देहरादून: उत्तराखंड में धामी सरकार अपने पहले वायदे समान नागरिक संहिता को राज्य में लागू करने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है। सूत्र बताते है कि 22 जनवरी के बाद ये बिल उत्तराखंड विधानसभा में कभी भी रखा जा सकता है और इसके लिए विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया जा सकता है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड उत्तराखंड में लागू किए जाने का वायदा, बीजेपी की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान किया था और इस संकल्प को राष्ट्रीय राजनीति में ये प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा था।
अपने दूसरे कार्यकाल में धामी सरकार ने शपथ लेते ही, अपनी पहली कैबिनेट बैठक में इस कानून को लागू करने का निर्णय लिया था। इसके बाद पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर यूसीसी के बिल का ड्राफ्ट बनाने का फैसला किया था।
अब रंजना देसाई कमेटी ने विभिन्न माध्यमों से हजारों लोगों की राय जानने के बाद अपना ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक संभवत इसी माह में ये ड्राफ्ट उत्तराखंड सरकार को सौंप दिया जाएगा और इसके बाद शासन द्वारा इसका विधिक परीक्षण कराया जाएगा। जिसके बाद धामी सरकार इसे विधानसभा में पास करने के लिए लाएगी, जहां उसे इस कानून बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत है।
ऐसा माना जा रहा है कि श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम 22 जनवरी के बाद इसे विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। संभवत इसके लिए विधानसभा का सत्र आहूत किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, यूसीसी का बिल शीघ्र लाने के लिए बार-बार संकेत दे रहे हैं, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद मीडिया के साथ संवाद में वे ये कहते सुने गए हैं कि शीघ्र ही देसाई कमेटी का ड्राफ्ट हमें मिलने वाला है।
ऐसा माना जा रहा है कि धामी को पार्टी हाई कमान की हरी झंडी भी इस बारे में मिल चुकी है, हाल ही में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी समिट में आए थे। संभवत मुख्यमंत्री धामी ने इस बारे में उनसे भी सहमति ले ली है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड ऐसा बिल है जिसके उत्तराखंड विधानसभा में आते ही, इस पर राष्ट्रीय बहस छिड़ जानी है, यूसीसी बिल को राजनीतिक समीक्षक उत्तराखंड में लागू करने को एक प्रयोग के रूप में देखेंगे क्योंकि समान नागरिक संहिता एक बार फिर से ‘एक देश एक कानून’ की अवधारणा को परिभाषित करेगा जोकि भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) का बीते कई सालों से एक वायदा रहा है। धारा 370 पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग जाने से ‘एक देश एक कानून’ की अवधारणा को भी मजबूत किया है। इसी कड़ी में समान नागरिक संहिता कानून को देखा जा रहा है।
ऐसा माना जा रहा है कि उत्तराखंड के बाद बीजेपी के अन्य शासित राज्य भी लोकसभा चुनाव से पहले अपने यहां इसे लागू कर सकते हैं, ऐसे में उत्तराखंड यूसीसी बिल सभी बीजेपी राज्यों के लिए एक उदाहरण पेश करेगा।
समान नागरिक संहिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी बार-बार केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देशित कर चुका है, उत्तराखंड सरकार ने इन्ही निर्देशों को दृष्टिगत रखते हुए अपने राज्य में इसे लागू करने का निर्णय लिया है।
क्या कहते हैं सीएम पुष्कर धामी ?
यूनिफॉर्म सिविल कोड को उत्तराखंड में लागू करने का वायदा हमने पिछले विधानसभा चुनाव से पूर्व किया था। हमें इसके लिए जनादेश मिला है, पूर्व जस्टिस रंजना देसाई कमेटी की रिपोर्ट हमें मिलने वाली है इसका विधिक परीक्षण के लिए हमारी सरकार तैयार है उसके बाद हम यूसीसी बिल को विधानसभा में पास करवाएंगे। हम इसके लिए वचनबद्ध है।

















