किसी मंदिर से कम नहीं है गीता प्रेस : प्रधानमंत्री मोदी
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किसी मंदिर से कम नहीं है गीता प्रेस : प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गीता प्रेस विश्व का इकलौता प्रिटिंग प्रेस है जो सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि जीवंत आस्था है

Written byलखनऊ ब्यूरोलखनऊ ब्यूरो
Jul 8, 2023, 01:29 pm IST
inभारत, उत्तर प्रदेश
गीताप्रेस के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

गीताप्रेस के शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

गोरखपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गीता प्रेस विश्व का इकलौता प्रिटिंग प्रेस है जो सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि जीवंत आस्था है। गुरु गोरखनाथ जी की तपोस्थली और अनेक संतो की कर्मस्थली के साथ गीता प्रेस की धरा गोरखपुर पर जब संतों का अशीर्वाद फलीभूत होता है, तब इस तरह के सुखद अवसर का लाभ मिलता है। यह विकास और विरासत की नीति का एक अद्भुत उदाहरण है।

पीएम मोदी शुक्रवार दोपहर बाद धार्मिक, आध्यात्मिक पुस्तकों के प्रकाशन की विश्व प्रसिद्ध संस्था गीता प्रेस के शताब्दी वर्ष समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गीता प्रेस का कार्यालय करोड़ों लोगों के लिए किसी भी मंदिर से कम नहीं है। इसके नाम में भी गीता है और इसके काम में भी गीता है। जहां पर गीता है वहां पर साक्षात कृष्ण हैं। जहां कृष्ण हैं वहां करूणा भी है और कर्म भी। वहां ज्ञान का बोध भी है और विज्ञान का शोध भी। क्योंकि गीता का वाक्य है कि सबकुछ वासुदेव में है, सबकुछ वासुदेव से ही है । उन्होंने कहा कि 1923 में गीता प्रेस के रूप में जो आध्यात्मिक ज्योति प्रज्वलित हुई, आज उसका प्रकाश पूरी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य है कि हम सभी इस मानवीय मिशन की शताब्दी के साक्षी बन रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर ही हमारी सरकार ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार भी दिया है। गांधी जी का गीता प्रेस से भावानात्मक जुड़ाव था। एक समय में गांधी जी कल्याण पत्रिका के माध्यम से गीता प्रेस के लिये लिखा करते थे। और, गांधी जी ने सुझाव दिया था कि कल्याण पत्रिका में विज्ञापन न छापे जाएं। संस्था गांधी जी के उस सुझाव का शत प्रतिशत अनुसरण कर रही है। आज जो पुरस्कार गीता प्रेस को मिला है वह देश की ओर से गीता प्रेस, इसके योगदान और इसके 100 वर्षो की विरासत का सम्मान है।

पीएम मोदी ने कहा कि 100 वर्षो में गीता प्रेस के द्वारा करोड़ों किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। यह संख्या किसी को भी हैरान कर सकती है। यहां प्रकाशित पुस्तकें लागत से भी कम मूल्य पर बिकती हैं तथा घर घर पहुचांई जाती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गीता प्रेस जैसी संस्था सिर्फ धर्म व कर्म से ही नहीं जुड़ी है बल्कि इसका एक राष्ट्रीय चरित्र भी है। गीता प्रेस भारत को जोड़ती है। भारत की एकजुटता को सशक्त करती है। देश भर में इसकी 20 शाखाएं हैं। देश के हर कोने में रेलवे स्टेशनों पर गीता प्रेस का स्टाल देखने को मिलता है। 15 अलग अलग भाषाओं में यहां से करीब 1600 प्रकाशन होते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गीता प्रेस अलग अलग भाषाओं में भारत के मूल चितंन को जन जन तक पहुंचाती है। गीता एक तरह से एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को प्रतिनिधित्व देती है। गीता प्रेस ने अपने 100 वर्षों की यह यात्रा एक ऐसे समय में पूरी की है जब देश अपनी आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है। इस तरह के योग केवल संयोग नही होते। 1947 के पहले भारत में निरंतर अपने पुनर्जागरण के लिये अलग अलग क्षेत्रों में प्रयास किये। अलग अलग संस्थाओं ने भारत की आत्मा को जगाने के लिये आकार लिया। इसी का परिणाम है था कि 1947 आते आते भारत मन और मानस से गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने के लिये पूरी तरह तैयार हुआ। गीता प्रेस की स्थापना भी उसका एक बहुत बड़ा आधार बना।

100 साल पहले का ऐसा समय जब सदियों की गुलामी ने भारत की चेतना को धूमिल कर दिया। इससे भी सैकड़ों साल पहले विदेशी आक्रांताओं ने हमारे पुस्तकालयों को जलाया था। अंग्रेजों के दौर में गुरुकुल और गुरु परम्परा लगभग नष्ट कर दी गयी थी। ऐसे में स्वाभाविक था कि ज्ञान और विरासत लुप्त होने की कगार पर थी। हमारे पूज्य ग्रंथ गायब होने लगे थे। उस समय जो प्रिन्टिस प्रेस थे, वे महंगी कीमत के कराण सामान्य मानवीय पहुंच से बहुत दूर थे। गीता और रामायण के बिना हमारा समाज कैसे चल रहा होगा। जब मूल्यों और आदर्शों के स्रोत सूखने लगे तो समाज का प्रवाह अपने आप थमने लगता है। उन्होंने कहा कि भारत मे कितने बार अधर्म और आतंक बलवान हुआ। सत्य पर संकट के बादल मंडराए। लेकिन हर संकट में भगवतगीता से सबसे बड़ा विश्वास मिलता है। यदा यदा ही धर्मस्य का उद्धरण देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब जब सत्य व धर्म पर संकट आता है तब तब ईश्वर उसकी रक्षा के लिए प्रकट होते हैं।

Topics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीगीता प्रेस गोरखपुरगोरखपुर में पीएम मोदी
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