क्या है हक़ बख्शीश, मुस्लिम समाज की इस प्रथा के बारे में क्या आप जानते हैं?
September 30, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम विश्लेषण

क्या है हक़ बख्शीश, मुस्लिम समाज की इस प्रथा के बारे में क्या आप जानते हैं?

हक़ बख्शीश और इसके रिवाज विषय में अंतर्राष्ट्रीय और पाकिस्तानी मीडिया तो खुलकर इसलिए बात करता है कि वह खत्म हो और लड़कियां अपना जीवन जिएं, मगर भारत के प्रगतिशील विमर्श से से गायब रहता है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
May 30, 2023, 06:04 pm IST
inविश्लेषण

पिछले वर्ष फरवरी में डीडब्ल्यू एशिया का एक ट्वीट वायरल हुआ था। वह रिपोर्ट दरअसल पाकिस्तान के ऐसे रिवाज के बारे में थी, जिसका शिकार असंख्य लड़कियां हो रही हैं, परन्तु वह भारत के प्रगतिशील विमर्श से गायब है। यहाँ तक कि उस पर बात तक नहीं की जाती है। वह रिवाज है, कुरआन से लड़कियों की शादी! इस रिवाज का नाम है हक़ बख्शीश!

यह हक़ बख्शीश क्या है और क्या है ऐसा रिवाज, जिसके विषय में अंतर्राष्ट्रीय और पाकिस्तानी मीडिया तो खुलकर इसलिए बात करता है कि वह खत्म हो और लड़कियां अपना जीवन जिएं, मगर भारत में यह विमर्श सिरे से गायब रहता है।

https://twitter.com/dw_hotspotasia/status/1493608355352432643?

इसमें एक लड़की की कहानी है, जो यह कहती है कि पाकिस्तान के दक्षिण प्रांत सिंध में कुरआन से शादी करने का एक रिवाज है। इसमें लड़की का निकाह कुरआन के साथ पढ़वा दिया जाता है। कई रईस लोग अपनी बहनों और बेटियों का निकाह उनके विरासत के अधिकार को मारने के लिए उनकी शादी कुरआन से कर देते हैं। इस ट्वीट में एक महिला जिसका निकाह कुरआन के साथ हो गया था, वह अपनी कहानी बता रही है।

उस महिला के अनुसार उसे कुछ नहीं पता था, केवल एक ही बात पता थी कि मुझे पहनने के लिए नया जोड़ा मिलेगा! फिर वह कहती हैं कि उनके अब्बू ने उनके हाथों में कुरआन थमा कर कहा कि वह उनकी शादी कुरआन से करा रहे हैं और उनसे कहा कि वह कसम खाएं कि वह किसी और शख्स से शादी की बात नहीं सोचेंगी।

वह कहती हैं कि वह कभी बाहर नहीं निकलीं और सारा दिन घर पर ही रहती हैं। चाहे कुछ हो जाए, वह बाहर नहीं जाती हैं।

पाकिस्तान में मानवाधिकारों पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि जागीरदार लोग अपनी बहनों और बेटियों को विरासत से दूर रखने के लिए यह करते हैं, कि कुरआन से लड़की की शादी करा देते हैं और फिर उनके हिस्से की दौलत की खुद देखभाल करते हैं। उन्हें यह डर होता है कि अगर उनकी बेटियों या बहनों की शादी हो जाएगी तो कुछ हिस्सा ही सही, वह हिस्सा बाहर चला जाएगा।

हालांकि इस रिवाज पर पाकिस्तान ने रोक लगाई हुई है और इसके लिए 7 साल तक की सजा है, मगर फिर भी कहा जाता है कि इसकी रिपोर्ट कराने का साहस किसी के पास नहीं है। मीडिया के अनुसार चूंकि यह अधिकतर सैय्यदों में प्रचलित हैं, तो यह माना जाता है कि इस मामले को गोपनीय रखा जाता है।

वर्ष 2014 में Holy brides or Slaves? Haq bakshish tradition नाम से एक रिपोर्ट bitlanders.com पर प्रकाशित हुई थी। जिसमें यह कहा गया था कि ऐसी महिलाओं को गुलाम, नौकर, बच्चों की देखभाल करने वाली मान लिया जाता है या फिर परिवार की पैदायशी गुलाम मान लिया जाता है।

इस वेबसाईट के अनुसार हक़बख्शीश नामक यह रिवाज सिंध और पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों में फ़ैली हुई है और यह भी कहा जाता है कि हालांकि पाकिस्तानी यह मानते हैं कि यह रिवाज अभी पाकिस्तान में नहीं है, मगर सूत्रों के अनुसार वर्ष 2014 तक ऐसी दस हजार लड़कियां केवल सिंध में थीं जिनकी शादी कुरआन से हुई थी और वर्ष 2014 तक हर वर्ष लगभग हजार लड़कियों को इसी पीड़ा की आग में झोंका जा रहा था।

वर्ष 2007 में ‘द न्यू ह्यूमैनिटेरियन’ ने 25 वर्षीय फरीबा की कहानी बताते हुए कहा था कि उसकी शादी कुरआन से हुई थी। इसमें उसकी कजिन जुबैदा अली ने फरीबा की उस शादी के बारे में बात करते हुए कहा था कि “यह बहुत अजीब था। फरीबा जो बहुत प्यारी लड़की थी और उसकी उम्र 25 वर्ष की थी उसे दुल्हन की तरह सजाया गया था, और हाथों एवं पैरों पर मेहंदी भी लगाई गयी। उस दिन खूब मेहमान थे, मगर दूल्हा नहीं था।”

फरीबा की शादी कुरआन से करा दी गयी और फरीबा अब किसी और से शादी नहीं कर सकती है। वह अपना अधिकतर समय या तो कुरआन को पढने में या फिर सिलाई करने में बिताती है। वह हाफिजा है!

इस रिपोर्ट में भी यही लिखा था कि सैय्यद परिवार अधिकतर अपने परिवार की बेटियों की गैर सैय्यदों में शादी नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि वह दूसरों से खुद को बेहतर नस्ल का मानते हैं। और जब उन्हें परिवार में अपनी बहनों या बेटियों के लिए कोई ठीक रिश्ता नहीं मिलता है और ऐसा लगता है कि परिवार से बाहर शादी करने पर उनकी दौलत परिवार से बाहर चली जाएगी तो वह लड़कियों की शादी कुरआन से करा दते हैं।

मगर चूंकि इसकी आलोचना इस्लामिक विद्वान करते हैं, तो यह रिवाज अधिकतर गुपचुप ही किया जाता है।

इस रिपोर्ट में तो यह तक दावा किया गया था कि सिंध के कुछ प्रमुख राजनीतिक खानदान भी इस रिवाज का पालन कर रहे हैं, हालांकि जब इन लोगों से पूछा गया तो उन्होंने इंकार कर दिया था।

इस रिवाज को गैर-इस्लामिक कहा जाता है और पाकिस्तान में इस पर बात, बहस होती है एवं इसपर पाबन्दी भी लगाई हुई है। मगर यह देखकर हैरानी होती है कि महिलाओं के प्रति इस गैर-इस्लामिक रिवाज पर भी भारत में उस प्रगतिशील लेखक वर्ग पूरी तरह से मौन साधे रहता है, जो पाकिस्तान की छोटी छोटी बातों पर तारीफों के पुल बांधता है।

इस सम्बन्ध में पाकिस्तान की लेखिकाएं लिखती हैं, क्योंकि यह रिवाज एक उपन्यास “द होली वुमन” के बाद से ही विमर्श में आया था, जिसे कुछ वर्ष पहले पाकिस्तान मूल की ब्रिटिश लेखिका कसीरा शाहराज ने लिखा था। इसमें ऐसी महिला की कहानी बताई गयी थी, जिसकी शादी इस तरह से करा दी जाती है।

मगर एक ही इतिहास को साझा करने वाले दो देश और पाकिस्तान के प्रति रूमानियत से भरे प्रगतिशील लेखक कभी इस विमर्श और पीड़ा को साझा क्यों नहीं करते हैं? यह शोध का विषय है।

Topics: हक़ बख्शीश और इसके रिवाजहक़ बख्शीश के रिवाजकौन है कुरान की दुल्हनेंWhat is Haq Bakshishthe bride of the QuranHaq Bakshish and its customthe custom of Haq Bakhishishwho is the bride of the Quranहक़ बख्शीशक्या है हक़ बख्शीशकुरान की दुल्हनें
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

No Content Available
Load More

ताज़ा समाचार

‘कन्वर्जन हिंसा है, हम इसे सहन नहीं करेंगे; प्रेम, करुणा, तपस्या और शुचिता है- हिंदुत्व’

श्री नितेश राणे जी कैबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र सरकार

मंत्री-विधायक का पद अस्थायी, हिंदू होना मेरी स्थायी पहचान: नितेश राणे ने खोले कई राज

पाञ्चजन्य की कंसल्टिंग एडिटर तृप्ति श्रीवास्तव जी और श्री नितेश राणे जी कैबिनेट मंत्री, महाराष्ट्र सरकार

मुंबई की बदलेगी तस्वीर! वाटर मेट्रो से मछुआरों के लिए बड़ी योजना तक; पढ़िए नितेश राणे का पूरा इंटरव्यू

सुशासन संवाद मुबंई में बोलते वी भागैय्या जी

सुशासन संवाद मुंबई: विश्वबंधुत्व से विश्वगुरु तक, संघ का वैश्विक दृष्टिकोण और हिन्दुत्व का संदेश

पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर जी

‘सुशासन संवाद- मुंबई संकल्प’: ‘आघात होंगे, षड्यंत्र होंगे, लेकिन भारत परास्त नहीं होगा’- हितेश शंकर जी

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन: पहलगाम हमले का मुख्य आतंकी हाशिम मूसा मारा गया

IRGC का अमेरिकी जनता को खुला पत्र: ट्रंप नीतियों को खारिज करने की अपील, मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ा संदेश

एशियन गेम्‍स 2026

Asian Games 2026: तीरंदाजी में भारत का कमाल, चीन को हराकर जीता गोल्ड

panchjanya sushasan samvad mumbai sankalp 2026 the taj mahal palace

पाञ्चजन्य का ‘सुशासन संवाद : मुंबई संकल्प’: 30 सितंबर को द ताज महल पैलेस में जुटेंगी देश-दुनिया की दिग्गज हस्तियां

हरिपुर कालसी में हरिघाट के लोकार्पण अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ स्वामी चिदानंद सरस्वती और महामंडलेश्वर अरुण गिरि जी महाराज

हरिपुर : विरासत का पुनरुत्थान

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies