नकल करके भारत आत्मनिर्भर नहीं बन सकता : सरसंघचालक
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नकल करके भारत आत्मनिर्भर नहीं बन सकता : सरसंघचालक

- संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष का हुआ समापन काशी महापीठ के 87वें जगद्गुरु डॉ. मल्लिकार्जुन शिवाचार्य महास्वामी रहे मुख्यातिथि

Written byPanchjanyaPanchjanya
Dec 9, 2022, 12:14 am IST
inसंघ @100

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत ने कहा कि भारतीय सभ्यता अपने आप में स्वयंपूर्ण और अनुकरणीय है। हमें दूसरों की नकल करने कि आवश्यकता नहीं है। नकल कर के भारत कभी आत्मनिर्भर नहीं बन सकता।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्ष का गुरुवार को समापन हुआ। इस कार्यक्रम में काशी महापीठ के 87वें जगद्गुरु डॉ. मल्लिकार्जुन शिवाचार्य महास्वामी बतौर मुख्यातिथि उपस्थित थे। इस अवसर पर स्वयंसेवकों को पाथेय देते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि मौजूदा समय मे सभी को भारत की आवश्यकता है। भारत दुनिया में चर्चाओं का केन्द्र है। भारत को लेकर दुनिया के विश्वास में बढोतरी हुई है।

श्री भागवत जी ने बताया कि जी-20 की अध्यक्षता भारत को मिलना कोई साधारण बात नहीं है। लेकिन यह प्रारंभ है, अभी हमें लंबा सफर तय करना है। भारत को विश्वगुरू बनाना किसी संस्था या व्यवस्था का काम नहीं है। इसके लिए समाज के सहयोग और सहभागिता की आवश्यकता है।

सरसंघचालक जी ने हिंदू शब्द की परिभाषा को दोहराते हुए बताया कि हिंदू किसी पूजा पद्धति, सांस्कृतिक परंपरा का नाम नहीं है। इस देश को अपना मानने वाला, पूर्वजों का गौरव करने वाला और भारत के लिए उत्तरदायी हर व्यक्ति हिंदू है। उन्होंने कहा कि हमारी भाषा, पूजा, पद्धति और कपडों में भेद हो सकते हैं लेकिन इसके बावजूद हम सभी हिंदू हैं। उपासना का महत्व समझाते हुए श्री भागवत जी ने संस्कृत भाषा का श्लोक बताया..

“अश्वं नैव, गजं नैव, व्याघ्रं नैव च नैव च।

अजापुत्रं बलिं दद्याया देवे दुर्बल घातकः।।”

श्लोक का भावार्थ स्पष्ट करते हुए सरसंघचालक जी ने कहा कि घोड़ा, हाथी, शेर आदि बलवान जानवरों की बलि नहीं दी जाती लेकिन बकरे की बलि देने की परंपरा है। देवता भी दुर्बलों का साथ नहीं देते। इसलिए भारत को बलवान बनना होगा। पूरी दुनिया में केवल बलवानों की बात सुनी जाती है। उन्होंने कहा कि हमें दुनिया को अपने बल से जीतना नहीं बल्कि जोडना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि हमें कोई जीत ना सके।

सामाजिक आचरण और अपेक्षाओं पर विचार व्यक्त करते हुए सरसंघचालक श्री मोहन राव भागवत जी ने कहा कि भगिनी निवेदिता कहती थीं कि नागरिकता के नियमों का अनुपालन करना ही राष्ट्रभक्ति है। वहीं डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि अंग्रेजों के खिलाफ होने वाले आंदोलनों की तरह आजाद भारत में सत्याग्रह ठीक नहीं। सरसंघचालक जी ने इन बातों को गंभीरता से समझने का आह्वान किया। साथ ही सामाजिक विषमता पर प्रहार करते हुए उन्होंने ने बताया कि संविधान में बताई गई सामाजिक समरसता लाने के लिए सद्भावना का निर्माण करना होगा।

उन्होंने कहा- समाज के उत्थान की जिम्मेदारी और श्रेय संघ का नहीं है बल्कि समाज के उत्थान का श्रेय समाज को मिलना चाहिए। यदि समाज नहीं करेगा तो कुछ भी संभव नहीं है।

Topics: Dr. Mohan Rao BhagwatSangh Education Class Third YearCompletion of Rashtriya Swayamsevak Sangh's Classराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघCompletion of Third Year ClassRashtriya Swayamsevak SanghRashtriya Swayamsevak Sangh Newsसरसंघचालक समाचारडॉ. मोहन राव भागवतसंघ शिक्षा वर्ग तृतीय वर्षतृतीय वर्ष वर्ग का समापनSarsanghchalak News
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