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लोगों को तलवार के दम पर बनाया मुसलमान

विभाजन के दौरान मेरी उम्र 11 साल थी, इसलिए उस समय जो कुछ भी हुआ, मुझे सब याद है। मेरे पिताजी का देहांत हो चुका था। ऐसे में हमारे पास जो खेती की जमीन थी, उसी से गुजारा चलता था

अश्वनी मिश्रअरुण कुमार सिंहदिनेश मानसेराWritten byअश्वनी मिश्र,अरुण कुमार सिंहandदिनेश मानसेरा
Nov 18, 2022, 01:50 pm IST
in भारत
बलदेव राज

बलदेव राज

न भूलने वाला पल

मुसलमान गांव के बाहर तलवारें लेकर डेरा डाले हुए थे। उन जिहादियों ने डरा-धमकाकर कइयों को मुसलमान बना दिया था। परंतु मेरी मां अडिग रहीं।

बलदेव राज

मुल्तान, पाकिस्तान

 

विभाजन के दौरान मेरी उम्र 11 साल थी, इसलिए उस समय जो कुछ भी हुआ, मुझे सब याद है। मेरे पिताजी का देहांत हो चुका था। ऐसे में हमारे पास जो खेती की जमीन थी, उसी से गुजारा चलता था। घर में माताजी और हम तीन भाई रहा करते थे। लेकिन माहौल इतना खराब होने लगा था कि आसपास के लोग कहने लगे थे कि मुसलमान हो जाओ।

एकाध लोग जो इससे भयभीत हो चुके थे, वे मुसलमान बनने के लिए तैयार तक हो गए थे। मुसलमान गांव के बाहर तलवारें लेकर डेरा डाले हुए थे। उन जिहादियों ने डरा-धमकाकर कइयों को मुसलमान बना लिया था। परंतु मेरी मां अडिग रहीं। उन्होंने कहा कि मैं और मेरे तीनों बच्चे मर जाएंगे पर मुसलमान नहीं बनेंगे। उन्होंने हम लोगों को छोड़कर गांव के सारे हिन्दुओं को मुसलमान बना दिया। यहां तक कि चाची और मौसी मुसलमान बन गईं।

जहां भी हिन्दू दिख जाते थे, मुसलमान उन्हें घेरकर मार देते थे। फिर एक दिन ऐसा आया कि हमें रेल मिली। रुकते-रुकाते हम जालंधर आ पाए। यहां पर हम सवा महीने रहे। इसके बाद हमें कुरुक्षेत्र के एक गांव में अस्थायी जमीन दी गई। फिर हम भारत में रहने लगे। आज जब उस पूरी आपबीती पर सोचने बैठता हूं तो मन उचाट हो जाता है। बंटवारे के दौरान हिन्दुओं पर बहुत जुल्म किया गया। उनका सब कुछ तहस-नहस हो गया। हमारी कई पीढ़ियां बर्बाद कर दीं

हालत यह हो गई थी कि अगर हम चाची के घर कुछ खा लेते थे तो मां बहुत डांटती थीं और कहती थीं कि वहां क्यों खाया, वे मुसलमान बन गई हैं। इसे देख-सुन चाची बहुत उदास हो जाती थी, क्योंकि बचपन से उन्होंने ही हमारी देखरेख की थी। दूसरी तरफ हालात यह हो गए थे कि जिहादी कभी भी हम लोगों की जान ले सकते थे। हमारे चाचा मुसलमान हो गए हैं, ऐसा पूरे गांव को पता था, जबकि यह महज दिखावा था।

एक दिन हमने वहां से निकलने का विचार किया। चाचा ने किसी तरह से सेना की मदद ली। गांव से सेना ने सबको निकाला। जब लोग निकल रहे थे तो स्थानीय मुसलमान कहने लगे कि ये तो मुसलमान बन गये हैं। तो फिर यहां से क्यों जा रहे हैं? एक ने कहा कि हम सिर्फ तुम्हें धोखा देने के लिए मुसलमान बने थे। किसी तरह से हम सभी निकट के एक शिविर में पहुंचे। यहां 15-20 दिन रहे। यहां भारी अव्यवस्था थी। डर भी था क्योंकि उन दिनों चारों तरफ मार-काट की ही खबरें सुनाई देती थीं।

जहां भी हिन्दू दिख जाते थे, मुसलमान उन्हें घेरकर मार देते थे। फिर एक दिन ऐसा आया कि हमें रेल मिली। रुकते-रुकाते हम जालंधर आ पाए। यहां पर हम सवा महीने रहे। इसके बाद हमें कुरुक्षेत्र के एक गांव में अस्थायी जमीन दी गई। फिर हम भारत में रहने लगे। आज जब उस पूरी आपबीती पर सोचने बैठता हूं तो मन उचाट हो जाता है। बंटवारे के दौरान हिन्दुओं पर बहुत जुल्म किया गया। उनका सब कुछ तहस-नहस हो गया। हमारी कई पीढ़ियां बर्बाद कर दीं।

Topics: विभाजन की विभीषिकाभारत का विभाजनकई पीढ़ियां बर्बाद कर दींहिन्दुओं को मुसलमान बना दियामुसलमान उन्हें घेरकर मार देते थेहिन्दुओं पर बहुत जुल्म किया गया
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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