देश में अब गलत पहचान बताकर यौन संबंध बनाने को अपराध की श्रेणी में लाया गया है। केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में प्रस्तावित कानूनों में से एक में पहचान छिपाकर शादी करने या फिर यौन संबंध बनाने पर भी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। लव जिहाद के खिलाफ ये केंद्र का बड़ा कदम है।
इस कानून के तहत आरोपी को 10 साल की सजा हो सकती है। इस प्रस्तावित कानून पर विशेषज्ञों की माने तो मोदी सरकार ‘लव जिहाद’ के खिलाफ कड़ा कानून ला रही है। क्योंकि जो लोग अपनी असल पहचान छिपाकर शादी कर लेते हैं, इस कानून के जरिए उन पर शिकंजा कसा जाएगा और उन्हें कड़ी सजा मिलेगी। केंद्र सरकार ने भारतीय न्याय संहिता बिल पेश किया है, जो भारतीय दंड संहिता की जगह लेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लोकसभा में भारतीय दंड संहिता को बदलने के लिए भारतीय न्याय संहिता विधेयक पेश किया। इस कानून को लेकर गृह मंत्री अमित शाह ने जानकारी देते हुए बताया था कि गलत पहचान बताकर, शादी, रोजगार और पदोन्नति का झांसा देकर महिलाओं के साथ यौन संबंध बनाने को नए प्रस्तावित कानून के तहत अपराध की श्रेणी में लाया जाएगा। उन पर भारत में पहली बार नई दंड संहिता के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित प्रावधानों पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में महिलाओं के खिलाफ अपराध और उनके सामने आने वाली कई सामाजिक समस्याओं का समाधान किया गया है।
क्या कहा गया नए प्रावधान में ?
नए प्रावधान में कहा गया है कि IPC की धारा 69 के अंतर्गत जो कोई भी धोखे से या किसी महिला से बिना किसी इरादे के शादी का वादा करता है और यौन संबंध बनाता है, तो ऐसा यौन संबंध दुष्कर्म के अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। इसमें किसी एक अवधि के लिए जेल भेजा जाएगा, जिसकी अवधि 10 साल तक बढ़ाई जा सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। धारा-69 को धोखाधड़ी से रोजगार या पदोन्नति का झूठा वादा, प्रलोभन या पहचान छिपाकर शादी करने के तौर पर परिभाषित किया गया है। वहीं जहां एक तरफ भारतीय दंड संहिता में ऐसे अपराध से निपटने के लिए कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं था, दूसरी तरफ धारा-90 के मुताबिक अगर किसी महिला को तथ्य की गलत जानकारी है, तो यह नहीं कहा जा सकता कि उसने यौन संबंध के लिए सहमति दी है।
‘इस तरह के कृत्यों को पहली बार अपराध की श्रेणी में ला रहे’
संसद में इस विधेयक को पेश करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ऐसे लोग रहे, जिन्होंने यौन संबंध बनाने के लिए गलत पहचान बताई, लेकिन पहली बार नरेंद्र मोदी सरकार इसे अपराध की श्रेणी में ला रही है। ऐसे कई मामले प्रकाश में आए हैं, जहां महिलाएं सहमति से बने रिश्ते में शादी के वादे पर यौन संबंध बनाने के लिए स्वीकृति देती हैं, या जिस शख्स के साथ वे संबंध में हैं, उसकी उम्र, वैवाहिक स्थिति या अन्य पहचान के बारे में उन्हें गलत जानकारी दी गई दी गई होती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जहां आरोपियों ने अपनी पहचान और धर्म के बारे में झूठ बोला है और अपनी असली पहचान छिपाई है। ऐसी परिस्थिति में यौन संबंध के लिए सहमति दिए जाने के भी दावे किए गए हैं।

















