्न जितना इन विपक्षी दलों पर है उतना ही कथित निष्पक्ष लिबरल पत्रकारों पर भी है कि आखिर हिंदुओं की धार्मिक स्वतंत्रता पर निर्णय देने वाले न्यायाधीश उनका निशाना क्यों बन जाते हैं?

ऐसा नहीं है कि जस्टिस स्वामीनाथन ही एकतरफा सेक्युलर निष्पक्षता का शिकार बने हों।

पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ भी बन चुके हैं निशाना

पाठकों को याद होगा कि ऐसे लिबरल्स की आँखों के तारे पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ कथित निष्पक्ष नेताओं और लोगों के निशाने पर आ गए थे, जब उन्होनें अपने घर पर गणेश पूजा में प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया था और प्रधानमंत्री मोदी वहाँ पर गए थे। कथित निष्पक्ष इंदिरा जय सिंह, प्रशांत भूषण और खान मार्केट गैंग के कई लोग इससे कुपित हो गए थे और तमाम तरह की निष्पक्षता की दुहाई दी जाने लगी थी।

श्रीराम मंदिर पर निर्णय सुनाने वाले गोगोई भी बने थे शिकार

अयोध्या में सदियों से अपने आराध्य प्रभु श्रीराम मंदिर की लड़ाई लड़ रहे हिंदुओं को उनका अधिकार तथ्यों एवं ऐतिहासिक प्रमाणों पर दिलाने वाले पूर्व सीजेआई गोगोई भी इस कथित निष्पक्ष लॉबी से बच नहीं पाए थे। इस निर्णय के बाद उनकी आलोचना हुई थी और उन्हें हिंदुओं का पक्ष लेने वाला बताया था। मगर उन्होनें यह बार-बार कहा था कि यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय का था, उनका नहीं। उन्होनें बार-बार अपने संबोधनों में कहा था कि एक न्यायमूर्ति का कोई धर्म नहीं होता है।

बहराइच मामले में मनुस्मृति के उल्लेख से लिबरल्स बिलबिलाए

यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि भारत का कथित लिबरल वर्ग हिंदुओं से अपने दिल से नफरत करता है। वह हिंदुओं से ही नहीं बल्कि न्याय की हिन्दू अवधारणा से भी घृणा करता है। उसे हर उस वस्तु और धारणा से घृणा है, जो हिन्दू इतिहास, हिन्दू गौरव का बोध कराती है। अपने निर्णयों में कई न्यायाधीश भारत के तमाम ग्रंथों का उल्लेख करते रहते हैं। भारत के तमाम धर्मग्रंथों में न्याय, नीति एवं शासन को लेकर युगानुकूल परिभाषाएं दी गई हैं, जिनमें से कई सातत्य लिए हुए हैं और कई उस समय विशेष के लिए ही मानी गई थी। हालांकि जिन जस्टिस स्वामीनाथन के विरुद्ध महाभियोग की तैयारी विपक्ष कर रहा है, उन्होंने स्वयं बाइबिल की एक पंक्ति का उल्लेख किया था कि मैं यहां हाथ खड़े करके यह चिल्लाने के लिए नहीं बैठा हूं कि- ‘हे पिता, इन्हें माफ कर दो, क्योंकि वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं।”

मगर यहाँ पर बहराइच में वर्ष 2024 में दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन पर निकाली जा रही शोभायात्रा और उसपर पथराव और उसमें अत्यंत निर्ममता से मारे गए राम गोपाल मिश्रा की हत्या पर सुनाए जा रहे निर्णय की बात हो रही है। और आलोचना हो रही है। दरअसल न्यायालय ने मुख्य दोषी सरफराज उर्फ रिंकू को फाँसी की सजा सुनाई है और साथ ही सरफराज के अब्बा अब्दुल हमीद और उसके दो भाई फहीम और तालिब उर्फ सबलू के साथ ही सैफ, जावेद, जीशान, ननकाउ, शोएब और मरुफ को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है।

मनुस्मृति का उल्लेख

परंतु समस्या यहाँ पर इस बात की है कि इस निर्णय को सुनाते समय न्यायाधीश ने मनुस्मृति का उल्लेख कर दिया। और कहा कि “दंड शास्ति प्रजा: सर्वा दंड एवाभिरक्षित। दंड सुप्तेषु जागर्ति, दंड धर्म विदुर्वधा।’ का उद्धरण किया है। इसका अर्थ है – “दंड ही सभी प्रजाओं पर शासन करता है, दंड ही उनकी रक्षा करता है, जब सभी सो रहे होते हैं, तब भी दंड जागता है; इसलिए बुद्धिमान लोग दंड को ही धर्म कहते हैं।”

और इसके साथ ही एक बार फिर से लिबरल्स को मिर्ची लगना आरंभ हो गया। परंतु ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले इसी वर्ष अप्रेल में एससी-एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने दोषी को सात वर्ष के कठोर कारावास दंड की सजा सुनाते हुए मनुस्मृति के श्लोक यत्र धर्मो ह्यधर्मेण सत्यं यत्रानृतेन च। हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः का उल्लेख किया था।

इससे पहले भी विभिन्न निर्णयों में हिन्दू धर्मग्रंथों का उल्लेख विभिन्न प्रकार से किया गया है। कभी वाल्मीकि रामायण, तो कभी श्रीरामचरित मानस से उद्धरण लेकर निर्णय सुनाते रहते हैं। यह भारतीय विचारों का सातत्य है जो निरंतर भारतीय मानस में विद्यमान है।

मनुस्मृति का ही यह श्लोक है-

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।”

जिसे अधिकांश लोग अपने भाषणों में, अपने वक्तव्यों में व्यक्त करते रहते हैं। यह भारतीय मनीषा ही है, जो किसी भी ऐसे विचार को सहज ही त्याग देती है, जो परिवर्तित होते युग में अप्रासंगिक हो गया हो। परंतु तमाम ऐसी नीतियाँ हैं, तमाम ऐसी बातें हैं, जो निरंतर हैं। वे अपरिवर्तित रहते हुए हर युग में रहती हैं, क्योंकि उनमें शाश्वत मूल्य होते हैं, जैसे मनुस्मृति के इस श्लोक में हैं

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।” 

जैसे वर्ष 2024 में सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायाधीश जस्टिस पंकज मिठाल ने भगवत गीता, श्रीरामचरित मानस, स्कन्द पुराण आदि का उल्लेख करते हुए कहा था कि भारत में कोई कास्ट व्यवस्था नहीं थी। इसके साथ ही एक और मामला आया था, जिसमें रायबरेली में अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने छोटे भाई की हत्या के मामले में बड़े भाई और उसके बेटे को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनायी थी और उसके बाद जज ने श्रीरामचरितमानस का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ सतयुग में भरत ने भाई को वनवास होने पर 14 साल तक उनकी खड़ाऊ रखकर शासन करते रहे, सिंहासन त्याग दिया और तुमने संपत्ति के लालच में छोटे भाई की हत्या कर दी।

भारतीय धर्मग्रंथ उन्हीं शाश्वत मूल्यों को समेटे हुए हैं। जो मूल्य युगानुकूल नहीं रहे, हिन्दू मानस ने उन्हें समय के प्रवाह में छोड़ दिया। परंतु ये बात कथित निष्पक्ष नहीं समझ सकते हैं, जो हिन्दू मानस से घृणा करते हैं।

Topics: DY Chandrachudकथित लिबरलHindu faithTamil Nadu templesHindu scripturesJustice Swaminathanहिंदू आस्थाManusmritiSecularismalleged liberalsधर्मनिरपेक्षताहिंदू ग्रंथतमिलनाडु मंदिरन्यायाधीश स्वामीनाथनराम मंदिरमनुस्मृतिRam templeDY चंद्रचूड़
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

Ram Mandir Donation: क्या राम मंदिर को बदनाम करने का नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा है?

मौलाना का बड़ा दावा! वक्फ बोर्ड की जांच हुई तो होगा बड़ा खुलासा?, CM Yogi को लिखी चिट्ठी

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गोविंददेव गिरी का बड़ा दावा, जानिए क्या बोले?

cm yogi adityanath

अयोध्या की आड़ में देश की अस्मिता व आस्था पर प्रहार : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

Ram Mandir

राम मंदिर को दान की गई 200 चांदी की ईंटों का सच आया सामने, दानदाता ने कहा- अब कोई सवाल नहीं

अमरनाथ यात्रा: भारत की सनातन आस्था और राष्ट्रभाव का अप्रतिम प्रतीक

Load More

ताज़ा समाचार

1996 Dausa Bus Bomb Blast Case Supreme Court Verdict Rajasthan News Abdul Hamid Justice Panchjanya

14 मौतें, 30 साल का इंतजार और फिर निराशा: आतंक के बाद भी छूट रहे हैं आतंकी, दौसा बस ब्लास्ट केस के फैसले पर बड़े सवाल!

Puri Rath Yatra Hera Panchami Gundicha Temple Adap Mandap Darshan Lord Jagannath Mata Laxmi Panchjanya

पुरी रथयात्रा: हेरा पंचमी पर गुंडिचा मंदिर में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, जानिए क्यों माता लक्ष्मी ने तोड़ा महाप्रभु का रथ

Delhi Sansad Chalo Violence Leaked WhatsApp Chats CJP JNU Sansad Chalo Briar BitChat Panchjanya

“मौत हुई तो सरकार पर बढ़ेगा प्रेशर”: CJP ‘संसद चलो’ प्रदर्शन में हिंसा की साजिश? लीक व्हाट्सएप चैट्स में बड़ा खुलासा

Delhi Jantar Mantar Protests vs National Sentiment Skyroot Vikram 1 Parliament Indian Democracy Panchjanya

क्या जंतर-मंतर पर जुटती भीड़ ही देश का सच है? जानिए विरोध प्रदर्शन और ‘राष्ट्रीय भावना’ के बीच का पूरा फर्क!

जंतर-मंतर से ग्राउंड रिपोर्ट

“लाइट, कैमरा और आंदोलन”: छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर फिर एक्टिव हुई टूलकिट? जानिए जंतर-मंतर के पीछे का पूरा सच!

Punjab and Haryana High Court PIL against Sacrilege Law 2026

पंजाब के अबोहर में लहराया भाजपा का परचम: हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा हुए चुनाव में AAP को झटका, मेयर पद पर कब्जा!

Foreign Tourists Praise India Safety Over London Phone Theft Medical Tourism Free Rabies Vaccine Digital Payment UPI Panchjanya

“लंदन से ज्यादा सुरक्षित है भारत”, विदेशी महिला पर्यटक ने सोशल मीडिया पर शेयर किया आंखों देखा सच!

प्रतीकात्मक चित्र

Madarsa Scandal: कागजों पर चल रहे मदरसे, हिंदुओं के बच्चों का दिखाया दाखिला, MP के मदरसों में बाल अधिकारों का उल्लंघन

Explainer। भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, नेपाल ने 1 रुपए के सिक्के से हटाया ‘कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा’

Uttarakhand CM Pushkar Singh Dhami Haridwar Kanwar Yatra 2026 Review Meeting Mela Bhawan Panchjanya

कांवड़ यात्रा 2026: 30 जुलाई से शुरू होगी यात्रा, हरिद्वार में सीएम धामी ने दिए सुरक्षा और सुविधाओं के सख्त निर्देश!

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies