बिश्नोई गैंग पर रोक, तो खालिस्तानियों पर क्यों नहीं? क्या खालिस्तानियों के कहने पर Canada ने लगाई 'बिश्नोई' पर पाबंदी?
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बिश्नोई गैंग पर रोक, तो खालिस्तानियों पर क्यों नहीं? क्या खालिस्तानियों के कहने पर Canada ने लगाई ‘बिश्नोई’ पर पाबंदी?

अगर कनाडा वास्तव में 'आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति' अपनाना चाहता है, तो उसे सभी प्रकार के चरमपंथी समूहों, चाहे वे बिश्नोई गैंग हो या खालिस्तानी गुट, सभी पर समान रूप से कार्रवाई करनी होगी

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Oct 1, 2025, 12:17 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
बिश्नोई (बाएं) गैंग पर आरोप था कि उसने खालिस्तानी आतंकी 'निज्जर (दाएं) की हत्या की योजना' बनाई थी

बिश्नोई (बाएं) गैंग पर आरोप था कि उसने खालिस्तानी आतंकी 'निज्जर (दाएं) की हत्या की योजना' बनाई थी

कनाडा में खालिस्तानियों की भारत विरोधी ही नहीं, सिख पंथ विरोधी हरकतें दिनोंदिन बढ़ती गई हैं। पिछली त्रूदो सरकार के कार्यकाल में तो उनके समर्थन से खालिस्तान को पोषण देने वाली पार्टी सरकार में भागीदार तक बनी हुई थी। लेकिन अंतत: खालिस्तानियों के समर्थन पर कायम रहे नेता जगमीत सिंह को सरकार से ही बाहर नहीं जाना पड़ा बल्कि उनकी पार्टी की चुनाव में ऐसी दुर्दशा हुई कि पार्टी का ‘राष्ट्रीय’ दर्जा भी निरस्त हो गया। ताजा खबर यह है कि कनाडा की वर्तमान कार्नी सरकार ने भारत में कुख्यात और प्रतिबंधित बिश्नोई गैंग को तो ‘आतंकी संगठन’ घोषित करके उसक पर प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन सवाल है कि खालिस्तानी समूहों द्वारा सार्वजनिक रूप से फैलाए जा रहे आतंक को देखते हुए उस पर ऐसी कोई कार्रवाई अब तक न होने से सवाल उठ रहे हैं। कार्नी सरकार की नीति की दोहरी प्रकृति का सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हो रहा है और खालिस्तानी समूहों पर भी रोक लगाने की मांग की जा रही है।

गत 29 सितंबर को कनाडा सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आधिकारिक रूप से आतंकी संगठन घोषित किया था। यह निर्णय ‘क्रिमिनल कोड ऑफ कनाडा’ के तहत लिया गया था, जिससे इस गैंग की संपत्तियों को जब्त करने, फंडिंग रोकने और इसके सदस्यों की गतिविधियों पर कानूनी शिकंजा कसने का रास्ता खुल गया है।

भारत ने एक नहीं, अनेक बार कनाडा में भारत विरोधी ‘खालिस्तानी गतिविधियों’ पर चिंता जताई है

बिश्नोई गैंग पर आरोप हैं कि वह भारत और कनाडा में हत्या, आगजनी, जबरन वसूली और पांथिक भय फैलाने जैसी गतिविधियों में लिप्त है। कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी दावा किया कि ‘यह गैंग कनाडा में सिख समुदाय के भीतर खालिस्तान समर्थकों को निशाना बना रहा था’।

लेकिन स्वाभाविक तौर पर कनाडा सरकार के इस कदम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि अगर बिश्नोई गैंग को आतंकी घोषित किया जा सकता है, तो कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी समूहों पर वैसी ही कार्रवाई क्यों नहीं की जा सकती या की गई है? जैसा पहले बताया, कनाडा में कई खालिस्तानी संगठन खुलेआम भारत विरोधी रैलियां, हिंसक बयानबाजी और भारतीय राजनयिकों को धमकाने जैसी गतिविधियां करते रहे हैं। बदनाम चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन त्रूदो ने भारत पर तथ्यहीन आरोप लगाए थे कि ‘इस कांड में भारतीय एजेंसियां शामिल थीं’।

दरअसल कनाडा सरकार द्वारा अलगाववादी और हिंसक खालिस्तानी तत्वों पर किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई से बचने के पीछे सबसे बड़ी वजह यही दिखती है कि उस देश में पंजाबी सिख समुदाय एक बड़ा वोट बैंक माना जाता है। खासकर ब्रिटिश कोलंबिया और ओंटारियो जैसे प्रांतों में बड़ी संख्या में सिख रहते हैं। कथित तौर पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के पैसे पर भारत विरोधी हरकतों में लिप्त कट्टर खालिस्तानी सोच से जुड़े कुछ हिंसक गुूट वहां बसे भारतभक्त सिख समुदाय में अपनी पैठ बढ़ाने में लगे हैं। ऐसे में कनाडा की सरकार पर अगर ये आरोप लगते हैं कि वह राजनीतिक लाभ पाने के लिए इन समूहों पर कार्रवाई से बचती है, तो इन आरोपों में कुछ गलत भी नहीं लगता।

पूर्ववर्ती जस्टिन त्रूदो सरकार की भारत विरोधी नीतियों की वजह से भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव चरत तक पहुंच चुके थे, लेकिन कार्नी सरकार ने अपने कार्यकाल की शुरुआत में भारत के पक्ष में कदम उठाने का इशारा दिया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि, इस वजह से राजनयिक स्तर पर तनाव कुछ कम होता दिखा था। खालिस्तानी मुद्दे पर सख्त कार्रवाई करने पर कार्नी सरकार को भारत के साथ संबंध सुधारने का दबाव महसूस हुआ होगा, साथ ही, प्रधानमंत्री कार्नी को देश की आंतरिक राजनीति के साथ संतुलन बिठाना पड़ रहा है।

लेकिन साथ ही कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि बिश्नोई गैंग को ‘आतंकी संगठन’ घोषित करना राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। बिश्नोई गैंग पर आरोप था कि उसने खालिस्तानी आतंकी ‘निज्जर की हत्या की योजना’ बनाई थी।ऐसे में बिश्नोई गैंग पर कार्रवाई करके कनाडा सरकार संभवत: खालिस्तानी समूहों को ‘पीड़ित’ के रूप में दिखा सकती है, जिससे उनको पाक—साफ दिखाया जा सके।

कनाडा में कई खालिस्तानी संगठन खुलेआम भारत विरोधी रैलियां, हिंसक बयानबाजी और भारतीय राजनयिकों को धमकाने जैसी गतिविधियां करते रहे हैं (File Photo)

भारत ने एक नहीं, अनेक बार कनाडा में भारत विरोधी ‘खालिस्तानी गतिविधियों’ पर चिंता जताई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गत दिनों कनाडा में अपनी समकक्ष अनिता आनंद से इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा भी की है। भारत सरकार चाहती है कि कनाडा सभी चरमपंथी समूहों पर समान रूप से कार्रवाई करे, न कि इसमें ‘सेलेक्टिव एप्रोच’ दिखाए।

कनाडा सरकार द्वारा बिश्नोई गैंग के बरअक्स खालिस्तानी समूहों पर नरमी दिखाना भले उसके राजनीतिक संतुलन की मजबूरी हो, लेकिन इससे उसका दिमागिया दोहरेपन उजागर होता है। ऐसा रहा तो भारत-कनाडा संबंधों पर उलटा प्रभाव पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर कनाडा वास्तव में ‘आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति’ अपनाना चाहता है, तो उसे सभी प्रकार के चरमपंथी समूहों, चाहे वे बिश्नोई गैंग हो या खालिस्तानी गुट, सभी पर समान रूप से कार्रवाई करनी होगी।

Topics: foreign relationsबिश्नोई गैंगIndiakhalistan terror in canadaखालिस्तानbishnoi gangdiplomacyभारत-कनाडा संबंध
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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