फिर खुला खाद का खजाना
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फिर खुला खाद का खजाना

2014 से पहले भारत को लगभग 135 लाख मीट्रिक टन यूरिया खाद आयात करनी पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सिंदरी खाद कारखाने के फिर से शुरू होने पर भारत यूरिया के मामले में आत्मनिर्भर होता जा रहा है

Written byरितेश कश्यपरितेश कश्यप
Mar 13, 2024, 10:47 am IST
inविश्लेषण, झारखण्‍ड
सिंदरी खाद कारखाने का शुभारंभ करते नरेंद्र मोदी। साथ में हैं अन्य अतिथि

सिंदरी खाद कारखाने का शुभारंभ करते नरेंद्र मोदी। साथ में हैं अन्य अतिथि

गत 2 मार्च को झारखंड के सिंदरी में बंद पड़ा खाद कारखाना फिर से शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन करते हुए कहा कि यूरिया के मामले में भारत आत्मनिर्भर होने जा रहा है। बता दें कि इस खाद कारखाने का शिलान्यास 2018 में प्रधानमंत्री ने ही किया था। पुराने खाद कारखाने के स्थान पर ही हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड (हर्ल) के नाम से इसका निर्माण किया गया है। लगभग 8,500 करोड़ रु. की लागत से निर्मित हर्ल से सालाना लगभग 11.75 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा। यहां हर दिन 3,850 मीट्रिक टन यूरिया और 2,250 मीट्रिक टन अमोनियम का उत्पादन होगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री के प्रयासों से ही रामगुंडम (आं.प्र.), गोरखपुर (उ. प्र.) और बरौनी (बिहार) में खाद कारखानों की शुरुआत हुई है। सिंदरी की तरह ये कारखाने भी बंद हो गए थे। इनके शुरू होने से भारत यूरिया के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने वाला है। इस समय देश को लगभग 360 लाख मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता पड़ती है। 2014 तक भारत में 225 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होता था।

लगभग 135 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात करना पड़ता था। पिछले 10 वर्ष के दौरान भारत में यूरिया का उत्पादन 310 लाख मीट्रिक टन हो चुका है। सिंदरी के बाद तालचेर (छत्तीसगढ़) के खाद कारखाने की शुरुआत होने वाली है। इससे लगभग 60 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा। इस हिसाब से अगले वर्ष तक देश में लगभग 370 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा। ऐसे में भारत को यूरिया के मामले में अन्य देशों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन करते हुए कहा कि यूरिया के मामले में भारत आत्मनिर्भर होने जा रहा है। बता दें कि इस खाद कारखाने का शिलान्यास 2018 में प्रधानमंत्री ने ही किया था। पुराने खाद कारखाने के स्थान पर ही हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड (हर्ल) के नाम से इसका निर्माण किया गया है। लगभग 8,500 करोड़ रु. की लागत से निर्मित हर्ल से सालाना लगभग 11.75 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन होगा। यहां हर दिन 3,850 मीट्रिक टन यूरिया और 2,250 मीट्रिक टन अमोनियम का उत्पादन होगा।

नीम-युक्त यूरिया का उत्पादन

सिंदरी के कारखाने में नीम-युक्त यूरिया का उत्पादन किया जाएगा। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नीम-युक्त यूरिया सामान्य यूरिया के अनुपात में 5 से 10 प्रतिशत तक कम लगती है जिससे किसानों की लागत घटती है। खेतों में रासायनिक खादों के लगातार इस्तेमाल से जमीन के नीचे नाइट्रोजन की परत बन जाती है। इस कारण फसल मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाती है। नीम-युक्त यूरिया के इस्तेमाल से नाइट्रोजन की परत नहीं बनती है और यह भूमि के स्वास्थ्य के लिए अच्छी भी होती है।

सिंदरी खाद कारखाने का इतिहास

पुस्तक ‘सागा आफ सिंदरी’ के अनुसार खाद बनाने के लिए कोयले और पानी की उपलब्धता जरूरी है। सिंदरी में दामोदर नदी का पानी है और उससे सटे हुए इलाके झरिया में कोयले का भंडार। पानी और कोयले की उपलब्धता को देखते हुए ही 1952 में सिंदरी में भारत का पहला खाद कारखाना बना। यह कारखाना 1970 तक लगातार लाभ देता रहा। 1992 में सिंदरी खाद कारखाने को बीमार घोषित कर दिया गया। इसके बाद 31 दिसंबर, 2002 को इस कारखाने को बंद कर दिया गया।

1995 में तत्कालीन भारत सरकार ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू.टी.ओ.) के साथ संधि की। यही संधि भारत के खाद कारखानों के लिए नुकसानदेह साबित हुई। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस ओर ध्यान गया। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन लिमिटेड, कोल इंडिया लिमिटेड, इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड, फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड और हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड को मिलाकर हर्ल का निर्माण किया गया।

अब सिंदरी खाद कारखाने ने रोजगार के अवसर बढ़ा दिए हैं। इससे यहां के लोग बेहद खुश हैं।

Topics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीNational Thermal Power Corporation LimitedPrime Minister Narendra ModiCoal India Limitedहिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेडIndian Oil Corporation Limitedनीम-युक्त यूरियाFertilizer Corporation of India Limitedनेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन लिमिटेडHindustan Fertilizer Corporation Limitedकोल इंडिया लिमिटेडइंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेडफर्टिलाइजर कॉरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेडहिंदुस्तान फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेडHindustan Urvarak Rasayan LimitedNeem-rich Urea
रितेश कश्यप
रितेश कश्यप
डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। राजनीति, सामाजिक और सम-सामायिक मुद्दों पर पैनी नजर। कर्मभूमि झारखंड।   [Read more]
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