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प्रतिकूल वातावरण के बावजूद अपनी प्राचीन परंपराओं को जीवित रखने का करें प्रयास : सरसंघचालक

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने 30 से अधिक देशों की 33 से अधिक प्राचीन परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाली परंपराओं और संस्कृतियों के बुजुर्गों को बधाई दी

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 28, 2024, 07:04 pm IST
in असम, संघ @100

डिब्रूगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि लोग “हम और वे, हमारे और उनके” में विभाजित हैं। जो लोग इन समूहों से परे जाना चाहते हैं और मानवता को बचाना चाहते हैं, वे अंत में एक अलग समूह बन जाते हैं।

डॉ. भागवत आज इंटरनेशनल सेंटर फॉर कल्चरल स्टडीज के तत्वावधान में “प्राचीन परंपराओं और संस्कृतियों के बुजुर्ग” विषयक पांच दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन डिब्रूगढ़ स्थित वैली स्कूल परिसर में किया गया है। संघ प्रमुख ने 30 से अधिक देशों की 33 से अधिक प्राचीन परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाली परंपराओं और संस्कृतियों के बुजुर्गों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वे अपने आसपास अत्यधिक आक्रामक वातावरण के बावजूद अपने प्राचीन परंपराओं एवं विश्वासों को जीवित रखने का प्रयास करें; क्योंकि दुनिया को अब उनके ज्ञान की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि दो हजार साल की प्रगति और भौतिक समृद्धि के बावजूद, दुनिया संघर्षों का सामना कर रही है। बाहर या भीतर कोई शांति नहीं है। बच्चे बंदूक के साथ स्कूलों में जाते हैं और बिना किसी स्पष्ट कारण के लोगों को गोली मार देते हैं। ईर्ष्या और अहंकार है और मन की संकीर्णता के कारण संघर्ष है, जहां लोग “हम और वे, हमारे और उनके” में विभाजित हैं। जो लोग इन समूहों से परे जाना चाहते हैं और मानवता को बचाना चाहते हैं, वे अंत में एक अलग समूह बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि नेता और विचारक पर्यावरण बचाने की बात करते रहे हैं लेकिन बातचीत के अलावा कुछ भी ठोस नहीं हुआ है।

उन्होंने बताया कि कैसे 1951 में संयुक्त राष्ट्र के एक प्रस्ताव में प्राचीन दर्शन को खत्म करने और तेजी से आर्थिक प्रगति के एक लक्ष्य के लिए पुरानी सामाजिक संस्थाओं के विघटन के बारे में बात की गई थी। डॉ. भागवत ने कहा कि इसे स्वीकार करना पड़ा कि वैश्विक विकास के लिए विकास की नीतियों में संस्कृति का एकीकरण आवश्यक था। हम, विभिन्न परंपराओं से संबंधित प्राचीन ज्ञान प्रणालियों को जानते थे।

सरसंघचालक डॉ. भागवत ने एक कहानी का जिक्र किया, जिसका सबक यह था कि सही ज्ञान के साथ, हम एक साथ आ सकते हैं और स्थिति को बदल सकते हैं और संघर्षों एवं पर्यावरणीय आपदा से मुक्त एक नई दुनिया बना सकते हैं। एक ऐसी दुनिया जिसमें प्राचीन ज्ञान के साथ शांति भी हो।

(सौजन्य सिंडिकेट फीड)

Topics: इंटरनेशनल सेंटर फॉर कल्चरल स्टडीजInternational Center for Cultural Studiesअसम में सरसंघचालकराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघSarsanghchalak in AssamRashtriya Swayamsevak Sanghअसम समाचारassam newsसरसंघचालकSarsanghchalakमोहन भागवतMohan Bhagwat
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