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विभाजन : कहा गया, घर छोड़कर भाग जाओ’

भारत विभाजन के समय की एक-एक घटना याद है। उन दिनों लाहौर से लगभग 30 किलोमीटर दूर चिन्योट के कूचाबंदी इलाके में मेरा बहुत बड़ा मकान था। पिताजी लाहौर में साड़ी का कारोबार करते थे। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भी थे। उन दिनों उनके पास कार्यवाह का दायित्व था। हम दो भाई और तीन बहनें थे।

अरुण कुमार सिंहअश्वनी मिश्रWritten byअरुण कुमार सिंहandअश्वनी मिश्र
Oct 14, 2022, 01:57 pm IST
inभारत, विश्लेषण, मत अभिमत, संघ @100, तथ्यपत्र
पृथ्वीनाथ मल्होत्रा

पृथ्वीनाथ मल्होत्रा

न भूलने वाला पल

एक दिन अचानक बलूच सेना ने हिंदुओं के मकानों को घेर लिया और कहा कि यदि घर छोड़कर नहीं भागोगे तो घरों में आग लगा दी जाएगी।

पृथ्वीनाथ मल्होत्रा

चिन्योट, लाहौर, पाकिस्तान

 

आज भी मुझे भारत विभाजन के समय की एक-एक घटना याद है। उन दिनों लाहौर से लगभग 30 किलोमीटर दूर चिन्योट के कूचाबंदी इलाके में मेरा बहुत बड़ा मकान था। पिताजी लाहौर में साड़ी का कारोबार करते थे। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भी थे। उन दिनों उनके पास कार्यवाह का दायित्व था। हम दो भाई और तीन बहनें थे। उस समय कोई सार्वजनिक सवारी नहीं होती थी। इस कारण मेरे पिताजी ने एक घोड़ा रखा हुआ था और वे उसी से कहीं आते-जाते थे।

वे हाथ में शस्त्र भी रखते थे। वे नियमित शाखा जाते थे। एक दिन उन्हें शाखा में ही कुछ स्वयंसेवकों ने बताया कि लाहौर पाकिस्तान का हिस्सा बनने जा रहा है। इसलिए अब यहां से हिंदुओं को निकल जाना चाहिए, लेकिन मेरे पिताजी ने पलायन करने से बिल्कुल मना कर दिया। उनका कहना था कि घर-दुकान छोड़कर कहां जाएंगे, क्या करेंगे? हम लोग अपने हक के लिए संघर्ष करेंगे। लेकिन दिनोंदिन हालात खराब होने लगे। स्थिति ऐसी हो गई कि हिंदू अपने त्योहार भी नहीं मना पाये।

‘

डर के मारे हम लोग नंगे पैर, खाली हाथ घरों से निकल पड़े। रेलवे स्टेशन पहुंचे। लोगों को क्रम से गाड़ी में बैठाया या कहें कि जबरदस्ती ठूंसा जा रहा था। हमें भी एक गाड़ी में ठूंस दिया गया। रास्ते में पता चला कि हमसे पहले चलीं दो गाड़ियों में सवार सभी हिंदुओं को मार दिया गया है। रास्ते में हमारी गाड़ी को भी मुसलमानों ने रोक लिया, लेकिन हिंदुओं ने हिम्मत दिखाकर उनका मुकाबला किया और हम लोग जान बचाकर भारत आ गए। हमें राष्ट्रीय सेवक संघ के स्वयंसेवकों ने बचाया। अगर स्वयंसेवक समय पर नहीं पहुंचते तो शायद हम लोग भी रेलगाड़ी के अंदर ही मारे जाते।’

भारत विभाजन के बाद तो स्थिति और बिगड़ गई। उन दिनों मैं पांच साल का था। इस छोटी उम्र में ही मैंने वे बुरे दिन देखे हैं, जो किसी दुश्मन को भी देखने को न मिलें। हिंदुओं ने अपनी बहू-बेटियों को अपने ही हाथों मार डाला। ऐसा इसलिए किया गया, ताकि कोई हिंदू लड़की या महिला किसी मुसलमान के हाथ न लग जाए।

उन दिनों मुसलमान अगर किसी हिंदू लड़की को पकड़ लेते थे, तो उसके साथ वह सब किया जाता था, जिसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता। हिंदू महिलाओं के स्तन तक काट दिए गए। उनके साथ सामूहिक बलात्कार होता था। फिर तड़पा-तड़पा कर उसकी जान ले लेते थे। इसलिए हिंदू अपनी बहू-बेटियों को खुद मार देते थे।

इस माहौल में वहां रहना बहुत मुश्किल था। इस कारण अगस्त, 1947 के बाद भी लाखों हिंदू जान बचाने के लिए भारत आए। मेरा परिवार भी उन्हीं दिनों भारत आया। मुझे खूब याद है कि एक दिन अचानक बलूच सेना ने हिंदुओं के मकानों को घेर लिया और कहा कि यदि घर छोड़कर नहीं भागोगे तो घरों में आग लगा दी जाएगी।

डर के मारे हम लोग नंगे पैर, खाली हाथ घरों से निकल पड़े। रेलवे स्टेशन पहुंचे। लोगों को क्रम से गाड़ी में बैठाया या कहें कि जबरदस्ती ठूंसा जा रहा था। हमें भी एक गाड़ी में ठूंस दिया गया। रास्ते में पता चला कि हमसे पहले चलीं दो गाड़ियों में सवार सभी हिंदुओं को मार दिया गया है। रास्ते में हमारी गाड़ी को भी मुसलमानों ने रोक लिया, लेकिन हिंदुओं ने हिम्मत दिखाकर उनका मुकाबला किया और हम लोग जान बचाकर भारत आ गए। हमें राष्ट्रीय सेवक संघ के स्वयंसेवकों ने बचाया। अगर स्वयंसेवक समय पर नहीं पहुंचते तो शायद हम लोग भी रेलगाड़ी के अंदर ही मारे जाते।

हमारी गाड़ी होशियारपुर पहुंची। होशियारपुर में छह महीने रहे। फिर दिल्ली आ गए। इसके बाद हम लोग 16 साल आगरा रहे और फिर दिल्ली लौट आए। पढ़ाई-लिखाई के बाद मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस, आगरा में मेरी नौकरी लग गई। वहां सात साल नौकरी करने के बाद पंजाब नेशनल बैंक में प्रबंधक बना। 2002 में बैंक से सेवानिवृत्त हुआ। आज भले ही हमारा परिवार व्यवस्थित हो गया है, लेकिन विभाजन की टीस आज भी सालती है।
प्रस्तुति– अरुण कुमार सिंह एवं अश्वनी मिश्र

Topics: लाहौर पाकिस्तानहिंदुओं ने अपनी बहू-बेटियों को अपने ही हाथों मार डालाअचानक बलूच सेना ने हिंदुओं के मकानों को घेर लियाPartition of Indiaभारत विभाजनराष्ट्रीय सेवक संघ के स्वयंसेवक
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
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