पाकिस्तान की एक मशहूर पत्रकार का बंटवारे के समय उसके पुरखों का पाकिस्तान आना खटक रहा है। अपने इस्लामी देश की बदहाली से परेशान इस पत्रकार को अफसोस है कि उसके दादा हिन्दुस्थान छोड़कर पाकिस्तान क्यों आ बसे। इस पत्रकार ने ट्वीट के माध्यम से अपना दुख दुनिया के साथ साझा किया है। पाकिस्तान में आज खाने तक के लाले पड़े हैं जबकि उधर सारी पार्टियों के नेता सियासी दावपेंच में ही उलझे हुए हैं, वहां आटे को लेकर जान गंवाने जैसी चीजें हर पाकिस्तानी को बेशक लजा रही होंगी। आरजू का दर्द भी शायद इसी हालात से उभर कर सामने आया है।
बेहद परेशानियों के दौर से गुजरते पाकिस्तान की यह पत्रकार आरजू काजमी ने अपने ट्वीट में लिखती है, ‘‘मेरे भाइयों तथा परिवार के दूसरे सदस्यों को लगता है कि पाकिस्तान में उनका कोई कल नहीं है। मेरे दादा जी और उनका परिवार प्रयागराज और दिल्ली से पाकिस्तान में बेहतर कल के लिए आ गए थे। वाट लगा दी दादा जी…!’ (देखें ट्वीट)
आरजू का यह ट्वीट सोशल मीडिया पर जबरदस्त वायरल हो रहा है। हजारों लोग इस ट्वीट को ‘लाइक’ कर चुके हैं जबकि यह ट्वीट ढाई हजार से ज्यादा रिट्वीट किया गया है। इस ट्वीट पर लोग अपनी-अपनी दिलचस्प प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ आरजू के ‘दर्द’ के प्रति सहानुभूति दर्शा रहे हैं तो कुछ कट्टर सोच वाले उसे ऐसा लिखने के लिए कोस भी रहे हैं।
लेकिन आरजू के इस ट्वीट से और खासकर आखिरी के शब्दों ‘वाट लगा दी…’ से पता चलता है कि एक आम पाकिस्तानी के दिल पर इस वक्त क्या गुजर रही है, और हैरानी की बात यह कि पाकिस्तान के सत्तारूढ़ नेताओं को इसकी तनिक भी परवाह नहीं है। जिन्ना का मुस्लिम के नाम पर अलग देश बसाने का फैसला आज अपना असली रंग दिखा रहा है।
https://twitter.com/Arzookazmi30/status/1642129172074987520?s=20
बेहद परेशानियों के दौर से गुजरते पाकिस्तान की यह पत्रकार आरजू काजमी ने अपने ट्वीट में लिखती है, ‘‘मेरे भाइयों तथा परिवार के दूसरे सदस्यों को लगता है कि पाकिस्तान में उनका कोई कल नहीं है। मेरे दादा जी और उनका परिवार प्रयागराज और दिल्ली से पाकिस्तान में बेहतर कल के लिए आ गए थे। वाट लगा दी दादा जी…!’
वैसे आरजू काजमी भारतीयों के लिए कोई अनजान चेहरा नहीं हैं। वे भारत के समाचार चैनलों की बहसों में दिखती रही हैं। बहसों में भी वे कई मामलों में भारत की तरक्की और सोच की प्रशंसा भी करती रही हैं। आरजू को पाकिस्तान की सरकार तथा सेना की खुलकर आलोचना करने वाला माना जाता है। वे पाकिस्तान के अनेक मीडिया समूहों में काम कर चुकी हैं।
इसमें संदेह नहीं है कि पाकिस्तान इस वक्त कंगाल हो चुका है, उसकी अर्थव्यवस्था डावांडोल है और बड़े नेता और फौज के अफसर भीख का कटोरा लिए दुनिया भर में घूम रहे हैं। लेकिन इस सुन्नी मजहबी देश पर कोई भरोसा करने को तैयार नहीं है। वहां रोजमर्रा चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। गरीब परिवारों के लिए दो वक्त का खाना जुटाना भारी पड़ रहा है। मुफ्त सरकारी आटा लेने के लिए ऐसी मारामारी मची हुई है कि अभी दो दिन पहले ही इस चक्कर में कई लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है।
कामकाज-कारोबार बंद हो चुके हैं, हजारों लोगों की नौकरियां छिन चुकी हैं, लूटपाट और आतंकवादी घटनाएं बेरोकटोक चल रही हैं। सरकारी खजाना खाली है जबकि नेताओं के निजी खातों में अरबों रुपए जमा हैं। वहां कुछ नेता ही नहीं, अनेक पढ़े-लिखे युवा तक भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व की तारीफें कर रहे हैं और उनके सामने अपने नेताओं को ‘बौने और भ्रष्ट’ मानने से हिचक नहीं रहे हैं।
















