खालिस्तान संघर्ष में 21वीं सदी के बदलते हुए भारत का स्वागत
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खालिस्तान संघर्ष में 21वीं सदी के बदलते हुए भारत का स्वागत

ट्रूडो को अब अंदाजा हो गया होगा कि खालिस्तानी आतंकियों के साथ खड़े होकर गलत रास्ते पर निकल गए हैं

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु'
Sep 22, 2023, 07:40 pm IST
in मत अभिमत

आशीष कुमार ‘अंशु’

कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर विवाद अभी थमा भी नहीं था कि कनाडा से ही अब दूसरी बड़ी वारदात सामने आई है। दोनों देशों के बीच तनाव उस समय पहले ही बढ़ गया था, जब कनाडा के पीएम ने खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था। उस मामले में कनाडा अपने बयान के पक्ष में कोई प्रमाण नहीं दे पाया है।

अब पंजाब के सर्वाधिक वांछित अपराधियों में से एक गैंगस्टर सुखदुल सिंह उर्फ सुक्खा दुनेके की कनाडा के ही विनिपेग शहर में हत्या कर दी गई है। भारतीय समय के अनुसार यह सुबह 9:30 बजे की घटना है। सुक्खा पर 18 अपराध भारत में पंजीकृत थे। एनआईए को उसकी तलाश थी। 2017 में वह पुलिस और जांच एजेन्सियों को चकमा देकर कनाडा भाग गया था। वह खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह के लिए काम करता था। इस हत्याकांड की पूरी जिम्मेवारी सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली है। बिश्नोई गैंग ने लिखा — हमारे भाई गुरलाल बराड़, विक्की मिद्दुखेड़ा के मर्डर में इस (सुक्खा) ने बाहर बैठकर सबकुछ किया। संदीप नंगल अंबिया का मर्डर भी इसने करवाया था, पर अब इसके किए हुए पापों की सजा उसे मिल गई है।

कनाडा में छुपते रहे, वे भारत में अपराध करके

कनाडा को खालिस्तान समर्थक आतंकी दशकों से एक सुरक्षित पनाहगार के तौर पर इस्तेमाल करते आ रहे हैं। भारत में अपराध करके वे कनाडा में छुपते रहे या फिर कनाडा में बैठकर उन्होंने भारत के अंदर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की। सीएए का आंदोलन हो या फिर किसान आंदोलन, दोनों में खालिस्तान समर्थकों की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता।

कनाडा का खालिस्तान समर्थन ही भारत के साथ उसके तनावपूर्ण रिश्ते की वजह बना है। इस बढ़ते हुए तनाव की वजह से ही दोनों ने एक दूसरे देशों के राजनयिकों को पहले सस्पेंड किया। उसके बाद भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं को अनिश्चित काल के लिए निलंबित कर दिया है। 21 सितम्बर से अगली सूचना तक भारत की वीजा संबंधी गतिविधियों को निलंबित किया गया है। कोरोना काल खत्म होने के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने वीजा निलंबित किया हो। अब कनाडा के नागरिकों को भारत का वीजा नहीं मिलेगा। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि कनाडा के ओटावा में भारत उच्चायोग और टोरंटो के भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों को लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है। चूंकि ऐसे माहौल में काम करना मुश्किल है इसलिए भारत ने कनाडा में दी जाने वाली सारी वीजा सेवाएं स्थायी रूप से निलंबित कर दी है।

क्या कनाडा के पीएम को हुआ गलती का एहसास

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से सह मिलने के बाद खालिस्तानियों का हौसला अधिक बढ़ा है। अब गेंद उनकी सरकार के पाले में है, जो अपने देश में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को सुरक्षा देने में नाकाम साबित हुई है। कनाडा में खालिस्तानियों का हौसला इतना बुलंद है कि वे खुलेआम धमकी दे रहे हैं और वहां की सरकार किसी तरह की कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं है। पूरी दुनिया के साथ-साथ कनाडा के नागरिकों की नजर भी इस पूरे घटनाक्रम पर है, क्या वे अगले चुनाव में आतंकियों को पनाह देने वाले एक प्रधानमंत्री के साथ खड़ा होना पसंद करेंगे? ट्रूडो को अब अंदाजा हो गया होगा कि खालिस्तानी आतंकियों के साथ खड़े होकर गलत रास्ते पर निकल गए हैं। इसी का परिणाम था कि इस पूरे मामले में उन्हें पश्चिमी देशों का साथ भी नहीं मिला। वे पूरी तरह अलग थलग पर गए हैं। कनाडा के अंदर विपक्ष भी उनसे सवाल पूछ रहा है।

यहां जानना महत्वपूर्ण है कि वीजा से जुड़ी सारी शर्ते कनाडाई नागरिकों के लिए है। भारत का नागरिक जिसके पास यहां का पासपोर्ट है, वह बिना किसी असुविधा के भारत से कनाडा जा सकता है और वहां से वापस आ सकता है। जिन कनाडाई नागरिक का वीजा पहले जारी हो चुका है, उन्हें भी यात्रा में कोई असुविधा नहीं होगी। किसी देश का वीजा स्थगित करना बहुत बड़ा कूटनीतिक निर्णय होता है। इससे पहले भारत ने चीन और पाकिस्तान के संबंध में ऐसे निर्णय लिए हैं। अब भारत की दृष्टी में कनाडा भी इन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

कनाडा के हिन्दू सांसद का बयान

खालिस्तान से जुड़े मामले पर कनाडा के सांसद चन्द्र आर्य का बयान सामने आया है। आर्य के अनुसार , ”कुछ दिनों पहले कनाडा में खालिस्तानी नेता और कथित जनमत संग्रह का आयोजन करने वाले सिख फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने हिन्दू कनाडाई लोगों पर निशाना साधा और हमें कनाडा छोड़ने और भारत वापस जाने के लिए कहा। मैंने कई हिन्दू कनाडाई लोगों से सुना है, जो हमला होने के खतरे से डरे हुए हैं। मैं हिन्दू कनाडाई लोगों से शांत लेकिन सतर्क रहने की अपील करता हूं, हमारे ज्यादातर सिख भाई-बहन खालिस्तान आंदोलन के समर्थक नहीं है। कनाडा में रहने वाले ज्यादातर सिख कई वजहों से खालिस्तान आंदोलन की सार्वजनिक तौर पर निंदा नहीं कर पाते हैं। लेकिन वे कनाडा के हिंदू समुदाय से गहराई से जुड़े हैं।”

आईएसआई की फंडिंग

खालिस्तान पर भारतीय खुफिया एजेन्सियों के हवाले से एक बड़ी जानकारी सामने आई है। जो सबकुछ जानकर अनजान बने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को कठिनाई में डाल सकती है। कनाडा में मौजूद खालिस्तान और पाकिस्तान के लिंक पर बड़ा खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेन्सी आईएसआई कनाडा में खालिस्तानियों की फंडिंग कर रही है। पिछले कुछ महीनों में कनाडा में रहने वाले खालिस्तान प्रमुखों को बड़ी मात्रा में वहां से फंडिंग हुई। फंडिंग के जरिए भारत में भारत विरोधी गतिविधि तेज करने की कोशिश हो रही है। फंडिंग का इस्तेमाल भारत के खिलाफ युवाओं को भड़काने में किया जा रहा है। कनाडा में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को भी भड़काया जा रहा है। कनाडा के युवाओं को खालिस्तानी साजिश में शामिल किया जा रहा है। इस पूरे षडयंत्र में कनाडा में रहने वाले 20 से अधिक खालिस्तानी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार खालिस्तानियों को कई देशों से पैसा और हथियार की मदद मिल रही है। उन्हें कनाडा, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया जर्मनी और अमेरिका से सबसे अधिक फंडिंग होती है।

यह नया भारत है

इक्कीसवीं सदी का भारत अपनी शर्तों पर काम करता हुआ दिखाई दे रहा है। इस पर किसी बड़े से बड़े देश का दबाव काम नहीं कर रहा। अब हमारा देश आंतरिक सुरक्षा में हस्तक्षेप करने वालों को कड़ी प्रतिक्रिया दे रहा है। इससे पहले पाकिस्तान के मामले में हमने हर बार नर्मी से पूरे मामले को सुलझाने की कोशिश की और वह नर्मी पूरे देश के लिए आज नासूर बन चुका है। शुक्र है कि इस समय खालिस्तानियों को संरक्षण देने के मामले में हम कनाडा की सरकार के सामने अमन की आशा का कैंडल लेकर नहीं खड़े। भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से कनाडा को साफ शब्दों में बताया गया है कि उनकी तरफ से लगाया गया हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप बेबुनियाद है। दूसरी तरफ यह सच है कि कनाडा खालिस्तानी आतंकियों को शरण दे रहा है और खालिस्तानी आतंकवादियों के प्रत्यर्पण की भारत की अपील पर सहयोग नहीं कर रहा।

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आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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