भारत ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) को नई दिल्ली आमंत्रित किया है ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात कर दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत किया जा सके। यह मुलाकात नए साल की शुरुआत में होने की उम्मीद है और इससे भारत-कनाडा के बीच एक व्यापक आर्थिक और मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) का रास्ता खुल सकता है। उधर, इस खबर के बाद कनाडा सहित अन्य देशों में बैठे खालिस्तानी कट्टरपंथियों के तन बदन में खूब आग लगी हुई है चूंकि वे लोग नहीं चाहते कि कनाडा व भारत के आपसी संबंधों में कोई सुधार हो क्योंकि इससे उनकी रोटी-रोज़ी पर खूब असर पड़ना लाज़मी है लेकिन बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी इस वक्त कनाडा के हितों को प्राथमिकता देते हुए खालिस्तानी कट्टरपंथियों पर धीरे-धीरे शिकंजा कस रहे हैं।
रिश्ते सुधारने के लिए गंभीर हैं दोनों देश
भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश कुमार पटनायक ने द ग्लोब एंड मेल को दिए साक्षात्कार में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री कार्नी दोनों ही इस रिश्ते को फिर से सुधारने के लिए गंभीर हैं। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में कूटनीतिक तनाव रहा है, खासकर तब जब 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर खालिस्तानी कट्टरपंथी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भूमिका निभाने का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया था। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया, जिससे संबंध काफी बिगड़ गए थे।
अब हालात सुधरने लगे हैं। जून 2025 में अल्बर्टा में जी7 (G7) शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और कार्नी की मुलाकात हुई थी, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय बातचीत जारी है। पटनायक ने बताया कि गर्मियों से ही दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के बीच संवाद चल रहा है ताकि भरोसा बहाल किया जा सके और आर्थिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
AI समिट में शामिल हो सकते हैं कार्नी
भारत ने मार्क कार्नी को फरवरी में नई दिल्ली में होने वाले Artificial Intelligence Action Summit में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। अगर कार्नी आते हैं, तो मोदी उनसे व्यापारिक साझेदारी और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर भी चर्चा करेंगे। पटनायक के अनुसार, अगर सब कुछ ठीक रहा तो यह मुलाकात मार्च से पहले हो सकती है।
वर्तमान में भारत और कनाडा के बीच व्यापार 23.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जो 2023 के मुकाबले लगभग दोगुना है। पटनायक का कहना है कि यदि दोनों देश मुक्त व्यापार समझौता कर लें, तो यह व्यापार 50 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा हो सकता है।
भारत को कनाडा से तेल, गैस, परमाणु ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, उर्वरक, प्रोसेस्ड फूड और कृषि उत्पादों की खरीद में दिलचस्पी है। इसके अलावा, भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना चाहता है। वहीं, कनाडाई कैनोला (canola oil) भारत के विशाल खाद्य तेल बाजार में प्रवेश कर सकता है, जिससे कनाडा की चीन पर निर्भरता कम होगी — क्योंकि चीन ने हाल ही में कनाडाई कैनोला पर पाबंदी लगाई है।
हालांकि, पटनायक ने कहा कि इसके लिए कनाडा को भारत में जागरूकता फैलाने और मार्केटिंग अभियान चलाने की जरूरत होगी क्योंकि भारतीय उपभोक्ता सरसों, सूरजमुखी, पाम या राई के तेल को ज्यादा पसंद करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत कनाडा के ऊर्जा और खनिज क्षेत्रों में निवेश करने के लिए तैयार है, लेकिन कनाडा को निवेश के लिए स्पष्ट नीतियां, पर्यावरण मानक और आदिवासी भूमि (Indigenous land) से जुड़े नियम तय करने होंगे। “हम कनाडा में निवेश करने को तैयार हैं, लेकिन उसके लिए एक अनुकूल वातावरण बनाना होगा,” उन्होंने कहा।
पटनायक ने यह भी जोड़ा कि भारत इंतजार कर रहा है कि कनाडा भारत के साथ व्यापारिक रूप से जुड़ने के लिए आगे बढ़े, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो भारत दूसरे देशों से साझेदारी करेगा। “भारत का बाजार इंतजार नहीं करता,” उन्होंने कहा।
कनाडा की विदेशमंत्री कर चुकी हैं भारत दौरा
हाल ही में कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनन्द की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कानून प्रवर्तन और कानून के शासन से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे भविष्य में व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने की नींव रखी गई है।
इसके अलावा, भारत और कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों के बीच अब सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ रहा है। भारतीय पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां अब RCMP और कनाडा की खुफिया एजेंसी (CSIS) के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
हालांकि, पटनायक ने यह मानने से इंकार किया कि भारत का हरदीप सिंह निज्जर की हत्या या कनाडा में किसी भी प्रकार की विदेशी हस्तक्षेप गतिविधियों में कोई हाथ है। उनका आरोप है कि कनाडा कुछ अलगाववादियों की गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगा रहा, जो खालिस्तान की मांग कर रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाल ही में एक कनाडाई खालिस्तानी समर्थक के घर से 72 हथियार बरामद हुए, लेकिन वह व्यक्ति फिर कनाडा लौट गया।
पटनायक ने कहा कि भारत और कनाडा को एक स्पष्ट सुरक्षा संवाद स्थापित करना चाहिए, क्योंकि अब तक कनाडा भारत पर लगे आरोपों के प्रमाण को पर्याप्त मानता है, लेकिन भारत के पास मौजूद सबूतों को नजरअंदाज कर देता है।
उन्होंने कहा, “आपके सबूत पर्याप्त हैं, लेकिन हमारे सबूत नहीं ? हमें बातचीत करनी होगी और सुरक्षा के मुद्दों पर खुलकर चर्चा करनी होगी।”
















