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केजरीवाल का बंगला बना न्यारा, जिसपर आया 171 करोड़ का खर्चा प्यारा

45 करोड़ के बंगले के मालिक अरविंद केजरीवाल एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने चुनाव लड़ने से पहले यह एफिडेविट दिया था कि वह आम आदमी की तरह रहेंगे।

Written byआशीष कुमार 'अंशु'आशीष कुमार 'अंशु'
May 8, 2023, 05:00 pm IST
in भारत, दिल्ली
अरविंद केजरीवाल के आवास के रेनोवेशन पर करोड़ों रुपये खर्च होने की बात आई थी सामने

अरविंद केजरीवाल के आवास के रेनोवेशन पर करोड़ों रुपये खर्च होने की बात आई थी सामने

एक न्यूज चैनल द्वारा किए गए ”ऑपरेशन शीश महल” के खुलासे का जवाब आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल नहीं दे पा रहे हैं। आम आदमी के इस 45 करोड़ के बंगले की चर्चा हर तरफ हो रही है।

गरीबी का उड़ाया मजाक
दिल्ली वाले टिकट के पैसे देकर भी 45 करोड़ का यह बंगला देखना चाहते हैं क्योंकि इस बंगले के मालिक अरविंद केजरीवाल एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने चुनाव लड़ने से पहले यह एफिडेविट दिया था कि वह आम आदमी की तरह रहेंगे। कभी अपने लिए बड़ा बंगाल नहीं लेंगे। सुरक्षा नहीं लेंगे। ऐसे में जनता तो सवाल पूछेगी कि केजरीवाल ने दो-तीन सालों में अपने बंगले के ऊपर इतना पैसा खर्च क्यों कर दिया ? इतना पैसा तो भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने भी कभी सीएम आवास पर खर्च नहीं किए। जबसे उनके बंगले पर हुए खर्च की जानकारी सार्वजनिक हुई है, ऐसा लगता है कि किसी ने अरविंद केजरीवाल पर पड़ा सादगी का लबादा उतार फेंका है। उनकी जेब में पड़ा छह रुपए का रिनॉल्ड पेन मुस्कुरा रहा है। हवाई चप्पल दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले उन लोगों पर हंस रही है, जो अरविंद को अपना बेटा कहते थे। वे भी अब समझ गए हैं कि उनका ये कथित बेटा बहुत बड़ा झूठा निकला। वह अपनी फटी जेब, शर्ट के टूटे हुए बटन, हवाई चप्पल, जेब से लटकता हुआ सस्ता पेन दिखाकर आम आदमी को ठग रहा था। अरविंद जब सूचना अधिकार कार्यकर्ता के नाते काम कर रहे थे, उस दौर से उन्हें जानने वाले एक सज्जन कहते हैं कि उन्हें दिल्ली का सुकेश चंद्रशेखर कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

कर्नाटक के ठग से जुड़े दिल्ली के कथित ठग के तार
अरविंद केजरीवाल के ठगी और भ्रष्टाचार की कहानियों के तार इतने फैले हुए हैं कि वह 200 करोड़ की ठगी के मामले में जेल काट रहे चर्चित ठग सुकेश चंद्रशेखर से भी जाकर जुड़ जाते हैं। सुकेश ने दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लिखे पत्र में दावा किया है कि केजरीवाल के बंगले के लिए उसने बड़ी संख्या में महंगी वस्तुओं के लिए भुगतान किया था।

सुकेश ने चिट्ठी लिखकर मांग की है कि केजरीवाल के शीश महल में रखे सामान और घर की सजावट की खरीद की जांच की जाए। उसका दावा यह भी है कि केजरीवाल के घर के लिए आए चांदी की क्रॉकरी सेट के लिए दक्षिण भारतीय कारोबारी को 90 लाख रुपए का भुगतान उसी ने किया है।

कांग्रेस का खुलासा
केजरीवाल के नए बंगले के मामले पर कांग्रेस पार्टी ने एक नया खुलासा किया है कि उस बंगले पर 45 करोड़ नहीं बल्कि 171 करोड़ रुपए का खर्च आया है। यह पैसा भी उस वक्त खर्च किया गया, जब दिल्ली कोविड से जुझ रही थी। आम आदमी को अस्पताल में बिस्तर उपलब्ध नहीं था। आक्सीजन के लिए दिल्ली वाले तरस रहे थे। दिल्ली की स्थितियां भयावह हो गई थी। इसलिए डर कर यहां से प्रवासी मजदूर भाग रहे थे। गरीब आदमी खाने को तरस रहा था। उस दौरान आम आदमी के नेता केजरीवाल का 171 करोड़ रुपए का बंगला तैयार हो रहा था। कांग्रेस ने इस बात का भी खुलासा किया कि कैसे 45 करोड़ का बजट 171 करोड़ तक पहुंचा।

जहां अरविंद केजरीवाल का बंगला बना है, उसके साथ में चार बंगले और हैं। 45 राजपुर रोड, 47 राजपुर रोड, 8ए फ्लैगस्टाफ रोड, 8बी फ्लैगस्टाफ रोड। ऐसे ही वहां मौजूद 22 आफिसर्स फ्लैट में से 15 तुड़वा दिए गए हैं। या खाली करवा दिए गए हैं। बाकि सात के लिए निर्देश दिया गया है कि ये अब किसी को अलॉट नहीं किया जाएगा। अब जो ये 22 फ्लैट कम हुए हैं। इसकी भरपाई के लिए केजरीवाल सरकार ने कॉमन वेल्थ गेम्स विलेज में 21 टाइप फाइव फ्लैट खरीद लिए हैं। इस हर एक फ्लैट की कीमत छह करोड़ रुपए है। अब कांग्रेस का प्रश्न है कि केजरीवाल के घर को बढ़ाने के लिए यदि दूसरी जगह दिल्ली सरकार के अधिकारियों के लिए फ्लैट खरीदा जा रहा है तो उसकी कीमत भी अरविंद केजरीवाल के घर में ही जुड़नी चाहिए। यह सारा पैसा जो खर्च हो रहा है, यह अरविंद केजरीवाल अपने घर से या पार्टी फंड के चंदे से निकाल कर दे नहीं रहे। यह सारा पैसा जनता के टैक्स से आया है। उस पैसे को उन्होंने कैसे खर्च किया, इसका जवाब तो देना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल 2013 में भारत की राजनीति को बदलने के लिए दिल्ली की सत्ता में आए थे। अन्ना हजारे ने आंदोलन के राजनीतिक दल बनते ही अरविंद केजरीवाल से दूरी बना ली। दिल्ली के लोगों ने उसके बावजूद अरविंद पर विश्वास किया। दिल्ली के सुंदर नगरी की जिस संतोष कोली का घर उनका स्थायी पता होता था। आज उनका परिवार बहुत पीछे छुट चुका है। संतोष के परिवार का आरोप है कि अरविंद ने उनकी बेटी छीन ली। उनकी बेटी का एक्सीडेंट नहीं हुआ था बल्कि उनकी बेटी की हत्या हुई है। एक तथ्य यह भी है कि संतोष के जाने के बाद अरविंद कभी मुड़कर उसके घर वालों को देखने भी नहीं गए। संतोष की मां कहती हैं कि जिस घर का पता देकर उन्होंने दिल्ली में अपने पैर जमाए थे। उस घर में रहने वालों का कभी हाल चाल भी नहीं पूछा। अरविंद कभी देखने नहीं आए कि दिल्ली में संतोष कोली का परिवार किस हालत में जी रहा है। जी रहा है या मर गया ?

वास्तव में अरविंद अपने अतीत को भूलाकर बहुत आगे निकल आए हैं। इतना आगे कि जो अरविंद भ्रष्टाचार के खिलाफ घूस को घूंसा दिखाता था। आज आकंठ उसी भ्रष्टाचार में डूबा हुआ दिखाई देता है।

शीश महल पर सवाल के बदले, पत्रकार की हुई गिरफ्तारी
2020 के विधानसभा चुनाव के समय केजरीवाल दिल्ली में बेटियों की सुरक्षा की खूब बात करते थे। लेकिन पंजाब में दिल्ली की पत्रकार को गिरफ्तार करते हुए केजरीवाल की पुलिस ने एक बार नहीं सोचा कि एक महिला कांस्टेबल को बुला लिया जाए। उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि यह महिला रिपोर्टर किसी की बेटी है। उसका भी एक परिवार है। यदि गिरफ्तार कर रहे हैं तो इसकी सूचना उसके परिवार को दी जाए। देर रात तक टाइम्स नाउ की पत्रकार भावना किशोर कहां है, इसकी जानकारी ना चैनल को दी गई और ना उनके परिवार को। दुख की बात है कि आम आमदी पार्टी के नेता दिल्ली की बेटी पर लांक्षण लगाते हुए भी शर्मिंदा नहीं हो रहे और कह रहे हैं कि उसने एक ऐसी महिला को जाति सूचक अपशब्द कहे, जिसे वह पहले से जानती तक नहीं।

पत्रकार भावना किशोर को अदालत से अभी राहत नहीं मिली है। ऑपरेशन शीश महल के बाद आम आदमी पार्टी की साख पर प्रश्न चिन्ह लगा है। एक ऐसी पार्टी जिसे हाल में ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला है। किसने सोचा था कि वह इतनी जल्दी एक्सपोज हो जाएगी। आम आदमी पार्टी के नेता बौखलाहट में खुलासा होने के बाद भावना किशोर और उनके चैनल को भाजपा का चैनल और पत्रकार लिख रहे हैं। लेकिन जो सवाल उठाए गए हैं, उसका जवाब ना अरविंद केजरीवाल देने को तैयार हैं और ना उनके प्रवक्ता। दिल्ली वालों के सामने पिछले 10 सालों से आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो जिस सादगी का दिखावा करते आ रहे थे। उस दिखावे से पर्दा उठ चुका है। खबरिया चैनल ने दस्तावेजों और तस्वीरों के माध्यम से उनकी सादगी को उघाड़ कर रख दिया है।

इसके बाद उनका बौखलाना स्वाभाविक है। इससे पहले भी पंजाब पुलिस को हथियार बनाकर आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस नेता अलका लांबा, कवि कुमार विश्वास और भाजपा नेता तेजिन्दर पाल सिंह बग्गा को परेशान करने की कोशिश की थी। वैसे इन सभी को पंजाब उच्च न्यायालय से राहत मिल गई लेकिन पत्रकार भावना किशोर को अब तक राहत नहीं मिली है। भावना, कैमरा मैन मृत्युंजय और ड्राइवर परविन्दर पर एससीएसटी एक्ट के अन्तर्गत पंजाब में मुकदमा दर्ज हुआ है। पत्रकार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के एक सार्वजनिक कार्यक्रम को कवर करने के लिए पंजाब गई थी। भावना के चैनल पर पांच किश्तों में अरविंद केजरीवाल के शीशमहल पर खुलासे हुए है। पूरी दिल्ली इस पर बात कर रही है लेकिन मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अब तक इस मुद्दे पर कोई प्रेस कॉन्फ्रेस नहीं किया और ना ही उनकी कोई प्रतिक्रिया सामने आई है। भावना किशोर जब केजरीवाल से बात करती तो निश्चित तौर पर वह शीश महल का सवाल उठाती। सवाल जवाब से पहले ही उसकी गिरफ्तारी हो गई।

भावना, कैमरामैन और ड्राइवर पर आरोप है कि उनकी गाड़ी की टक्कर हुई। इस टक्कर के बाद दूसरे पक्ष को इनकी तरफ से जाति सूचक गाली दी। इसका मतलब तो यही हुआ कि टक्कर होनी है। इस बात का पता भावना और उनकी टीम को पहले से था। सामने वाली गाड़ी में कौन लोग बैठे होंगे और उनकी जाति क्या होगी ? इसकी भी पूरी खबर उनके पास थी। यह आरोप ही विचित्र है फिलहाल मामला अभी उच्च न्यायालय में है।

भावना किशोर कोई बड़ी नेता या राष्ट्रीय कवि नहीं है। वह एक सामान्य सी रिपोर्टर है। जो अपना असाइनमेंट पूरा करने के लिए पंजाब गई थी और पंजाब पुलिस द्वारा उन्हें उठा लिया गया। यह घटना उन सभी पत्रकारों के लिए डराने वाला है, जो ईमानदारी से रिपोर्टिंग करना चाहते हैं। उन्हें कभी भी, कहीं से भी पुलिस उठा कर कोई भी मामला बना सकती है। कई पत्रकार तो सक्षम भी नहीं होंगे जो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में अपनी पैरवी कर पाएं। पत्रकारों को डराने के लिए आम आदमी पार्टी ने मानो खुली चुनौती दी है। उन्होंने पहले भी एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र के पत्रकारों को दिल्ली सरकार के वाट्सएप ग्रुप से इसलिए बाहर निकलवा दिया था क्योंकि उनकी एक रिपोर्टर ने आम आदमी पार्टी के दावों की अपनी रिपोर्ट में पोल खोल दी थी। इसी तरह एक पत्रकार को इसलिए दबाव देकर आम आदमी पार्टी ने नौकरी से बाहर कराया क्योंकि उसने एक ट्वीट कर दिया था। ऐसा ट्वीट जो केजरीवाल को पसंद नहीं आया। परिणाम यह हुआ कि पत्रकार को नौकरी से त्यागपत्र देकर अपने एक ट्वीट की कीमत चुकानी पड़ी।

आज चाहे मीडिया के कैमरों और पत्रकार के सवालों से आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री शीश महल के सवाल पर मुह छुपाते फिर रहे हैं। लेकिन जब जनता यह सवाल पूछेगी तो कितनों को वे पंजाब पुलिस से गिरफ्तार कराएंगे और कितनों का मुंह चुप करेंगे। यह आने वाले समय में देखना दिलचस्प होगा।

Topics: Congressसीएम केजरीवालCM Kejriwaldelhi hindi newsarvind kejriwal bungaloCM Kejriwal Houseबीजेपीसीएम केजरीवाल हाउसकांग्रेसkejriwal seeshmahalDelhi Newsaam admi partyअरविंद केजरीवालArvind KejriwalBJPKejriwal
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार 'अंशु'
आशीष कुमार अंशु पत्रकार, लेखक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आम आदमी के सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों तथा भारत के दूरदराज में बसे नागरिकों की समस्याओं पर अंशु ने लम्बे समय तक लेखन व पत्रकारिता की है। अंशु मीडिया स्कैन ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और दस वर्षों तक मानवीय विकास से जुड़े विषयों की पत्रिका सोपान STEP से जुड़े रहे हैं। [Read more]
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